प्रिय पाठकों !
आप सभी मेरा अभिवादन स्वीकार करें ! मैं, कहानी की तलाश में भटक रहा था , तब मैं उस कहानी की तलाश में अपने दोस्त जेलर के पास गया , मैंने सोचा -वहाँ बहुत से लोग आते हैं ,शायद कोई कहानी वहीं मिल जाये और मेरी तलाश पूर्ण हो। तब मैं मिला अपनी कहानी की नायिका ''अमृता देवी ''से ,मुझे अपने दोस्त पर भी आश्चर्य हुआ। वो मुझसे उसकी कहानी लिखने के लिए क्यों कह रहा है ?इसके लिए तो मुझे उनसे ही मिलना होगा। उनके विषय में जाने की मेरी उत्सुकता बढ़ जाती है ,आख़िर ये ''अमृता देवी '' कौन है ?इससे पहले ही ,मैं आपको बतला देना चाहता हूँ। मेरी इस कहानी के सभी पात्र मेरे मष्तिष्क की उपज हैं ,हकीक़त से इनका कोई वास्ता नहीं। काल्पनिक पात्र होने पर भी ,मेरा प्रयास यही रहेगा कि ये कहानी आपके सम्मुख ,चलचित्र की तरह ही प्रस्तुत करने का प्रयास कर सकूं।
आपको लगे कि ये घटनाएं तो हमारे आस -पास होती ही रहतीं हैं किन्तु इनका हकीक़त से कोई वास्ता नहीं है ,ये बात मैं पहले ही बता चुका हूँ। किन्तु मेरी तो ये जानने की जिज्ञासा बढ़ गयी है ,आख़िर ये ''अमृता देवी ''कौन है ?जो मेरे उपन्यास की नायिका बन सकती है ,नारी जीवन है ही ,इतना विकट ,हर बार कोई नया रूप नजर आता है। तभी तो नवरात्रों में ,नौ देवियों की पूजा की जाती है। जिनमें भिन्न -भिन्न रूप नजर आते हैं। कभी वो शक्ति का रूप दुर्गा है ,कभी पार्वती ,तो कभी सरस्वती और अन्नपूर्णा नजर आती है। नारी के साथ ही नर पूर्ण होता है किन्तु वही नर जब अपनी सीमाएँ लांघता है ,पृथ्वी रूपी नारी ,सब सहन करती है किन्तु जब उसकी सहन शक्ति समाप्त होती है ,तब उसका नया रूप ही नजर आता है। एक ऐसा रूप जिसकी ताकत वो सहन नहीं कर पाता और वो उससे बचने के लिए फिर चाहे भू लोक हो ,या पाताल लोक कहीं भी जगह नही मिलती और पहुंच जाता है -''मृत्यु लोक ''
फिर चाहे ,उसके लिए नारी को कानून की रक्षा के लिए जाना पड़ जाये -''जेल ''
वैसे मेरी ये कहानी पूर्णतः मौलिक है ,इसका किसी की भी ज़िंदगी से कोई लेना -देना नहीं है ,यदि ये किसी की ज़िंदगी से मिलती भी है ,तो ये मेरा अहोभाग्य होगा कि मैं ज़िंदगी को छू सकी।
जी हाँ , मेरे नए धारावाहिक का नाम है -''जेल ''ये कहानी जेल से ही आरम्भ होती है ,उसके लिए आप लोगों को भी मेरे साथ वहीं भृमण करना होगा और उत्साहवर्धन भी ,मेरे इस धारावाहिक को आगे बढ़ाने के लिए अपनी समीक्षा द्वारा मुझे प्रोत्साहन देते रहिये और प्रोत्साहित भी करते रहिये -धन्यवाद !
