Gam Khushiyan

 ख़ुशी ! या ग़म! ,पहले किसको सुनाऊँ ?

ग़म का तो वर्चस्व नजर आता है ,इस जहाँ में !


ख़ुशियाँ क्षणभर को, दिल बहलाकर चली जाती हैं। 

पीछे रह जाता है ग़म ,ग़म ! ही तो साथ निभाता है।



खुशियां ! ख़्वाबों और ख्यालों में भी, लुभा जाती हैं।

आँखें खुलते ही ,अपना साथी तो ग़म नजर आता है। 

 

उलझनों  में फंसा इंसान ,सोचता रह जाता है। 

खुशियों की तलाश में , अपना जीवन बिताता है।

 

लुका -छुपी खेलती खुशियाँ ,क्षणभर में फ़ुर्र हो जाती हैं। 

ग़म कभी साथ नहीं छोड़ता ,लिपट जाता है ,ज़िंदगी से .... 


ग़म से मिलती हैं ,तन्हाईयाँ ,रुसवाइयाँ ! इनके जाल में फंस जाता है।

 ख़ुशियों की चाह में ,बस एक क़दम ,एक क़दम, ज़िंदगी बीताता है। 



 



  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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