विवाह भी ,इक सुंदर सपना था ,
दो आत्माओं का ही नहीं ,
दो परिवारों का मिलन था।
जीवन का बोझ नहीं,सम्मान था।
दो घरों की ,शान और जान था।
इसके पश्चात ये.....
लॉटरी का टिकट बन गया।
अच्छी खुली तो जीवन स्वर्ग ,
वरना जीवन नर्क बन गया।
जिम्मेदारी बोझ बन गयी।
बिन मांगी तक़दीर बन गयी।
जबरदस्ती की, जेल हो गयी।
पढ़ी -लिखी, बुद्धि बेकार हो गयी।
अश्लीलता ,बेशर्माई सरेआम हो गयी।
रिश्तों की पवित्रता ,कहीं गुम हो गयी।
बिन शादी ,ज़िंदगी ख़ास से आम हो गयी।
