Bin shadi

विवाह भी ,इक सुंदर सपना था ,

दो आत्माओं का ही नहीं ,

दो परिवारों का मिलन था। 

जीवन का बोझ नहीं,सम्मान था। 

दो घरों की ,शान और जान था।  

इसके पश्चात ये..... 


लॉटरी का टिकट बन गया। 

अच्छी खुली तो जीवन स्वर्ग ,

वरना जीवन नर्क बन गया।

जिम्मेदारी बोझ बन गयी।  

बिन मांगी तक़दीर बन गयी।

 जबरदस्ती की, जेल हो गयी। 

पढ़ी -लिखी, बुद्धि बेकार हो गयी। 

अश्लीलता ,बेशर्माई सरेआम हो गयी।

रिश्तों की पवित्रता ,कहीं गुम हो गयी।  

बिन शादी ,ज़िंदगी ख़ास से आम हो गयी।

  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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