नीलिमा अपनी बेटी को ,अपने काम के विषय में समझा रही थी ,उसने बताया ,मेरी संस्था ऐसे ही जरूरतमंद लोगों के लिए है। माना कि , दुनिया में सभी तरह के लोग हैं। झूठे भी हैं और सच्चे भी ,जरूरतमंद भी हैं ,हम सभी जगह तो नहीं पहुंच सकते ,इसीलिए हमारे वश में जो होगा वो तो हम कर ही सकते हैं। और अपनी बेटी के सामने ही वो दीपक नाम के लड़के की सहायता करती है ,जिस कारण ,कल्पना को अपनी माँ पर गर्व होता है।
दूसरी तरफ ,विकास टीना के पास जाता है और टीना उसे बताती है ,वो दोनों दोस्त ही नहीं ,इससे बढ़कर भी कुछ थे। उनके माता -पिता ने भी ,उन्हें पसंद कर लिया था इसीलिए अब उनका प्रेम और मिलना पहले से ज्यादा बढ़ता गया। एक बार दोनों बाहर घूमने के लिए जाते हैं और वहाँ कुछ मनचले उन्हें छेड़ते हैं और उस समय धीरेन्द्र उसे छोड़कर भाग जाता है।
उसके पश्चात क्या हुआ ?
मैं रोने लगी ,उन लोगों ने मुझे घेर लिया ,मुझे भी उन्होंने एहसास दिलाया ,कि एक कायर इंसान से इश्क़ कर बैठी थी, मैं ! किन्तु वो लोग ऐसे ही मस्ती कर रहे थे ,उनका इरादा मुझे या उसे हानि पहुंचाने का नहीं था। मैं तो ड़र के कारण रोये जा रही थी ,तभी एक ने मुझे चुप कराते हुए कहा -तुम्हें ड़रने या रोने की आवश्यकता नहीं। हम लोग तो ऐसे ही मस्ती कर रहे थे। उस समय को मैं स्मरण करती हूँ ,आज भी काँप जाती हूँ बल्कि जिसने मुझे भरोसा दिया वो अपने दोस्तों से ही लड़ बैठा। मेरी कुछ भी समझ नहीं आ रहा था ,ये सच में ही ,ऐसा कर रहा है ,या फिर मेरा विश्वास पाना चाहता है। जिस पर विश्वास करके यहाँ तक आई ,वो तो धोखा देकर ही भाग खड़ा हुआ। किन्तु अब मैं अपने में थोड़ा विश्वास जगा ,शांत हो गयी थी। तब उस लड़के ने ही मुझे अपनी गाड़ी में बैठाना चाहा, किन्तु तब भी मुझे उन लोगो पर इतना विश्वास नहीं हुआ था ,मैंने उनके संग जाने से इंकार कर दिया। उस लड़के ने मुझे अपना नंबर दिया और अपने दोस्तों संग चल दिया।
तभी दूर से आता मुझे ,धीरेन्द्र दिखलाई दिया उसे देखकर मेरी आँखों से अंगारे बरसने लगे। तभी वो लोग भी निकल गए। धीरेन्द्र मेरे करीब आया और बोला -तुम ठीक तो हो !
कैसी हो सकती हूँ ? जिसका होने वाला पति उसे गुंडों के बीच छोड़कर भाग गया हो।
वो हंसा और बोला -तुम तो ख़्वामहखा परेशान हो रही हो ,मैं जानता था कि इस तरह सड़क पर वो लोग कुछ नहीं कर पायेंगे। मेरे भाग जाने से ,वो हँसेंगे ,तब तक मैं सोचकर गया था कि किसी न किसी को सहायता के लिए बुला ही लूंगा ,मैंने पुलिस को भी फोन कर दिया था।
कहाँ है ?तुम्हारी पुलिस !मैंने क्रोध में पूछा।
तुम तो जानती ही हो ,पुलिस हमेशा से ही देरी से आती है ,वो इस घटना को बड़े हल्के में ले रहा था किन्तु इस घटना से ,मैं अंदर तक हिल गयी थी। उसका कथन था -कुछ हुआ तो नहीं ,मेरा कहना था -हो जाता ,तब मैं क्या करती ? कहाँ जाती ?
उसका इस तरह से ,भाग जाना वो मुझे बार -बार उसकी कायरता का स्मरण करा रहा था।उसने अपनी यात्रा आगे जारी रखने के लिए कहा भी ,किन्तु मैंने अब आगे जाने से इंकार कर दिया। वो मेरी मनःस्थिति समझ नहीं रहा था ,या फिर समझना नहीं चाहता था। माना कि, इस तरह भागकर उसने मज़ाक भी किया तो बड़ा ही भद्दा मज़ाक था। मैं उसके साथ घर तो आ गयी किन्तु उस घटना के पश्चात मैंने उससे मिलना जुलना बंद कर दिया। उसका हर बार यही कथन रहता ,कुछ हुआ तो नहीं ,कुछ होता उससे पहले ही मैं आ जाता। मेरी शिकायत थी - कि वो गया ही क्यों था ?
इस कारण से तुम्हारी दोस्ती समाप्त हो गयी ,उसके पश्चात क्या तुमने शादी की ?
हाँ ,मैंने उसी लड़के से विवाह किया जिसने उस समय में ,मुझमें विश्वास जगाया था। उसका कथन था -तुम्हारा रोना मुझसे देखा नहीं गया ,मुझे तुमसे हमदर्दी ही नहीं ,प्रेम भी हो गया। हमने कोई जल्दबाज़ी नहीं की ,उस रिश्ते को चार -पांच साल दिए।
इस बीच क्या धीरेन्द्र कभी नहीं मिला ?
उसने एक -दो बार अपनी सफाई भी दी ,तभी मुझे उसी के एक दोस्त से पता चला कि मुझे पटाने के लिए उसने अपने दोस्तों से शर्त भी लगाई थी। तब मेरे मन में उसकी बची -कुची इज्जत भी न रही। मेरे साथ रहने पर ,अपने दोस्तों को जतलाता ,वो किसी को भी अपनी अँगुलियों पर नचा सकता है। कोई भी लड़की उस पर जान छिड़क सकती है। तब उसे एहसास हुआ ,वो कितनी बड़ी गलती कर बैठा था ?उसने ज़िंदगी को तो जैसे खेल समझ रखा था। तब मैंने पारस से शादी करके उसे जतला दिया उसकी क्या औकात है ?कई साल उसकी कोई खबर नहीं मिली। एक दिन पता चला ,उसने भी शादी कर ली ,मेरे मन में ,एक बार तो इच्छा जाग्रत हुई कि उसने किससे शादी की है ,ऐसी कौन सी लड़की है ,जो उससे विवाह करने के लिए तैयार हो गयी। तब पहली बार मैंने उसकी बीवी को सब्ज़ी खरीदते देखा।
तब पता चला ,उसने अपने से कम से कम पंद्रह बरस छोटी लड़की से विवाह किया है ,उसका बाप लालची था ,ऐसा ही कुछ सुनने में आया। उसका जो भी कदम उठता सिर्फ मुझे चिढ़ाने के लिए होता। उसे लगता मैं उसकी ऐसी हरकतों से परेशान होउंगी ,जलन होगी। तब मैं अपनी कम्पनी की तरफ से कहीं भी जाती ,उसे पता लग जाता या लगा लेता और वो अपनी बीवी को लेकर वहीं पहुंच जाता।वो दिखाना चाहता था कि मेरे बग़ैर भी ,वो खुश रह सकता है।
जब वो तुम्हें इतना पसंद करता था ,तब उसने ऐसा व्यवहार क्यों किया ?
उसको किसी की भावनाओं से कोई लेना -देना नहीं था ,उसे तो बस अपने इज्जत -बेइज्जती की चिंता रहती थी। मैंने उससे मिलना छोड़ दिया ,उससे विवाह नहीं किया इसमें उसे अपनी बेइज्जती लग रही थी।
आपको क्या लगता है ?उसने आत्महत्या क्यों की होगी ?
कुछ भी कहना मुश्किल है ,उसने इतने पाप किये हैं ,वो स्वयं ही उन पापों का बोझ नहीं ढ़ो पा रहा होगा और रेल गाड़ी के सामने आ गया होगा।
यदि मैं ये कहूँ कि उसने आत्महत्या नहीं ,उसकी हत्या हुई है ,तब आप क्या कहेंगी ?
क्या ???ऐसे कैसे हो सकता है ?किसने की होगी ?उसकी हत्या !

