उसका ''कॉफी हॉउस '' में आना ,
मुझे ''प्रेम '' से बुलाना ,
अच्छा लगता था ,
अच्छा लगता था ,
मुझे उसका यूँ सताना ,
मेरे लिए ,उपहार लाना ,
मुस्कुराते हुए,
कॉफी पीना ,पिलाना ,
आज भी स्मरण हो आते हैं ,
वो दिन.......
अब ,जब भी कॉफी पीता हूँ ,
एक कप अपना ,
दूसरा उसका बनाता हूँ।
अच्छा पति होने का ,
फर्ज़ जो निभाता हूँ।