मैं ,इक नदिया !
चंचल सी........ ,
बहती ,इठलाती ,
बलखाती ,लहराती ,
चलती ही जाती ,
अपनी ड़गरिया..... ।
तेज़ तूफानों से टकराती।
बाधाओं से न.... घबराती।
बहती धारा हूँ ''अविरल ''
कुछ पल ठहरती हूँ ,
रूकती हूँ ,थमती हूँ।
धाराओं में ,बंट जाती ।
राह ढूंढ़ ,आगे बढ़ जाती।
पुनः एक हो जाती हूँ।
मैं ,फिर से बहती जाती हूँ।
मैं ,इक नदिया !
चंचल सी........
