नमस्कार दोस्तों और बहनों !
इन दिनों में ठंड तो बहुत पड़ रही है ,और बार -बार कभी चाय तो कभी कॉफी पीने का दिल करता ,किन्तु आज आपके लिए मैंने विशेष कॉफी बनाई है। चलिए ,आज आपको कॉफी पीने के साथ -साथ कॉफी बनाने का सरल तरीका भी बताते हैं। जब हम पैदा होते हैं ,हमारा जीवन , दूध की तरह ,स्वच्छ ,श्वेत ,निर्मल होता है ,न ही कोई दाग़ ,न ही कड़वाहट ,उसमें कुदरती मिठास होती है। अब उस जीवन रूपी दूध को हम ,इस ज़िंदगी के मानसिक ,शारीरिक ताप से उबाल देंगे। हमारे मन में जो भी विचार आते हैं ,और हमारा तन भी जो बाहरी अच्छाई और बुराई को ग्रहण करता है। उससे इस जीवन में उबाल आना स्वाभाविक है।
ये बात तो दीदी !समझ नहीं आई , तपस्या बोली।
इसमें न समझने वाली ,बात ही क्या है ?जब हम पैदा होते हैं ,तब हमारा मन दूध जैसा उज्ज्वल रहता है किन्तु जैसे -जैसे हम बड़े होने लगते हैं। तब हमारे मन में लालच ,घृणा ,लोभ ,मोह इत्यादि मानसिक विकार आने लगते हैं शरीर में भी परिवर्तन होता है ,तब हम इस ज़िंदगी रूपी भट्टी में उबलने लगते हैं।
तब इसमें कॉफी कैसे बनेगी ?कॉफी की कड़वाहट और उसका स्वाद कैसे लायेंगी ?दीपिका ने पूछा।
धैर्य ,लोभ ,घृणा ,जलन जैसी कड़वी कॉफी ! हमारे जीवन में धीरे -धीरे घुलने लगती है ,इसका भी अपना मजा है। जो ये कार्य करता है ,उसके लिए स्वाद और जो नहीं करता जिसके साथ हो रहा है ,उसके लिए इसमें कड़वाहट ही है।
तब इसको थोड़ा मीठा बनाइये ,उसे कैसे बनाएंगे ?
पार्टी समारोह ,दोस्त और रिश्तों की मिठास है ,इसमें जब इसमें घुलेगी ,तब ये कड़वी कॉफी जैसी ज़िंदगी कुछ -कुछ मीठी भी लगने लगेगी।
चलो !बन गयी कॉफी ! ज़िंदगी की।
न... न अभी इसकी सजावट बाकि है ,इस जीवनरूपी कॉफी में ,बड़े प्रेम से 'हार्ट 'बनाकर ले आती ,'जीवन संगिनी 'बड़े प्यार से संग हमारे पीती ''जीवन संगिनी ''सम्पूर्ण जीवन में माता -पिता के पश्चात ये ऐसा अहम रिश्ता है ,जो साथ रहे और निभाए ,तब जीवन की इस कॉफी का स्वाद !कड़वा हो या मीठा सब अच्छा लगने लगता है।
दीदी ! अब तो बन गयी कॉफी !
न..न , किसी की भी ज़िंदगी को देखो ! ख़ुशहाल और शांत ही नजर आती है ,ठीक इन 'झाग या 'फेन ' की तरह और जब इसका बड़ा सा घूंट भरते हैं ,घूंट भरते ही ,जीभ जला देती है। इसी तरह ज़िंदगी को देखोगे तो सुंदर शांत ,अद्भुत नजर आती है ,इसे जियोगे तो...... जीभ की तरह झुलस कर रह जाते हैं।
लगती जैसे ठंडी हो ,पियो तो जीभ जलाती ,
जीवन को जीने की ललक और भड़काती।
चलिए !आज की कॉफी की कक्षा यहीं समाप्त करते हैं , इसी विधि से कॉफी बनाइये और दी गयीं चेतावनी के आधार पर पीजिये ,तब हमें बताइये कॉफी कैसी लगी ? इस ठंडी का लाभ उठाइये और गर्मागर्म कॉफी नोश फ़रमाइये। धन्यवाद !फिर मिलेंगे।

