जादू का भंडार भरा है ,
हर नारी की रसोई में ,
जादू से ये अटा पड़ा है ,
दादी ,नानी के नुस्खों में।
थोड़ी सी हींग ,
''तडके की डिबिया '',
रोती थी जब, उनकी बिटिया ,
नाभी पर जब हींग लगाई ,
नन्ही बिटिया भी मुस्कुराई।
वात ,पित्त, कफ़ को करते दूर ,
सभी मसाले घर में हैं ,
जाना क्यों है ?घर से दूर......
नानी ने ''जादुई दवा ''बनाई ,
जब चुनमुन को उल्टी आई।
जब '' जादुई पुड़िया ''खाई।
चुनमुन क्षण में मुस्काती आई।
