सलमा दरवाजे पर खड़ी हुई बहुत देर से, दरवाजे को खटखटा रही थी किंतु किसी ने भी दरवाजा नहीं खोला -जीनत ! जीनत ! अरे दरवाजा खोल... मैं तेरे लिए खाना लेकर आई हूं।
यहाँ आप क्या कर रही हैं ? आपने देखा नहीं, दरवाजे पर बाहर से कुंडी लगी हुई है, पड़ोसन ने जब सलमा को, दरवाजा पीटते देखा , तब वह बोली - यहां जो औरत रहती थी, उसे तो आज सुबह ही, मैंने अपने बच्चों के साथ कहीं जाते देखा है। मैंने तुम्हें यहां आते -जाते कई बार देखा है ,किन्तु कभी पूछा नहीं ,वो तुम्हारी क्या लगती थी ?
वो ,मेरी बेटी है ,उसके बच्चे छोटे हैं ,इसलिए उसे देखने चली आती हूँ। क्या तुमने, उससे पूछा नहीं, कि तुम कहां जा रही हो ? या उसने कुछ बताया हो।
नहीं जी,मुझे क्या ज़रूरत पड़ी है ? किसी से कुछ पूछूं। वह तो किसी से बोलती भी नहीं थी , देखने से ही लगता था,वो गुस्से में रहती हो। उसका घरवाला भी बहुत दिनों से नहीं दिख रहा ,क्या कोई परेशानी है ?
नहीं जी ,परेशानी कैसी ? उसका शौहर बाहर कमाने गया है इसीलिए बच्चों को देखने चली आती हूँ।
एक औरत अपने घर की बात को ,तब तक छुपाये रखने का प्रयास करती है ,जब तक' पानी सिर से ऊपर न गुज़र जाये।' यही ज़ीनत की अम्मी कर रही थी ,उसका प्रयास यही था कि अपनी बेटी की कमियों को जानते हुए भी ,वो उसकी सुखद गृहस्थी को बसते हुए देखना चाहती थी। उसे शक़ है,कि आदिल बच्चों को छोड़कर कहीं चला गया है किन्तु अभी भी उम्मीद लगाए उसके बच्चों को और अपनी बेटी को इस उम्र में भी संभालने की कोशिश कर रही है। इतनी हिम्मत एक माँ में ही हो सकती है।
आज सुबह जब मैं घर के बाहर काम कर रही थी ,तब मैंने उसे जाते हुए देखा, अब तुम दरवाजा पीट रही हो तो इसलिए बताने आ गयी क्योंकि तुम्हें, मैंने इस घर में आते-जाते देखा है। यदि मैं,उससे पूछ भी लेती और वो कह देती' तुम्हें क्या मतलब ?'देखो !बहन जी आजकल भलाई का ज़माना नहीं है,कहकर वो अपने घर के अंदर जा ही रही थी।
सलमा ने पूछा ,क्या तुमने, उसके साथ किसी आदमी को जाते हुए देखा ? क्या कोई उसके साथ था ?
नहीं, वह सिर्फ अपने बच्चों के साथ थी, उसके साथ मैंने किसी आदमी को जाते नहीं देखा।
मैं,उसकी कोई रिश्तेदार नहीं, मैं उसकी मां हूं ,चिंता तो लगी ही रहती है ,उसका शौहर यहां होता तो चिंता की कोई बात नहीं थी। न जाने, मेरी बच्ची कहां चली गई है ? परेशान होते हुए सलमा बुदबुदाते हुए वहां से चली आई।
घर में जाकर, उसने कोहराम मचा दिया और रोते हुए बोली -न जाने, वो कहां चली गई है ? उसे तो इतनी भी अक्ल नहीं है , कि बच्चों का ख़्याल रख सके ,अपना ही ख्याल नहीं रख सकती है ,बच्चों का कैसे रखेगी ? पहले उसका शौहर गायब हो गया , और अब वह कहीं चली गई है ? याकूब ! बेटा जा !तू ,उसे ढूंढ कर ले आ ! वो और बच्चे तो भूखे होगें, उसे खाना भी बनाना नहीं आता। वो कहां जाएगी, क्या करेगी ? कुछ समझ में नहीं आ रहा।
अम्मी !अभी आप नाहक़ ही परेशान हो रही हो ! यहीं कहीं आसपास गई होगीं , भूख लगेगी तो लौटकर यहीं आ जाएगीं । आपने देखा नहीं,' आजकल ''उनका गुस्सा नाक पर ही रखा रहता है,'' आता -जाता कुछ नहीं है लेकिन ''गुस्से में आग बबूला हो जाती है। ''
वह गुस्सा क्यों करेगी और किस पर करेगी ?
अम्मी !आप समझती नहीं हो ,उन्हें, मैंने देखा है ,वह कुछ करना ही नहीं चाहती है, अम्मी ! अब उसे और आपको समझना होगा ,हालात ऐसे नहीं रहे हैं। जब अब्बू जिन्दा थे ,तब वो सब संभालते थे ,कारोबार भी अच्छा था किन्तु अब उसे समझना होगा। क्या हम अपने काम अपने आप नहीं करते हैं ? मुझे तो लगता है ,उसका शौहर भी उसे, इसीलिए छोड़कर चला गया। वो कुछ करना भी तो नहीं चाहती।
तुम समझ नहीं रहे हो ,उसकी माली हालत भी ठीक नहीं है और दिमाग़ी हालत भी ठीक नहीं है। क्या तुम लोग नहीं जानते हो, वो किन -किन हालातों से गुज़री है ?
हो सकता है , वो अपने शौहर पर गुस्सा हो, अपने बच्चों से नाराज हो।
उसके बच्चे अभी छोटे हैं और आदिल भी मेहनती और अच्छा इंसान है ,उसकी नाराज़गी नाजायज़ है, तैमूर बोला।
तभी तो परेशान हूं, गुस्से में कहीं उल्टा- सीधा न कर दे ! बच्चों को कोई नुकसान ना पहुंचाएं। कोई भी बात हो किन्तु अब वो यहाँ नहीं है ,तुम लोग उसे ढूंढकर ले आओ ! दो बच्चों के साथ कहाँ जाएगी ?भूख -प्यास से परेशान होगी।
अम्मी की बातें सुनकर दोनों भाई जगह -जगह ज़ीनत को ढूंढने निकल गए बहुत जगह धक्के खाये किन्तु ज़ीनत कहीं नहीं मिली ?
लगभग तीन -चार घंटे धक्के खाने के बाद ,तब दोनों भाई वापस आये, तैमूर गुस्से से बोला -अम्मी !आपने ही उसकी आदतें ख़राब की हैं ,उसे कभी अपनी ज़िम्मेदारियों को समझने ही नहीं दिया। बच्ची समझकर उसकी ससुराल में भी काम करने पहुंच जाती थीं। वो क्या हम दोनों से भी छोटी हैं ? क्या हम अपनी जिम्मेदारियां नहीं समझ रहे हैं। अब आप उसकी फिक्र करना बंद करो ! उसे अपनी जिंदगी जीने दो ! जब समाज में निकलेगी, लोगों को देखेगी, तभी उसे समझ आएगी। जिंदगी क्या है ? आप हमेशा उसकी परवाह करती हैं , उसे कुछ करने भी नहीं देतीं और जिसका रिज़ल्ट यह निकला , घर में पड़े -पड़े वो बीमार हो गई है। अब कहीं भी गयीं हैं ,हो सकता है ,वो ठीक भी हो जायें ।
तुम्हारी बात मैंने मानी, हमेशा ही मैंने उस पर ध्यान दिया किन्तु अब क्या करूं ?उसके पास पैसे भी हैं या नहीं ,क्या करूं ? कम से कम ये तो पता चले ,वो कहाँ गयी है ?औरत जात दो बच्चों के साथ कहाँ गयी होगी ? कभी इस तरह घर से बाहर नहीं निकली ,बाहर की दुनिया को समझती नहीं है, कहते हुए उसके परेशानियों को सोच -सोचकर रोने लगी।
ज़ीनत ने जब अपने घर में, अपने भाइयों की बातें सुनी तो उसे गुस्सा आया और वो वापस अपने घर आई ,घर में सामान में न जाने क्या ढूंढने लगी ? उसे आदिल की याद भी सता रही थी और भूख भी लगी थी। उसका शौहर उसे छोड़कर भाग गया ,यह बात उसके दिमाग़ में हथौड़े की तरह बज रही थी। दोनों बच्चे रो रहे थे ,उसे उन पर गुस्सा आया ,तब उसने दोनों बच्चों को अपने साथ लिया और निकल पड़ी। वो नहीं जानती थी ,उसे कहाँ जाना है ? पढ़ना भी नहीं आता था। चलते -चलते बस अड्डे तक पहंच गयी और एक बस में बैठ गयी। पहली बार बस से सफ़र कर रही थी।
