न भूतों का गांव देखा !
न ही देखे ,भूत कहीं !
न ही, देख सका है ,कोई ,
भूतों के किस्से मिलते हैं ,
कुछ भूत संग रहते हैं।
आज , में रहकर भी ,
भूत , संग जीते हैं।
कल को खोजते हैं।
जो गया ,बीत गया ,
न ही ,आज में जीते हैं।
कुछ कहानीकार !
कुछ इतिहासकार !
भूतों की बस्ती में ।
ख़्याली भूत , संग जीते हैं ,
उनसे ही ,आगे बढ़ते हैं।
स्वप्न कहानी में !
भूतों की बस्ती में !
कुछ नया ढूंढते हैं।
न ही ,कहीं है ''भूत ''
न ही ,उनकी हस्ती है।
