प्रातः काल की ठंडक ,
अदरक वाली चाय कड़क !
तुम और तुम्हारा साथ।
प्यार से भर देता मिठास ,
तुम्हारा स्पर्श ,तुम्हारा हाथ।
वो पल लगता है ,कुछ ख़ास।
सुहाने पल ,वो जीवन के ,
तुम मधुर मुस्कान लिए ,
पुकारती हो ! 'तुम्हारी चाय ''
गीले बालों के झुरमुट में झांकती हो।
उस ठंडी में भी ,गर्माहट भरती हो।
अब तो आदत सी बन गयी है ,
तुम और तुम्हारा प्यारा साथ ,
तुम्हारे हाथों की चाय का एहसास !
चार्ज़ हो जाती हूँ !
सुनो न......
बहुत अच्छा लगता है ,
जब तुम मुझे उठाकर ,
कहते हो ,''तुम्हारी चाय ''
तुम्हारे प्यार के वो शब्द !
दिनभर की थकान भूल ,
मैं ,फिर से चीनी की तरह ,
तुम्हारी ज़िंदगी ,की चाय में ,
घुलने के लिए ,'चार्ज' हो जाती हूँ।

