Kismat ka you turn

जिंदगी अपनी राह पर बढ़ती चली जा रही थी।

 न जाने , वह कहां और किधर जा रही थी  ?

न मंजिल का था पता, न ही कोई राह सूझती थी। 

जिंदगी बस आगे ही आगे, बढ़ती जा रही थी। 



मंजिल की तलाश में, मैं भी उस राह पर बढ़े जा रही थी। 

बहुत चलने पर, ढूंढने पर भी, मंजिल नजर नहीं आ रही थी। 

परिश्रम मैंने भी किया , परिश्रम उतना ही उसने भी किया। 

फिर वो क्यूँ कर आगे निकल गया ? यही प्रश्न ख़ुद से किया ?


क्या यह मेरी किस्मत का दोष है?जिंदगी समझ नहीं आ रही थी। 

पहुंचना मुझे भी मंजिल तक था,पर किस्मत झटके खा रही थी।

 जीवन में एक यू टर्न आया, यू टर्न आते ही किस्मत पलट गई। 

जिस मंजिल तक था पहुंचना, सामने ही वो मंजिल  दिख गई।

 

तब जीवन में यह सीखना यार, जब भी जीवन में यू टर्न आया। 

एक नई दिशा पर बढ़ते कदमों से , मंजिल को हमने पाया। 

सुकूं तो यही है ,शुरुआत भले ही, दोबारा करनी पड़ जाए। 

 कभी तो किसी मुकाम पर मनचाही मंजिल हमें मिल जाए। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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