मेरे सपनों की काल्पनिक उड़ान सी तुम !,
तुम जहाँ ,मेरी कल्पना ,मेरी भावना सी तुम ।
मेरी कल्पना में तुम ,उड़ान भरती नज़र आतीं ,
मेरे कानों में ,धीमे से ,मुस्काती, कुछ कह जातीं ।
मेरी धड़कनों को बढ़ा ,मेरी रूह में उतर जातीं ,
तुम अलसाई सी ,लेती अंगड़ाई सी ,आतीं।
तुम!कभी हवा के झोंके सी,कभी ठंडी फुहार सी ,
कभी रातों की चांदनी ,कभी मिश्री की मिठास सी।
आती हो ,हौले -हौले ,मेरी जुल्फों को सहलाती सी ,
कल्पनाओं में ,जगाती हो सपने ,लगती हो, हकीकत सी।
तनिक, बहला लूँ ,अपने आपको तेरी मीठी बातों से ,
मेरे दिल के आंगन में ,तुम आतीं, छम -छम पायल बजाती सी।
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