Mere sapnon ki udan si tum !

 मेरे सपनों की काल्पनिक उड़ान सी तुम !,

तुम जहाँ ,मेरी कल्पना ,मेरी भावना सी तुम । 



मेरी कल्पना में तुम ,उड़ान भरती नज़र आतीं ,

मेरे कानों में ,धीमे से ,मुस्काती, कुछ कह जातीं ।


मेरी धड़कनों को बढ़ा ,मेरी रूह में उतर जातीं ,

तुम अलसाई सी ,लेती अंगड़ाई सी ,आतीं।

  

तुम!कभी हवा के झोंके सी,कभी ठंडी फुहार सी ,

कभी रातों की चांदनी ,कभी मिश्री की मिठास सी।

 

आती हो ,हौले -हौले ,मेरी  जुल्फों को सहलाती सी , 

कल्पनाओं में ,जगाती हो सपने ,लगती हो, हकीकत सी।

 

तनिक, बहला लूँ ,अपने आपको तेरी मीठी बातों से ,

मेरे दिल के आंगन में ,तुम आतीं, छम -छम पायल बजाती सी। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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