ये तो जैसे चमत्कार हो गया ,श्याम उस दरवाजे तक पहुंचा ही था कि एकदम से दरवाजा या यूँ कहो ,वो दीवार हट गयी और श्याम कुछ दूरी से ही छलांग लगाकर दीवार पार कर गया वरना आज तो उस विशाल ,भयानक सर्प का निवाला तो बन ही जाता। दीवार पार करते ही, किसी ऐसी शिला पर बैठा ,जहाँ बैठकर वो अपनी उखड़ी साँसों को और कांपते पैरों को स्थिर कर सके। तभी उसके सामने पानी लिए मनु उसे दिखलाई दी। श्याम ने उससे पानी लेकर पिया और उसकी तरफ देखकर बोला -तुम...... सही...... समय पर आईं........ ।
क्या है ,वहां ?और तुम दोनों वहाँ क्यों चले गए थे ?अब उसने देखा श्याम तो अकेला ही है ,तब उसने पूछा- कीर्ति कहाँ है ?
श्याम की सांसें अभी भी उखड़ी हुई थीं ,उसने कीर्ति की तरफ देखकर 'न 'में गर्दन हिलाई।
क्या मतलब ?कीर्ति तो तुम्हारे साथ थी।
हाँ.........
तब वो ,अब तुम्हारे साथ नहीं है ,तो कहाँ है ?
पता नहीं ,कहकर उसकी रोने जैसी हालत हो गयी।
शांत हो जाओ और मुझे बताओ ! क्या हुआ ?
कीर्ति ,वहीं किसी स्थान में मिटटी में धंसती चली गयी ,अब मुझे ये भी नहीं पता ,कि कहाँ गयी ? पाताल में समा गयी या अब वो जिन्दा भी है या नहीं।
ये तुम !क्या कह रहे हो ? मनु आश्चर्य चकित होते हुए बोली। यहाँ ऐसा भी कोई स्थान है।
एक नहीं ,कई जगहें भी हो सकती हैं ,वहाँ ऐसे कई टीले से थे ,जो शायद मौत के मुँह में ले जाएं ,वहां तो जैसे मौत ही ताँडव कर थी ,अनेक छिपकली और सर्प ,न जाने किस -किसके कंकाल वहाँ थे ?कहकर श्याम अब रोने लगा। इसीलिए इधर कोई आता नहीं ,किन्तु तुम नहीं मानी। तुमने अपनी एक दोस्त को खो दिया।
ढांढस बंधाते हुए ,मनु बोली -चिंता न करो ! जब उसने हमारी अब तक रक्षा की है ,आगे भी करेगा।
तभी श्याम की दृष्टि ,मनु की अंगुली पर गयी और उसने पूछा -तुम्हारे पास ये अँगूठी कहाँ से आई ? इससे पहले तो ये तुम्हारे पास नहीं थी और तुम उस दरवाजे के सामने से एकाएक कहाँ चली गयीं थीं ?वो सब मैं बाद में बताऊंगी ,कहते हुए अपने हाथ की अंगूठी को घुमाने लगी। मन ही मन कुछ बुदबुदा रही थी ,श्याम उसे आश्चर्य से देख रहा था और मन ही मन सोच रहा था - ये लड़की क्या है ?कोई जादूगर है या फिर साधारण इंसान या फिर रहस्मयी इंसान।
कीर्ति उस कमरे में ,मुँह छिपाये बैठी थी ,उसके चारों और शव ही शव थे ,मन ही मन सोच रही थी कंकालों से निकलकर आई भी तो मृत्यु के द्वार पर आकर अटकी। ये किसके शव हैं और यहाँ क्यों है ?जब उसे छुपे हुए कुछ देर हो गयी। तब वो थोड़ा आश्वस्त सी हुई तब उसने ,उस स्थान से बाहर निकलने की सोची तभी उसे कुछ आहट सी सुनाई दी वो वापस अपने स्थान पर चली गयी। अब उसका भय थोड़ा कम हो गया था। अब उसके ऊपर जासूसी का भूत सवार ,जो हो गया था ,तभी उसने देखा ,दो आदमी ,नहीं ,शायद डॉक्टर आये थे। वो कमरे के दूसरे कोने पर पहुंचे ,शायद कोई इंसान था। बेहोश या मर गया कुछ पता नहीं चल पा रहा था।
ये खून की कमी के कारण मर गया ,एक बोला।
मर ही जाना था ,खून इसमें बचा ही कहाँ था ?वो तो हमने निचोड़ लिया। शीघ्र से शीघ्र ही इसके बाक़ी के अंग भी निकालकर ,उसी स्थान पर पहुंचा दो ज्यादा देर होने पर ,यहाँ बदबू ही फैलेगी। कल जिनके अंग निकालकर भेजे थे ,उनके शरीर को उसी जगह डलवा दो। कहते हुए ,वे लोग किसी वहशी की तरह उसके शरीर की चीर -फाड़कर उसके अंग निकालने लगे।
यानि कि ये लोग डॉक्टर हैं और इस स्थान पर ये कार्य करते हैं ताकि किसी को वहम भी न हो। ये लोगों के खून के साथ -साथ उनके अंग भी बेचते हैं। तो ये कार्य चल रहा है इसीलिए यहाँ कोई नहीं आता। वो सोच रही थी ,थोड़ी सी आहट पर ही ,ये सचेत हो जायेंगे। कीर्ति अभी भी हाथ से मुँह को दबाये बैठी रही ताकि किसी भी तरह से इन्हें उसके होने का आभास न हो। किन्तु वो दृश्य देखकर उसकी आँखों से आंसू बहे जा रहे थे।
इसी तरह वो लोग ,एक -दो जगह और गए ,एक को देखकर ,बोले -इसको अभी तक फेंका नहीं ,इसमें बदबू आनी शुरू हो गयी।
अरे ! इसमें वो ही क्या करेगा ? चलो हम ही फेंक देते हैं।
नहीं , जिसका काम है ,वही करेगा उसने सख्ताई से कहा । चलो ,अब तक तो वे लोग भी आ ही गए होंगे कहकर वो दोनो बाहर निकल गए।
अब तक कीर्ति का सारा ड़र समाप्त हो चुका था और वो भी धीरे से बाहर निकली। किन्तु अब प्रश्न ये उठ रहा था कि वो किधर जाये ? वे लोग एक गलियारे से होते हुए ,दूर एक कमरे के अंदर चले गए। अब कीर्ति सोच रही थी- कि ये लोग किसकी प्रतीक्षा में थे ? शायद वही लोग तो नहीं ,जिनके पीछे रोहित और तन्मय गए थे। रोहित और तन्मय भी अब तक तो शायद आ गए हों ,किन्तु वो स्वयं किधर जाये ????ये समझ नहीं आ रहा था।
चारु को भी ,उस कमरे में बंद हुए ,लगभग एक दिन हो गया। तब उसने सोचा -क्यों न इन लोगों को कोई तिगड़म करके इन लोगों को अपनी बातों से बहलाया जाये। उसने अपना सामान टटोला आज अपने सामान को देखकर उसे अत्यंत प्रसन्नता हुई क्योकि उसमें उसके टैरो कार्ड्स रखे हुए थे। अब उसने स्वयं के लिए देखना आरंभ किया। बाहर से वो लोग देख रहे थे कि अचानक इस लड़की ने, ये पिटारा सा खोलकर क्या निकाला है ?

