Bevafa sanam [part 27]

मनु को अपने पूर्वजन्मों के विषय में पता चलता है और उसे ये भी पता चलता है कि इससे पूर्व जन्म में वो एक रियासत की राजकुमारी थी। और उस जन्म में ही उसने उस तांत्रिक का अंत किया। वो प्रसन्न हो जाती है कि चलो !उससे पीछा छूटा किन्तु उसका ये सोचना गलत था क्योंकि उसे पता चलता है ,उस तांत्रिक ने भी उसी की तरह इस पृथ्वी पर जन्म ले लिया है। ये बात सुनकर मनु परेशान हो जाती है और पूर्वजन्म की अपनी माँ से पूछती है ,आपको कैसे मालूम ?

ये भी कोई पूछने की बात है ,हमें तो तुम्हारे हर जन्म के विषय में  मालूम है फिर उसने तो अबकि बार ही जन्म लिया है। 


मैं ये कैसे जान पाऊँगी, कि वो कौन है ? इतनी बड़ी दुनिया में वो कहाँ और कैसा होगा ?मैं उसे कैसे पहचानुंगी ?हो सकता है ,उसके मन में अब कोई बैरभाव या किसी प्रकार की कोई दुर्भावना ही न हो। 

 तब वो बताती हैं -तुम्हें  इधर -उधर , कहीं  भी जाने की आवश्यकता नहीं है ,वो स्वयं ही तुम्हें ढूंढते हुए आ जायेगा। हो सकता है ,वो तुम्हारे ही आस -पास हो, जो अपने ही हित की ,स्वार्थपूर्ण बातें करे। हो सकता है ,वही  हो। हो सकता है ,वो भी तुम्हे भूल चुका हो किन्तु तुम्हारे क़रीब आने पर उसे सब स्मरण हो जाये ,जानबूझकर तुम्हे कुछ न बताये ,तुम्हें सतर्क रहना होगा। 

मनु अभी भी परेशानी में थी ,वो कुछ भी कह नहीं रही थी ,तब उसकी माँ ने उसे एक अंगूठी दी ,इसे अपनी अंगुली में पहने रखना ,जब भी वो तुम्हारे साथ या पास होगा ,तुम्हारी अंगुली में हल्की सी जलन होगी और तुम समझ जाना ,कहकर उसे वो अँगूठी थमा दी। 

कीर्ति और श्याम अनजाने द्वार से दूसरी जगह पहुँच जाते हैं ,वहां एकदम मृत्यु जैसा सन्नाटा था ,रौशनी होने के बावजूद भी ऐसी शांति थी ,जो दिल को हिला दे ,वो दोनों जैसे -जैसे आगे बढ़े ,हल्का अँधेरा सा भी छाने लगा। उस उबड़ -खाबड़ जमीन पर न जाने कहाँ से अचानक ढेर सारी छिपकलियाँ जमीन पर दिखने लगीं कीर्ति उसने बचते हुए पीछे जाने का प्रयास करने लगी तब पीछे  क्या देखती है ? बहुत सारे साँप ,छोटे -छोटे ,कुछ बड़े उस स्थान पर  रेंग रहे थे। वो जमीन में कैसे पैर रखे ?यही हालत श्याम  की हो रही थी। कभी लगता वो छिपकली उसके पैर के नीचे आ गयीं ,उसकी चीख़ निकल गयी। श्याम !ये हम ,कहाँ फँस गए ?कुछ समझ नहीं आ रहा। अब वो दोनों दौड़ने लगे। उतने ही ज़्यादा छिपकली ,साँप निकल कर बाहर आ रहे थे। उन्हें जमीन में  पैर रखना मुश्किल हो रहा था। उन्हें कुछ दूर एक सूखा सा पेड़ दिखलाई दिया ,तब दोनों ने सोचा उधर ही चलते हैं। उनके पैरों में अज़ीब सी सिहरन सी हो रही थी। अब तो उन्हें ये डर लग रहा था- जैसे ही उन्होंने जमीन में पैर रखा और उनके पैर के नीचे साँप या छिपकली आ जायेंगे। वो तो अच्छा हुआ ,कि दोनों ने जूते पहने हुए थे।जैसे ही दोनों उस पेड़ के समीप  गए ,वहाँ अनेक कंकाल दिखलाई दिए। कीर्ति का गला सूख गया और वो दबी सी आवाज में  चीख़ी।वो तेज स्वर में चीखना चाह रही थी किन्तु आवाज जैसे गले में ही अटक गयी।  जब उसके ऊपर अचानक से एक कंकाल की हड्डी का एक हिस्सा उसके ऊपर आकर गिरा। 

उसने  लगभग वहां से दौड़ लगा दी ,हालत तो श्याम की भी खराब थी किन्तु कीर्ति की हालत देखकर उसे हंसी आ गयी। उसे रोकते हुए बोला -रुको ! रुको !कीर्ति रुकी और उसने अपने पीछे देखा। श्याम ने उसे समझाते हुए बताया ,ये पेड़ के ऊपर जो कंकाल लटका था ,ये हिस्सा उसमें से गिरा है।

 कीर्ति दौड़कर ,और ड़र के कारण ,साँस लेने के लिए रुकी। तब उसने ऊपर की तरफ देखा और श्याम से बोली -ये इतने कंकाल यहाँ कैसे आये ?यहाँ कोई श्मशान भी नहीं दिख रहा। और ये पेड़ पर ,कैसे ? आखिर यहाँ हो क्या रहा है ?

मुझे लगता है ,जैसे मनु ने बताया था-' यहाँ पहले एक गांव था ,उस हिसाब से मुझे लगता है ,यहां के लोग किसी कर्यक्रम के दौरान इकट्ठा हुए होंगे ,तभी ये गांव जमीन में धंस गया होगा। उन्हीं लोगों के ये कंकाल होंगे। मुझे लगता है ,इधर ,अभी तक यहाँ कोई नहीं आया।

तुम्हें क्या लगता है ,क्या नहीं ? ये मैं नहीं जानती ,तुम तो बस यहाँ से निकलने की सोचो !वरना हमारी हालत भी इन्हीं के जैसी हो जाएगी और ये छिपकलियां और सांप हमें अपना भोजन बना लेंगे।   

उन छिपकलियों से बचते हुए वो.... आगे  बढ़ रहा था। तब तक कीर्ति उनसे बचते हुए ,एक ऊँचे से टीले पर चढ़ने का प्रयास करने लगी। उस टीले की मिटटी थोड़ी भूरभूरी सी थी ,जैसे ही कीर्ति उस के ऊपर स्थिर होने का प्रयास ही कर रही थी तभी ,उसके अंदर धंसती चली गयी इससे पहले कि वो दोनों कुछ समझ पाते। कीर्ति उस मिटटी में अंदर तक धंसती चली गयी। 

कीर्ति..... कीर्ति कहते हुए वो उसे लपकने के लिए भागा किन्तु कीर्ति न जाने कहाँ चली गयी ?उधर बड़ी -बड़ी छिपकलियां अब श्याम की ओर बढ़ रही थीं। वो स्थान ऐसा हो गया जैसे यहाँ पर कुछ भी नहीं घटा हो। उस स्थान पर अकेला वही मानव दिखलाई पड़ रहा था।

 कीर्ति उस मिटटी के अंदर तक धंसती हुई चली गयी और वो एक बड़े से कमरे में आकर गिरी।वो अपने आस -पास देख रही थी। उस कमरे में  कुछ लाशें पड़ी थीं। उनकी हालत देखकर उसका दिल हिल गया। उसकी चीख सुनकर, किसी को कुछ पता न चल जाये या फिर....... इनमें से ही कोई लाश न चल पड़े। ऐसा सोचकर उसने अपने हाथों से ही अपना मुँह भींच लिया और एक स्थान पर छुप गयी। 

उधर श्याम ने भी सोचा ,न जाने कीर्ति कहाँ गयी होगी ?या जमीन में धंस गयी होगी ,वो मनु को क्या जबाब देगा ?सोचते हुए ,आगे की तरफ भाग रहा था और वे छिपकलियां भी उसके पीछे आगे बढ़ रही थीं। एक जगह ,जब उसके पैर में सांप लिपट गया ,तब उसे लगा अब वो बचेगा नहीं ,उस सुनसान में उसकी चीख़ गूँज उठी। उसने साहस करके उस सांप की पूँछ पकड़कर बड़ी दूर फेंका और बचने के लिए दौड़ लगा दी किन्तु जाये किधर ? कुछ समझ नहीं आ रहा ,कैसे उस दरवाजे तक पहुँचे ?और उसे खोले। उसने एक कंकड़ दूसरी तरफ फेंका ,वे छिपकलियाँ उधर की और दौड़ी ,श्याम दूसरी तरफ से भागा। भागते हुए ,वो गिरा भी किन्तु मौत के ड़र  से फिर से भाग खड़ा हुआ। इतना समय नही था ,कि वो रूककर अपनी चोट को देख सके। उस दीवार के लगभग करीब ही था कि एक भयानक साँप उसके सामने आ गया। मोत को अपने सामने देख वो बस भगवान से प्रार्थना करने लगा और उसने अपनी बाजुओं से अपना चेहरा छुपा लिया।  


तभी वो दीवार खिसकी ,उसने अपनी आँखों से अपने हाथ हटाये ,वो साँप स्थिर था ,श्याम तेजी से उस दीवार के पार हो गया। उसे आश्चर्य हो रहा था कि इतने बड़े सर्प ने कुछ भी नहीं किया। वो तो उसमें अपना अंतिम समय देख रहा था। किन्तु पता नहीं ,ये कैसी माया थी अचानक दरवाजा खुला और वो दीवार पार कर गया। 

  










 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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