एक रहस्य से निकल ,
दूसरे रहस्य में प्रवेश ,
कर जाते हैं......
जन्म कब ,कहाँ और कैसे हुआ ?
अभी जाना ही नहीं ,
जीवन के रहस्यों को सुलझाते हैं।
कब ग़म -ख़ुशी होगी ?
कौन अपना कौन पराया होगा ?
पहेली सुलझाते -सुलझाते ,
मृत्यु जाल में फंस जाते हैं।
मृत्यु के रहस्यों को .......
जान सका न कोई ,
न ही ,जीवन जी पाते हैं ,
न ही ,मोह में पड़, मर पाते हैं।
इन तीनों के बीच में फंसकर ,
अनजान मुसाफ़िर......
रहस्यों में उलझे रह जाते हैं।
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