Bevafa sanam [part 22]

 मनु और श्याम के सभी दोस्त मंदिर के पीछे ,एक गुप्त रास्ता देखते हैं ,जो नदी तक जाने के लिए छोटा है और गुप्त है ,तभी वो लोग देखते हैं , कुछ लोग एक ''बॉक्स ''लिए जा रहे हैं। रोहित को उन पर कुछ शक होता है। दोस्तों यहाँ अवश्य ही कुछ तो हो रहा है ,कहकर वो छुपता -छुपाता आगे बढ़ता है। 

तुम अकेले कहाँ जा रहे हो ?कीर्ति ने पूछा। 

उनके पीछे !


क्या तुम अकेले ही जाओगे ? मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा तन्मय उसके पीछे चलते हुए बोला। दोनों पेड़ों की आड़ में  छुपते हुए ,आगे बढ़ने लगे। मनु कीर्ति और श्याम के साथ ,उसी मंदिर के द्वार तक आ जाती है और उनसे कहती है तुम लोग मेरी प्रतीक्षा यहीं पर करना। 

तुम कहाँ जा रही हो ?

मुझे कुछ जानकारी लेनी है ,क्या , उस जानकारी में हम शामिल नहीं हो सकते ? 

ऐसी बात नहीं है ,श्याम पहले मुझे पूछना होगा। 

किससे  पूछना होगा ?हम तुम्हारे कहने पर ही तो यहाँ आये किन्तु तुम ही हमसे बातें छुपा रही हो।

अभी मुझे ही सम्पूर्ण जानकारी नहीं ,तब मैं तुम्हें कैसे बता सकती  हूँ ?समय आने पर ,सभी को इसका सच मालूम हो जायेगा। श्याम और कीर्ति पहले तो वहीं खड़े रहे ,मनु उनके सामने ही इस तरह उस द्वार के अंदर  नहीं जाना चाहती थी। तब वो बोली -तुम लोगों को मेरी सुरक्षा  आवश्यकता नहीं ,आस -पास का निरीक्षण कर सकते हो किन्तु ज्यादा दूर मत जाना। 

नहीं ,हम यहीं रहेंगे ,उधर तन्मय और रोहित भी गए हैं ,कहते हुए ,जैसे ही श्याम ने पलटकर  देखा वो उन्हें नहीं दिखी। अरे !ये लड़की कहाँ गयी ?हमारे लिए ये भी रहस्य्मयी सी होती जा रही है। कीर्ति बोली -चलो !आगे देखते हैं। वो दोनों आगे बढ़ने लगे ,श्याम की नजरें मनु को तलाश रही थीं। तभी कीर्ति ने एक विशिष्ट दीवार देखी ,वो बोली -देखो ,श्याम !ये कुछ अलग ही लग रही है ,आओ चलो देखते हैं ,क्या मालूम ?मंदिर की तरह ही यहाँ भी कोई विशिष्ट रास्ता हो। उसने उस पर मनु की तरह ही हाथ फेरा किन्तु कुछ नहीं हुआ। 

कीर्ति की हरकतें देखकर श्याम हँसते हुए बोला -माना कि तुम्हें रहस्मयी चीजों की जानकारी लेने में मजा आता है किन्तु तुम्हें पता है ,उस समय के लोगों का एक विशिष्ट कोड़ होता था। जिसका अंदाजा हर कोई नहीं लगा सकता। कहकर वो हंसने लगा -कीर्ति उसे मारने दौड़ी ,स्वयं तो कुछ करते नहीं ,जब मैं करने चली हूँ तो मेरी हँसी उड़ा रहे हो। 

कीर्ति से बचने के लिए श्याम ,एक खम्बे से टकरा  गया उसके टकराते ही वो दीवार अपने स्थान से हिल गयी। उसके हिलते ही ,एक दरवाजा बन गया कीर्ति और श्याम एक दूसरे को देखने लगे कि क्या करें ?अभी तो दोनों हंस रहे थे ,अब उसकी जगह , उनके मन की घबराहट ने ले ली थी कि कहीं हम फंस न जाएँ। तब दोनों ने एक साथ जाने का निश्चय किया और वे लोग  उस द्वार से बाहर आये ,वे तो जैसे किसी श्मशान में पहुंच गए। चारों तरफ  शांति छाई थी। उस स्थान की वीरानी देखकर ,उन्होंने वापस लौटने का निश्चय किया तब तक वो द्वार बंद हो चुका था  किन्तु यहाँ अभी रौशनी थी। 

उधर मनु फिर से मंदिर के तहखाने में पहुँची ,तब उसके पिछले जन्म के माता -पिता उसकी प्रतीक्षा में थे। तब मनु ने पूछा -मैं ये सब कैसे  मान लूँ ?आपने मुझे जो भी बताया इसमें तनिक भी सच्चाई है। सच्चाई नहीं होती तो ,हम क्या बरसों से तुम्हारे इस ख़जाने की सुरक्षा कर रहे होते ?ये खज़ाना तो आप इससे पहले जन्मों में भी मेरे सुपुर्द कर सकते थे ,इसी जन्म में ही क्यों ?

 इससे पहले जन्म में तुम ,एक छोटी रियासत की राजकुमारी थीं। वो राजकुमारी बहुत बहादुर थी। 

एक मिनट रुकिए ,आपने तो मुझे इससे पहले बताया था कि मैं साहूकार की बेटी बनकर पैदा हुई थी। 

हाँ ,बताया था किन्तु साथ ही ये भी तो बताया था कि उस जन्म में भी तुम्हें वो तांत्रिक नहीं पा सका क्योंकि उस जन्म में तुम्हारा उस  नक्षत्र  में नहीं हुआ ,तब वो तांत्रिक तुम्हारी प्रतीक्षा में फिर से हिमाचल की वादियों में चला गया। उसके  पश्चात तुमने फिर से एक रियासत की राजकुमारी के रूप में जन्म लिया ,जो सुंदर होने के साथ -साथ बहादुर भी थी। ज्योतिषियों ने बताया था कि राजकुमारी एक विशिष्ट नक्षत्र में पैदा हुई है। इसका विवाह सोच -समझकर ही किया जाना चाहिए वरना  इसके जन्म का अर्थ का अनर्थ भी हो सकता है।जब राजकुमारी चौदह  बरस की थी। तब एक सन्यासी राजा के दरबार में आया। राजा ने उसकी बहुत ही आवभगत की ,जब राजकुमारी उसके सामने गयी तब उसे अज़ीब नज़रों से घूरने लगा। उस सन्यासी को राजकुमारी को इस तरह घूरते देखकर ,राजा ने पूछा -भगवन !क्या कोई बात है ?

जी महाराज !राजकुमारी पर तीन -चार बरस बहुत भारी हैं ,इसकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखिये। अट्ठारह बरस से पहले इनका विवाह किसी भी सूरत में नहीं करना। 

जी..... और कोई उपाय हो तो बता दीजियेगा। 


हाँ एक तावीज़ दे देता हूँ ,इससे राजकुमारी बुरी शक्तियों से बची रहेगी। यदि कोई बुरी शक्ति इसे छूती भी है ,तब तुरंत ही अपने असली रूप में आ जाएगी और उसका सर्वनाश हो जायेगा।  राजा को राजकुमारी के लिए सुरक्षा कवच देकर सन्यासी चले गए।   

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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