Bevafa sanam [part 41]

मनु का प्यार ,अपने ग़ैरकानूनी  कार्यों के चलते जेल पहुंच  जाता है ,उसके बचपन का मंगेतर श्याम जिसको उसने सिर्फ अपनी दोस्ती का भरोसा दिलाया। आज मनु को ,अपने मम्मी -पापा द्वारा पता चलता है कि श्याम का कहीं और जगह रिश्ता तय हो गया है। मनु की इच्छा हुई ,कि एक बार श्याम से बात करे किन्तु रुक गयी। क्या कहेगी ? उससे ! उसने तो श्याम  को कभी  अपने प्यार का भरोसा ही नहीं दिलवाया। वो भी कब तक मेरी प्रतीक्षा में रहता ?इस तरह अपने मन को समझा रही थी। जिससे प्यार किया ,वो 'वफ़ा 'न कर सका। सोचते -सोचते स्वतः ही उसकी अंगुलियां फोन में व्यस्त हो गयीं। 

हैलो !


मनु ने 'आव देखा ,न ताव 'और लगी उसे सुनाने ,'तुम तो अपने प्यार के बड़े क़सीदे पढ़ते थे ,सारा प्यार  हो गया ,'उड़नछू ',अब उसे एहसास हुआ ,ये सब इससे क्यों कह रही है ?ऐसी उसने क्या गलती कर दी ?तब बातों को संभालते हुए बोली -मुझे अपने मम्मी -पापा के लिए भी तो सोचना है, मेरे बाद उनका क्या होगा ?

श्याम उसकी बातों को समझ ही नहीं पाया -ये सब तुम क्या और क्यों कह रही हो ?मैं कुछ समझा नहीं। 

तुम तो जैसे बड़े भोले और सीधे हो ,तुम्हें विवाह करने की बड़ी जल्दी मची है ,बचपन के रिश्ते को इतनी जल्दी भुला दिया। मेरा अभी भी उस जंगल से बहुत पुराना नाता है ,वो मुझे फिर से अपने पास बुला ही लेगा। 

कुछ भी न समझने पर भी ,श्याम बोला -तुम शादी के बाद भी अपने मम्मी -पापा का ख़्याल रख सकती हो ,तुम्हें किसने रोका है ?

अब क्या फायदा ?'बेवफ़ा कहीं के 'अपनी बात कहकर मनु ने फोन काट दिया। 

कुछ दिनों पश्चात ,उसकी मम्मी ने कहा -चलो बेटा !तैयार हो जाओ ! आज कहीं शादी में जाना है। 

नहीं ,मैं कहीं नहीं जाऊँगी ,उदास स्वर में मनु बोली। 

मेरी सहेली के बेटे का विवाह है ,हम सभी को बुलाया है ,दो -तीन दिन तो लग ही जायेंगे। मनु ने कुछ नहीं पूछा और अपने कपड़े रख लिए ,मनु को किसी के भी विवाह में जाने का कोई उत्साह नहीं था। गाड़ी की पिछली सीट पर बैठकर ,उसने आँखें बंद कर लीं। उसकी बंद आँखों में श्याम की तस्वीर घूम रही थी। पता नहीं ,क्यों ? जब से उसके विवाह की बात हुई है ,तब से मन अधिक परेशान है। वो एक बार तो मुझसे कहकर देखता ,शायद मैंने देर कर दी। उसने मोहित के कारण..... अब उसे अपनी बेवकूफ़ी पर क्रोध रहा था। निराशा उसकी आँखों से बह निकली। न जाने चलते हुए कितनी देर हो गयी ?मनु  ने अपनी आँखें खोलकर ,बाहर का जायजा लिया। 

हमें यहीं उतरना है ,कहकर पापा बाहर आ गए। 

 मनु और अन्य लोग भी उतरे ,वो  जगह कुछ  जानी -पहचानी सी लगी ,अपने भ्र्म को मिटने के लिए ,मनु ने पूछा -पापा हम कहाँ हैं ?

  बेटा  !हम श्याम के 'फॉर्म हाउस 'में आये हैं। 

क्या ?हम श्याम की शादी आये हैं ,मुझे पहले क्यों नहीं बताया ? मैं आती ही नहीं। 

तुम नहीं ,आतीं तो विवाह कैसे होगा ?

मतलब !!!

मतलब ,बिना दुल्हन के क्या विवाह होता है ? 

यानि..... मैं !

हाँ ,तुम्हारे साथ ही तो ,उसका विवाह होना है। 

ये आपने मुझे पहले क्यों नहीं बताया ?

पहले बताते ,तो तुम्हारे चेहरे पर जो इस वक्त ख़ुशी नजर आ रही है ,उसे हम कैसे देख पाते ?

क्या, ये सब आप लोगों का नाटक था ?


करना ही पड़ा ,तुम तो किसी फैसले पर नहीं पहुंच पा  रही थीं ,तुम दोनों को मिलाने के लिए ये सब करना पड़ा। 

फेरों के समय  ,श्याम मुस्कुराते हुए बोला -हम ''बेवफ़ा नहीं सनम ''सुनकर मनु मुस्कुरा दी। 

विवाह के पश्चात ,मनु उसी गांव में आ गयी ,श्याम ने कहा भी ,कि तुम शहर में भी रह सकती हो किन्तु मनु ने मना कर दिया क्योंकि उसे वहीं रहकर कुछ कार्य जो पूर्ण करने थे। वो खजाना ,मनु की धरोहर था ,उसके पिता का सपना ,उससे  जुड़ा था इसीलिए ,कुछ ही वर्षों में , उस स्थान पर विद्यालय ,अस्पताल ,और  भी नई -नई इमारतें  गयीं। जहां वर्षों पहले गांव के गांव जमीन में समा गए थे ,वहीं आज फिर से नवीन नगरी बन गयी थी।उसके वर्षों पहले या यूँ कहें ,पूर्व जन्म के माता -पिता को भी अपनी ज़िम्मेदारी और उस योनि से मुक्ति मिल गयी।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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