Bevafa sanam [part 40]

मनु से जोश में आकर ,मोहित ने सब कुछ बता दिया। जब 'मास्क मानव ' मिल गया तो बॉस भी मिल जायेगा,कहकर मनु ने बाहर खड़ी  पुलिस को अंदर  बुलवा लिया।

 ये क्या, ये तुम क्या कर रही हो ? मैं तुम्हारा दोस्त हूँ ,यार...... तुम मुझसे प्रेम करती हो ,फिर ये सब क्यों कर रही हो ?पुलिसवालों की तरफ देखते हुए ,आप लोग इस लड़की के कहने पर मुझे लेने आ गए। आपके पास कोई सबूत है ,क्या ?


अब तक तो नहीं था किन्तु अब हो गया है ,अपने  मुँह से खुद तुमने ही गवाही दी है ,जो हमने 'रिकार्ड ' कर ली है और समाचार पत्र में छपा ,तुम्हारा ये फोटो ! 

मनु ,ये तुम अच्छा नहीं कर रही हो ? हमने जीवन में आगे बढ़ने के एक साथ सपने देखे हैं ,तुम मेरे बिना कैसे रह पाओगी ?

जीवन में कई बार आदमी को स्वयं ही पता नहीं चलता कि उसने कुछ गलत फैसले कर लिए और समय पर उन फैसलों को सुधार लेना ही समझदारी है। तुम क्या सोचते हो ?तुम्हारी ऐसी सोच और तुम्हारे कर्मो को देखते हुए ,मैं क्या तुमसे विवाह करूंगी ?ये तो मुझे भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए ,जो उन्होंने मुझे समय रहते चेता दिया। 

अब तुम मुझसे विवाह क्यों करोगी ?तुम्हे तो वो श्याम मिल गया न !तुम उसी के कारण मुझे छोड़ रही हो। 

नहीं ,तुम्हें तुम्हारे कर्मो के कारण छोड़ रही हूँ ,किन्तु तुम श्याम की बराबरी नहीं कर पाओगे ,वो लोगों के लिए सोचता है ,तुम अपने लिए सोचते हो। इंसान के कर्म उनकी सोच ही ,उन्हें अच्छा या बुरा बनाती हैं ,तुमने इतने जन्म लिए किन्तु अपने को नहीं बदला। विवाह तो तब भी हो सकता था किन्तु उस समय भी तुम्हारा स्वार्थ  तुम्हारे साथ था ,आज भी तुम ऐसे ही हो। आप ले जाइये इसे ,अच्छा हुआ विवाह  से पहले ही सब पता चल गया। 

देखो !ये तुम अच्छा नहीं कर रही हो। मैं तुम्हें छोडूंगा नही। 

जब की जब देखी जाएगी कहकर मनु ने इंस्पेक्टर से कहा ,आपको जो भी सबूत चाहिए होंगे ,मैं आपकी सहायता करूंगी। 

तुम किसी की नहीं हो सकतीं ,तुमने मेरे साथ बेवफ़ाई की है उसे मैं ज़िंदगीभर नहीं भूलूंगा ,वो जाते -जाते भी कहता रहा ,तुमने मुझे धोखा दिया। तुम मेरी नहीं हो सकीं तो किसी और की भी नहीं होने दूंगा किन्तु अब मोहित की बातों का कोई भी असर मनु  पर नहीं पड़ रहा था। 

उसके जाने के पश्चात ,मनु को दुःख भी हुआ और उसे धक्का भी लगा जिसके साथ वो जीवन के सुनहरे सपने देख रही थी ,वो इस तरह जेल जायेगा और वो भी उसी के द्वारा ,ये तो उसने सपने में भी नहीं सोचा था। श्याम को इस विषय में कोई जानकारी नहीं थी कि मनु इस समय किन परिस्थितियों से गुजर रही  है ?तब उसने श्याम को फोन किया ? कैसे हो... ?

ठीक हूँ। 

उस केस का क्या हुआ ?

उस केस में ,मोहित का भी हाथ था ,अब वो जेल में है ,कहकर उसने उसे सम्पूर्ण कहानी सुना दी। 

ओह..... तब तो दुःख होना लाज़मी है ,तुम्हारा अच्छा दोस्त था। 

था तो..... किन्तु उसे पहचानने में भूल कर गयी। मुझे इस बात का दुःख नहीं कि वो जेल गया है बल्कि इस बात का दुःख है कि मैं उस जैसे स्वार्थी इंसान को पहचान न सकी। एक बात कहूँ !

कहो...... 

आज कोई अच्छी सी कविता सुना दो !बस और कुछ भी बात करने का मन नहीं कर रहा ,बस तुम्हारे मुँह से प्यारी सी कविता सुनने का मन है। 

लो अभी लो -कहकर श्याम थोड़े अपने चुलबुले व्यवहार में आ गया। 

                                     मेरे दिल का चैन ,सुकूँ हो तुम ,मेरे काव्य की गहराई हो तुम। 

                                      इस जीवन की श्वांस हो तुम ,मेरे सपनों की ताबीर हो तुम। 

                                      मेरी ज़िंदगी की हकीकत हो तुम ,मैं नाव तो पतवार हो तुम। 

                                   मैं माझी, तो किनारा हो तुम ,मैं उगता सूरज तो उजाला हो तुम। 

बस -बस कवि महाशय !सारी कविता क्या मुझ पर ही बना डाली ?किन्तु सुनकर मन को अच्छा लगा। मन थोड़ा हल्का हुआ। बाद में फोन करती हूँ कहकर उसने फोन काट दिया। 

इसके कुछ दिनों पश्चात ,मनु  के मम्मी -पापा आपसे में बातें कर रहे थे ,मनु को देखकर शांत हो गए। क्या हुआ ?

कुछ नहीं ,

कुछ बात तो अवश्य है ,मुझे देखकर ,चुप हो गए। 

रत्नाजी ने अटकते हुए ,मनु से पूछा -तुम और मोहित कब विवाह कर रहे हो ?

मनु ने उनसे पूछा -आप लोग ठीक तो हैं ,क्या आप लोग मेरी, मोहित के साथ शादी के लिए तैयार हो गए। 

अब तो मानना  ही होगा क्योंकि जिसके लिए हम रुके थे ,उसकी तो कहीं और जगह बात चल रही है। 

आप किसकी बातें कर रहीं हैं ?

श्याम की ,और किसकी ?इसीलिए अब मोहित  से तुम्हारे  विवाह के लिए तो मानना ही होगा। 

अब वो सम्भव नहीं है। 

क्यों ?

क्योंकि मोहित अब जेल की सैर करने गया  है ,यह कहकर उसने सारा वाक्या उन्हें सुनाया ,जिसे सुनकर वो हैरत में पड़ गए।उसके पश्चात ,मनु बोली -क्या श्याम !विवाह के लिए तैयार हो गया ? उसका रिश्ता तो बचपन से ही मुझसे तय है। अब क्या, वो लोग अपनी जुबान से मुकर गए ?

कब तक  ,वो इसी इंतजार में रहेंगे ?तुम तो जबाब दे नहीं रहीं इसीलिए हमने सोचा तुम और मोहित भी .....  किन्तु अब तो वो भी जेल में है। जेल से आ गया तो विवाह करोगी। 


मम्मी !आप ये क्या कह रही हैं ?क्या मैं उस अपराधी से विवाह करूंगी ?ये आपने सोच भी  कैसे लिया ?कहकर वो बाहर आ गयी। पता नहीं क्यों ?मन में अज़ीब सी बेचैनी हो रही है। क्या उससे एक बार फोन करके पूछूँ ,उसने तो एक बार भी उस दिन फोन पर, इस बात का जिक्र ही नहीं किया। कितना बड़ा अभिनेता है ? कम से कम एक बार फोन करके उसे बधाई तो  दे ही  दूँ। नहीं ,मैं भी उसे फोन करके नहीं बताऊँगी कि मुझे उसके विवाह की बात पता चल गयी है। उसे भी  तो अपने दादाजी की इच्छा पूर्ण करनी होगी। जब वो मुझसे इतनी बड़ी बात छुपा सकता है तो मुझे ही क्या जरूरत आन पड़ी है ?


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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