आज का अख़बार एक बड़ी खबर लेकर आया ,अख़बार में एक बाद बड़ा सा शीर्षक लिखा था -''जंगल का रहस्य हुआ,'' उजागर ''उसके अंदर लिखा था -वहाँ कोई न जादू है ,न ही भूत -प्रेत की बाधा ,न ही वहां कोई जंगली जानवर है, फिर लोग जंगल में जाकर कहाँ गायब हो जाते थे ? जी.... गायब नहीं होते थे वरन किये जाते थे। इंसान ही इंसान का दुश्मन बना बैठा है ,कुछ लोग इंसान होते हुए भी ,अपनी हैवानियत के कारण जानवरों को भी पीछे छोड़ चुके हैं। इंसानों का रक्त बिकता था ,अब उसके अंगों को भी व्यापार बना दिया है। बेचारे ग़रीब मेहनत कर ,उस स्थान को बना रहे हैं किन्तु वे नहीं जानते कि उन्होंने तो जैसे चंद पैसों के लिए अपनी ज़िंदगी का ही सौदा कर लिया। वो जंगल उन्हें उनके अंगों सहित निगल जाता है। मरणोपरांत उनके अंगों का सौदा किया जाता है। कुछ तस्वीरों के साथ ,ये खबर छपी थी। इसका पता कॉलिज के कुछ लड़के -लड़कियों ने लगाया किन्तु उनका नाम नहीं बताया गया था। क्योंकि उनकी जान को अभी भी खतरा हो सकता है।अभी ,इस खबर की जानकारी के लिए ,तहक़ीकात जारी है ,ताकि और ठोस सबूत मिल सकें। इस खबर की सत्यता को परखा जा सके। ये खबर जंगल में आग की तरह फैल गयी। अब तो पुलिस को हरकत में आना ही पड़ा।
मनु और उसके साथियों ने जब अपनी आँखें खोलीं ,सभी जंगल से बाहर गांववाली सड़क पर अपनी गाड़ी के पास खड़े थे। सुबह के लगभग चार या पांच बजे का समय होगा। गांव के लोग तो सुबह सवेरे ही उठ जाते हैं ,किसान अपने खेतों की तरफ जा रहे थे। हल्की उजास सी होने लगी थी ,सभी एकदूसरे को हैरत से देख रहे थे। उन्हें लग रहा था ,जैसे -नींद से जगे हों। क्या ,ये एक सपना था ?सभी हैरान थे ,लग रहा था जैसे नींद में ही ,सपने में ये सभी कुछ घटित हुआ है। कैसे अचानक उस जंगल से बाहर आ गए ?सब हैरान कर देने लायक था।
श्याम बोला -मेरा तो घर ही यहीं है ,अब मैं चलता हूँ ,तुम लोगों को यदि मेरे साथ चलना हो तो चलो !
नहीं ,अब हम भी अपने घर जायेंगे ,हमारे घरवाले भी तो हमारी प्रतीक्षा कर रहे होंगे कहकर सभी गाड़ी में बैठे और अपने -अपने घर आ गए। आराम करके खाना खाकर तब वो आपस में मिले ,और उस जंगल की तहक़ीक़ात करने के लिए ,पुलिस की मदद चाही किन्तु उन लोगों ने किसी भी तरह की सहायता के लिए मना कर दिया क्योकि वो जानते थे, कि वहां गलत कार्य होते हैं किन्तु उनके पास हर माह अच्छी -ख़ासी रक़म पहुंच जाती है। तब रोहित ने अपने दोस्त से मिलकर यह खबर समाचार -पत्र में छपवा दी। जिसका परिणाम ,पुलिस को हरकत में आना पड़ा।
उस स्थान पर बहुत से कंकाल ,खून की बोतलें ,और आदमी भी मिले जिनका ऑपरेशन होना अभी बाक़ी था ,जो गरीबी के कारण यहाँ काम करने के बहाने लाये गए और अब पैसों के लिए अपने अंग बेचने के लिए विवश थे। आज मनु प्रसन्न थी ,वो भी उस खबर को देखकर खुश हो रही थी ,तभी उसकी नजर उन तस्वीरों पर पड़ी। जिसमें एक व्यक्ति मोटरबोट में बैठा दिखलाई पड़ रहा था।
शाम को अचानक ,मनु मोहित के पास पहुंच गयी। उससे मिलकर बोली -तुम मुझे तो जैसे भूल ही गए ,पैसा कमाने में लगे रहते हो। मुझे भी तो पता चले ,इतने दिनों में तुमने कितना पैसा कमा लिया ?
तुम और तुम्हारे दोस्त ,तुम उन्ही के साथ खुश हो ,प्यार तो मेरे साथ किया है किन्तु घूमती उनके साथ हो। देखो !मैंने इस कोठी की बात पक्की की है , कहकर उसने उसे एक कोठी का चित्र दिखाया।
उसे देखकर ,मनु बोली -ये तो बहुत बड़ी है ,मैं तो इसमें झाड़ू -पोंछा लगाते -लगाते ही थक जाउंगी ,कहकर हंसी।
उसकी हंसी से मोहित चिढ गया,मैं ये सब तुम्हारे लिए ही तो कर रहा हूँ।
मेरे लिए !क्या मैंने तुमसे कहा -मुझे बड़ा मकान ,कोठी चाहिए।
नहीं कहा ,तो.... तुम्हारे लिए तो ये सब करना ही होगा।
कितने की होगी ?
उसने रौब मारते हुए कहा -पांच करोड़ की।
इतनी महंगी ,इतना पैसा कहाँ से आएगा ?मनु ने आश्चर्य से बोली।
मैं कमा रहा हूँ ,तुम भी कमाओगी ,कुछ भी करेंगे पैसे तो कमाने ही होंगे।
चाहे किसी का खून ही क्यों न बेचना पड़े? या फिर किसी ग़रीब के अंग बेच देंगे क्योंकि हम दोनों तो डॉक्टर हैं ,इंसान के लिए भगवान ! फिर चाहे हम उसके विश्वास का कैसे भी लाभ उठा सकते हैं ?हैं न...... कहकर उसकी आँखों में झाँका।हमने तो डॉक्टरी की पढ़ाई इसीलिए तो की है ,है न....
तुम , ये क्या कह रही हो ? कुछ भी बोलती हो।
देखिये , डॉक्टर साहब ! आपके क़रीब आकर मेरी अंगुली जलने लगी ,जलन हो रही है। देखिये न... ''मास्क मानव ''
ये क्या कह रही हो ?क्यों ? हिंदी में ही तो बोल रही हूँ। क्या तुमने आज का अख़बार नहीं देखा ? कहकर उसने उस समाचार पत्र का वो हिस्सा उसके आगे कर दिया। उस 'समाचार पत्र ' को देखकर वो बुरी तरह चौक गया।
ये सब मुझे क्यों दिखा रही हो ?उसने बौखलाकर पूछा।
मैं इस 'मोटरबोट 'के आदमी को देख रही हूँ ,पता नहीं क्यों ? मुझे जाना -पहचाना सा लग रहा है। मुझे तो लगता है -वो 'मास्क मानव 'और ये बोट वाला आदमी एक ही लग रहे हैं। जो मुझ पर अपनी पिस्तौल ताने था। वो तो मुझे मार देना चाहता था।
नहीं ये झूठ है ,वो मारना नहीं चाहता था ,बस डरा रहा था ताकि तुम्हारे दोस्त वहां से भाग जाएँ।
तुम्हे कैसे मालूम ?तुम तो वहाँ थे ही नहीं ,फिर तुम्हें कैसे पता चला ?कि वो 'मास्क मानव 'क्या सोच रहा था ?और क्या करना चाहता था ?
मोहित झेंप सा गया जैसे उसकी गलती पकड़ी गयी हो।
मैंने अंदाजा लगाया।
तुम क्या कोई लेखक या कहानीकार हो जो कुछ भी कहानी बना दे। किन्तु एक कहानी मैं तुम्हें बताती हूँ -एक लड़का या आदमी जिसे बरसों से किसी चीज की तलाश थी किन्तु वो चीज उसे नहीं मिली ,उसने उसका बहुत पीछा किया यहाँ तक कि उसे अगला जन्म भी लेना पड़ गया। अपने अगले जन्म में भी वो स्वार्थी ,लालची और अपना ही सोचने वाला था। इसके लिए वो लोगों की ज़िंदगी के सौदे करने लगा और वो किसी भी हद तक जा सकता था क्योंकि वो जानता था ,उसकी तलाश उस जंगल में ही पूर्ण होगी जहाँ कभी पहले एक राजा का राज्य था किन्तु वो ये नहीं जानता ,उसी जंगल से उसकी तलाश आरम्भ हुई ,वहीं से समाप्त भी हो सकती है।
नहीं वो समाप्त नहीं होगी ,अबकि बार पूर्ण होगी। कहते हुए, मोहित के तेवर बदल गए ,जब तुम सब समझ ही गयी हो ,तो ये भी समझ लो ,अबकि बार मैं अपनी सभी हसरतें पूर्ण करूंगा। जिन्हे कोई बदल नहीं सकता। मुझे तो कुछ भी स्मरण नहीं था किन्तु जब तुम मुझे उस गांव में ले गयीं तब मैं बहुत परेशान हुआ। मुझे सपने भी उसी जंगल के आते। तब धीरे -धीरे मुझे सब स्मरण होने लगा ,अनजाने ही सही ,मेरी बरसों की तलाश पूर्ण होने जा रही थी।मुझे कुछ करना ही नहीं था किन्तु तुम्हारा उस जंगल के प्रति आकर्षण और श्याम का तुम्हारी ज़िंदगी में आना ,मेरे लिए मुसीबत बन गया। रही बात ,'मास्क मानव 'की ,वो तो मैं था किन्तु मैं बॉस नहीं ,मैं तो भेजा गया था।

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