Bevafa sanam [part 38]

 मनु और उसके साथी  'मास्क मानव 'की कैद से निकलकर फिर से मंदिर में आ जाते हैं। मनु को  इतना अंदाजा तो हो ही जाता है ,वो 'मास्क मानव ''और कोई नहीं ,उसके पिछले जन्म का दुश्मन वही तांत्रिक है। और वो भी इसी जगह ,इन्ही जंगलों में ,मुझे उसे ढूंढने की आवश्यकता नहीं पड़ी। उसने भी सोचा होगा -कि ये स्थान मुझे खींचकर यहीं लाएगा। बस अब उसे पहचानना है। सभी मंदिर के आगे खड़े हो जाते हैं ,तब मनु अपनी प्रक्रिया चालू करती है ,और उस दरवाज़े को खोलती है।



 

ये तंत्र -मंत्र ,जादू -टोना तुमने किससे  सीखा ? तन्मय हँसते हुए बोला ,मैंने भी एक दो बार प्रयत्न किया था इसे खोलने का, किन्तु मुझसे तो नहीं खुला।

ये ताकत  से नहीं दिमाग से खुलता है ,जो कि तुम्हारे पास नहीं है मनु हँसते हुए बोली।  

हाँ यार !ये तो है ,ये लड़की भी न रहस्य्मयी होती जा रही है ,ये ही ,हमें इधर खींचकर लाई। 

मंदिर के अंदर आते हुए ,मनु बोली - इससे  मेरा  पिछले जन्मों का रिश्ता जुड़ा है ,यदि मैंने बिना सबूत तुम लोगों को अपनी कहानी सुनाई तो, तुम लोग विश्वास नहीं करोगे इसीलिए मैं तुम्हें पहले अपने भोले बाबा से मिलवाने लाई हूँ। उसके पश्चात तुम्हे मेरी बातों पर भी विश्वास होगा। अभी वो द्वार खुला था ,तभी उसके अंदर दो आदमी आने का प्रयत्न करने लगे वो द्वार फिर से बंद हो  गया। 

ये कौन लोग हो सकते हैं ?

ये वही लोग हो सकते है ,जो उस आदमी ने हमारे पीछे भेजे होंगे ,उन्हें इस बात का भी तो डर होगा कहीं हम बाहर जाकर ,इस जंगल का सारा काला चिटठा न खोल दें इसीलिए भी तो सतर्क हो रहा होगा।

मुझे तो लगता है ,जब हम यहाँ से बाहर निकलेंगे ,हमें मारने या पकड़ने का फिर से प्रयास कर सकता है। इस बात का हमें भी दुःख रहेगा कि हम उसे पकड़ न सके। 

ये भी तो जरूरी नहीं कि वो एक ही हो ,हो सकता है ,उसके साथ बहुत से लोग भी मिले हुए हों। 

अभी वो लोग बातें कर ही हे थे ,अचानक उस अँधेरे कमरे में अचानक प्रकाश फैल गया ,सभी आश्चर्यचकित हो इस -दूसरे को देखने लगे। फिर चारों ओर देखा कि ये प्रकाश किधर से आ रहा है ?भोले बाबा की पिंडी देखकर सभी मंत्र मुग्ध हो गए ,सभी ने उन्हें प्रणाम किया। 

तब चारु बोली -देखा ,मेरे कार्ड्स गलत नहीं बताते कि कोई अलौकिक शक्ति है जो हमारी सहायता कर रही है ,इस जंगल में इन्हीं की शक्ति ने हमें बचाया होगा ,तभी वो सर्प हमारी सहायता के लिए पहुंच गए होंगे। धन्य हैं ,प्रभु आप !

ये ,मेरे साथ तो कई वर्षों से हैं ,मनु बोली। 

अभी तुम लोगों को एक और चीज दिखलाती हूँ ,कहते हुए ,नीचे जाती सीढ़ियों से उतरती है ,सभी उसके पीछे  चलते हैं। 

कुछ समझ नहीं आ रहा ,तुम तो यहाँ पहली बार ही आई हो फिर यहाँ के विषय में इतना कुछ कैसे जानती हो ?

 अभी बतलाया न.....  इनके संग मेरा बरसों का नाता है ,यानि पिछले कई जन्मों से। 

मज़ाक करने के लिए ,क्या हम ही मिले हैं ?कीर्ति बोली। 

इसीलिए तो तुम लोगों को यहाँ लेकर आई हूँ ,ताकि जो भी बातें मैं तुम्हें बताऊं ,तुम्हे झूठ या भ्रम  न लगे। आ जाइये !उसके इतना कहते ही ,एक स्त्री और पुरुष वहाँ प्रकट हो गए ,इनसे मिलिए ये मेरे मता -पिता हैं। 

सबने उसे आश्चर्य से देखा, कि ये क्या कह रही है ??

पिछले चार जन्मों पहले ,यानि जो इस जगह की राजकुमारी थी ,उसके माता -पिता या राजा -रानी कह सकते हो। जो कहानी इस जंगल के विषय में फैली है ,वो सही है , उस तांत्रिक ने ही इनके राज्य को अपने श्राप से भूमिगत कर दिया था किन्तु ये लोग आज भी मेरी प्रतीक्षा में हैं ,जब मैं पुनः इनके समीप आऊं और मेरी धरोहर मुझे सौंप सकें। 

धरोहर ! केेसी धरोहर ? कहीं  कोई खजाना तो नहीं ,चारु ने उत्सुकता से पूछा। 

खज़ाना ,उसके दोस्तों की नजरों से ओझलकर दिया गया था क्योंकि इतनी सम्पत्ति देख कोई भी ,अपना आपा  खो सकता है ,नहीं ,मेरा जन्म और पूर्वजन्म उसकी जानकारी होना किसी खजाने से कम नहीं। मुझे मेरे चार जन्मो के पश्चात ये मुझे देख रहे हैं। इनके आधार पर ,तो मैं इस जंगल यानि इनके पूर्व राज्य की राजकुमारी हूँ जो आज जंगल में बदल गया इसीलिए जबसे मैंने इसे देखा था तभी से ये मुझे अपनी ओर खींच रहा था। 

ये सब क्या है ?तुम यहाँ हमें कहाँ से ले आई ?ये कोई राजा -रानी नहीं ,हमें मुर्ख बनाने यहाँ लेकर आई हो कहते हुए कीर्ति उन लोगों की तरफ बढ़ी ,जैसे ही नजदीक पहुंची ,वे एकाएक सर्प में बदल गए। वो चीखकर पीछे हटी। 


यही इनका असली रूप है ,इंसानी रूप में तो इतने वर्षों तक नहीं रह सकते थे किन्तु मेरे कारण ही इन्होंने इंसानी रूप लिया। अब तुमने भी, इनके दोनों रूप देख ही लिए , इन्होने ही जब कीर्ति को उस अनजान स्थान पर गिरी थी बचाया था। श्याम को भी इन्होंने बचाया ,मुझे इसके समीप पहुंचाया ताकि मैं इसकी सहायता कर सकूँ और अब तुम सबने देख ही लिया ,उस जगह इनका कमाल !ये पग -पग पर हमारी सहायता कर रहे थे वरना तुम्हें क्या लगता है ? हम वहाँ से सही -सलामत बाहर आ सकते थे। 

सभी मनु की बातें ध्यान से सुन रहे थे ,तभी तन्मय बोला -किन्तु अब हम सही -सलामत इस जंगल से बाहर नहीं जा पायेंगे क्योकि उसके आदमी बाहर ही हमारी ताक में बैठे होंगे। 

तुम सभी ,अपने -अपने नेत्र बंद करिये और भोले नाथ का स्मरण करिये। 

इससे क्या होगा ?

ओफ्फो.... बंद करो !तो सही ,सभी ने अपने नेत्र बंद किये और भोले बाबा का स्मरण किया।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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