Bevafa sanam [part 37 ]

मनु के सभी दोस्तों को ,उस  ''मास्क मानव ''के आदमियों ने बंदी लिया ,मनु और चारु  को पकड़ने के लिए ,पास आ रहे थे ,तब दोनों  ने मिलकर उसे धक्का दे दिया।इस  घटना से मनु को इतना तो पता चल गया ,कि वो 'मास्क मानव 'और  कोई नहीं, उसके पिछले जन्मों का उसका दुश्मन 'तांत्रिक 'ही है। जो अब मनु के आक्रमण से भाग गया। वो यहीं रहकर सभी ग़ैरकानूनी कार्य करता है किन्तु उस मास्क के पीछे का चेहरा वो नहीं देख पाई ,इस बात का उसे दुःख था ,कैसे उसकी पहचान होगी ?



मनु और चारु तो किसी बंधन में नहीं थीं ,वो ये भी जानती थी, कि वो इतने लोगों का सामना नहीं कर  पायेगी, वो ये  भी जानती थी ,कि अधिक देर तक वो भी संभाल नहीं पायेगी , किन्तु उसने हिम्मत नहीं हारी और वो नीचे आई क्योंकि यदि वो  नीचे नहीं आती तो उनमें से कई लोग ऊपर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे। वो खिड़की के रास्ते ऊपर आ रहे थे ,इससे पहले कि वो करीब आते ,मनु ही नीचे आ गयी। उसने चारु को पहले ही तैयार कर था कि वो अपने दोस्तों के बंधन खोलेगी  और मनु उनका ध्यान भटकाकर रखेगी। 

मनु नीचे उतरते ही ,कूदकर सीढ़ियों के पास खड़े व्यक्ति पर कूदकर पड़ी। चारु तेजी से ,अपने दोस्तों की तरफ बढ़ी और उनकी रस्सी खोलने का प्रयत्न करने लगी ,अभी उसने एक गांठ ही खोली थी ,तभी एक व्यक्ति ने आकर उसे पकड़ लिया। तन्मय ने अपनी रस्सी को कई बार खिंचा वो कुछ ढीली हुई। तब मनु ने उसकी रस्सी की एक गांठ और खोल दी ,जिससे वो ढीली हो गयी और तन्मय उन बंधनों से छूट गया। तन्मय अन्य दोस्तों की सहायता भी करने लगा। इस तरह सभी के बंधन खुल गए ,किन्तु लड़ाई अभी भी हो रही थी। मनु के दोस्त छह और वे लोग ज्यादा थे ,इससे पहले की उनकी हिम्मत जबाब देती ,तभी न जाने कहाँ से बहुत सारे काले छोटे -बड़े सर्प वहाँ आ गए और उस 'मास्क मानव ' के आदमियों पर टूट पड़े। ये देखकर तन्मय ,रोहित ,चारु इत्यादि दोस्तों को आश्चर्य हुआ कि वो सर्प उन्हें कुछ नहीं कह रहे थे। तब मनु बोली -सभी बाहर निकलो ,बाकि ये संभाल लेंगे। 

बाहर गाड़ी खड़ी ही थी ,श्याम ने 'स्टेयरिंग 'संभाला और गाड़ी दौडा दी। 

अब हम कहाँ जा रहे हैं ? मनु ने पूछा।

यहाँ के रास्ते हमें मालूम नहीं हैं ,इसीलिए हम वापस उसी रास्ते जाकर उसी दीवार से निकल जायेंगे।

इतनी  रात गए ,हम कहाँ -कहाँ धक्के खाएंगे ?जब हमें कोई रास्ते की जानकारी नहीं है ,तब कैसे जायेंगे ?

चारु बोली -मैंने अपने 'कार्ड्स 'से देखा है ,कोई अद्भुत शक्ति हमारी सहायता करेगी या कर रही  है तभी तो उसने इतने सर्प हमारी सहायता के लिए  भेज दिए ,जरा सोचो !उन्होंने हमें कुछ नहीं कहा। 

हाँ ,ये तो है ,मनु को उस चांदनी रात में एक परछाई  दिख रही थी ,वो उन्हें अपने साथ चलने के लिए इशारा कर  रही थी ,एकाएक मनु बोली -सीधे चलो !

ये तुम क्या कह रही हो ?हम भटक जायेंगे। 

नहीं भटकेंगे ,बस जैसा मैं कहूँ ,चलते चले जाओ !

जी मैडम !आपने किसी की आज तक सुनी है ,जो अब सुनोगी। कहकर वो गाड़ी मनु के कहे अनुसार चलाने लगा। गाड़ी चलाते हुए ही बोला -एक बात की कमी रह गयी  , वो 'मास्क मानव 'हमारे हाथ से निकल गया वो हाथ लग जाता तो जंगल का रहस्य ही समाप्त हो जाता। 

मनु ने ठंडी साँस भरते हुए कहा -जायेगा कहाँ ?अब तो पकड़ा ही जायेगा। 

क्या मतलब ?क्या तुम फिर से उसी स्थान पर जाने वाली हो ?

नहीं ,मैं तो चाहूंगी भी नहीं कि वो अब पुनः मेरे सामने या मेरे जीवन में आये। 

अच्छा जी ,अब हमें ये तो बता दो, ये रास्ता किधर जाता है ?

मंदिर की ओर !


मनु की बात सुनते ही श्याम ने ब्रेक लगाए ,अब फिर से मंदिर !

हाँ ,मुझे वहाँ एक काम है ,वो पूर्ण करके हम इस जंगल से बाहर निकल जायेंगे। 

इस जंगल का क्या कोई रहस्य है ?ये तो हम जान ही नहीं पाए ,चारु ने कहा। 

अब अख़बार में ही पढ़ लेना ,कहकर सभी हंस दिये।

अब सभी गाड़ी से ,शीघ्र ही मंदिर में पहुंच गए ,तब मनु ने उनसे कहा -आज मैं तुम लोगों को इस जंगल के मेरे आकर्षण से मिलवाती हूँ ,कहकर वो मंदिर की तरफ आगे बढ़ चली।

क्या अभी भी कोई राज है ?चारु आश्चर्य से बोली। तभी उसे स्मरण हुआ कि मनु उसी के सामने ही तो उस मंदिर के अंदर गयी थी। एकाएक बोली -मैंने तो तुम्हें उस दरवाजे को खोलते हुए देखा था। ऐसा क्या था ?वहाँ !

आज वही तो तुम सबको दिखाने ले जा रही हूँ।   

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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