Bevafa sanam [part 36]

मनु और उसके अन्य दोस्त ,चारु को बचाने के लिए ,उस स्थान पर जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। जब उन्हें उस वाहन चालक से पता चलता है कि उन्हें ही नहीं ,उनकी दोस्त चारु भी उन्हें वहीं मिलेगी। वे सभी चारु को अपने सामने सही -सलामत देखकर प्रसन्न  हो जाते हैं। किन्तु चारु से मिलने का मौका नहीं मिल पाता। जहाँ पर उन्हें लाया गया। वहां धीमा -धीमा संगीत भी बज रहा था। वो लोग अब प्रसन्न थे ,कि सभी मित्र एक साथ हैं। तभी उन्हें झटका लगता है जब वो चारु को किसी मास्क वाले व्यक्ति के साथ खड़ा पाते हैं। 


कुछ समझ नहीं आया कि ये व्यक्ति कौन है ?  मनु अपने दोस्तों से बोली। 

हम भी तो वही सोच रहे हैं ,कि  ये 'मास्क मानव 'कौन है ?

वाह !क्या नाम दिया है ?'मास्क मानव '!

यहाँ मैं नामकरण करने नहीं बैठी ,मैं ये सोच रही हूँ ,चारु तो हमारे साथ पहली बार आई है ,ये इसे कैसे जानती है ?और हमारे साथ अजनबियों जैसा  व्यवहार, कैसे कर सकती है ?

क्यों नहीं कर सकती ?जब तुम हमें बिना बताये उस मंदिर के अंदर जा सकती हो। तब ये भी कुछ भी कर सकती है ,जबकि ये तो भविष्य भी देख लेती है ,कहकर तन्मय हँसता है। 

हाँ यार..... ये तो है ,तुम लड़कियां ही हमारे लिए पहेली बनती जा रही हो। कीर्ति तुम भी बता दो ,तुम भी तो हमें  अपना कोई नया  हुनर दिखाने वाली तो नहीं हो ,श्याम ने पूछा।

ये वहां क्यों है ?हमसे  मिलने  क्यों नहीं आई ?उसकी ड्रेस देखी ,ऐसे कपड़े तो वो पहनती ही नहीं। 

तभी उस इंसान की आवाज आई ,हैलो !एवरी वन ! ये  मेरी पार्टनर हैं ,

तभी भीड़ में से किसी ने कहा -कैसी पार्टनर ?लाइफ या बिजनेस पार्टनर।

यही सब , चारु के  दोस्त भी सोच रहे थे।  

वक्त आने पर सब पता चल जायेगा। अभी पहले यहाँ जो वो तीन लड़के दिखलाई दे रहे हैं ,उन्हें बाहर करिये ,इनको किसने यहाँ आने दिया ?

तभी दो बड़े तगड़े से आदमी बाहर से आते हैं और उन तीनो लड़कों को बाहर चलने के लिए कहते हैं ,किन्तु उनके इंकार करने पर वो उनसे जबरदस्ती करते हैं। 

ये क्या जबरदस्ती है ?हम आये नहीं , हमें लाया गया है रोहित बोला। 

कौन लाया ?

तुम लोगों का ड्राइवर ही लाया। 

उस मास्क वाले आदमी ने ,कहा -हमने तो इन लड़कियों को ही बुलवाया था। 

क्यों बुलवाया था ?ये हमारी ज़िम्मेदारी हैं ,हम इन्हीं के साथ हैं और इन्हें अकेले छोड़कर कहीं नहीं जायेंगे क्रोध में आकर श्याम बोला। 

तब उसने हाथों के इशारे से ,उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने के लिए अपने आदमियों से कहा। वे लोग उन्हें खींचने लगे किन्तु तन्मय ,श्याम और रोहित भी टस से मस नहीं हो रहे थे। 

मनु जोर से बोली -चारु तुम वहाँ क्यों खड़ी हो ?तुम इधर आकर हमारा साथ दो किन्तु चारु ने कोई जबाब नहीं दिया खड़ी मुस्कुराती रही। 

इसे क्या हो गया है ?कीर्ति बुदबुदाई।

उस पहलवान से दिखने वाले एक आदमी के, कुर्सी पर चढ़कर रोहित ने एक  किक मारी वो थोड़ा पीछे गिरते -गिरते बचा  ,उसने  थोड़ा संभलकर ,अपने पास ही खड़े तन्मय को गर्दन से पकड़ लिया। तन्मय थोड़ा आगे को झुका और उसे पलटकर ,वहीं रखी एक मेज पर पटक दिया। मेज उसके वजन से टूट गयी। तब तक दूसरे ने लड़की समझकर, कीर्ति को पकड़ा किन्तु उसे  पता नहीं था कीर्ति 'ब्लैक बैल्ट 'है कीर्ति ने उसे अपनी टाँग को उसकी टाँग में उलझाकर गिरा दिया। उन दोनों को इस तरह गिरते देखकर उस 'मास्क मानव 'ने वहां खड़े अन्य लोगों को डपटते हुए कहा - खड़े -खड़े क्या तमाशा देख रहे हो ?पकड़ो इन्हें !

उसका आदेश मिलते ही सभी ,उनके ऊपर टूटकर गिरे किन्तु  मनु ने मन ही मन सोचा -ये लड़ाई मेरी है ,जो इसी जंगल से जुडी है ,न जाने अब ये क्या मुसीबत है ? इसे मुझे ही समाप्त करना  होगा वो तेजी से ,ऊपर की ओर बढ़ती है ताकि अपनी सहेली के पास पहुंचकर ,उसे उसके चंगुल से छुड़ा सके। तब तक उन बीस -पच्चीस आदमियों ने ,उसके दोस्तों को पकड़कर रस्सी से बांध दिया। 

वो 'मास्क मानव 'चारु के साथ खड़ा ,उस लड़ाई का मज़ा ले रहा था। तभी पीछे से आ सबसे पहले मनु ने उसकी पिस्तौल निकाल ली और उसकी कनपटी पर रखकर ,बोली -रोको !ये लड़ाई वरना तुम मेरे हाथों से मारे जाओगे। 

चारु ने झपटकर मनु से वो पिस्तौल लेनी चाही किन्तु मनु सतर्क थी ,तब वो चारु से बोली -ये तुम क्या कर  रही हो ? मैं तुम्हारी दोस्त मनु हूँ।तब उस 'मास्क मानव 'से बोली -मैं जानती हूँ ,यहाँ तुम ग़ैरकानूनी काम करते हो और तुमने अपना बड़ा गैंग बनाया हुआ है। तुम्हारा हमें यहाँ बुलाने का क्या उद्देश्य है ?तभी मनु की अंगुली में जलन सी होने लगी पहले तो उसने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया किन्तु धीरे -धीरे वो जलन बढ़ने लगी। तभी उस व्यक्ति ने मौका देख चारु को धक्का दिया ,मनु इसके लिए तैयार नहीं थी ,वो अपनी दोस्त को पकड़ने के लिए आगे बढ़ी , तब तक वो भाग खड़ा हुआ। तब भी मनु ने एक फायर तो किया किन्तु वो बच निकला। मनु चारु को उठाकर बोली -तुम्हें कहीं  चोट तो नहीं लगी ? इस तरह उसे उठाने में मनु के हाथ की अंगुठी चारु को छू गयी और उसके ऊपर से सम्मोहन का असर समाप्त हो गया। 

चारु मनु को देखकर चौंकी ,तुम यहाँ कैसे ?उसके पश्चात अपने वस्त्र देखकर बोली -ये मैनें कैसे कपड़े पहने हैं ?और मैं यहाँ कैसे आई ? मनु समझ गयी ,ये तो इतनी स्मार्ट लड़की है ,इसको धोखे से सम्मोहित किया गया होगा। मनु ने पूछा -तुम ठीक हो। 

हाँ ,मुझे क्या हुआ है ? किन्तु हम लोग यहां कैसे आये ?और हमारे दोस्त !उन्हें क्या हुआ है ?वो इस तरह क्यों बंधे हैं ? तभी मनु का ध्यान अपनी अंगुली की जलन पर गया ,जो अब नहीं हो रही थी ,इसका अर्थ है ,ये वो ही आदमी है ,जिसने मेरे लिए दुबारा जन्म लिया है और चार सौ -पांच सौ वर्ष पश्चात यहीं आ गया। तहखाने में पिछले जन्म के उसके माता -पिता ने सत्य ही कहा था ,जब वो तेरे क़रीब आयेगा तब इस अंगूठी से तेरे हथों में जलन होने लगेगी। 

तू क्या सोच रही है ?चारु ने उससे पूछा। 


कुछ भी तो नहीं ,और उसने उस अंगूठी को अपने दूसरे हाथ से रगड़ा। वो वहीं से खड़े होकर बोली -तुम्हारा बॉस भाग गया ,अब मेरे दोस्तों को छोड़ दो। 

नहीं ,हमारे बॉस भागते नहीं ,वो तो यहीं रहते हैं किसी सुरक्षित स्थान पर गए होंगे ,कहते हुए एक आदमी ने ऊपर की तरफ चढ़ने का प्रयास किया किन्तु मनु और चारु दोनों ने ही उसे धकेल दिया।   

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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