सभी दोस्त उसी कैद थे ,जिसमें कुछ देर पहले कीर्ति थी। कुछ समझ नहीं आ रहा, कि क्या किया जाये ?सभी एक दूसरे को दोष दे रहे थे। सबसे ज्यादा खतरा उन्हें अपने साथ उन दो लड़कियों के लिए था। अभी तक चारु का भी कुछ पता नहीं था। अब ये क्या नई मुसीबत आ गयी ?सबके सामने एक ही प्रश्न था ,किस तरह बाहर निकलें ? अब तो अँधेरा भी बढ़ गया था ,रात्रि में कुछ नहीं हो सकता था। उनके बैग में खाने का सामान भी बहुत कम रह गया था। सोचा ,इस खाने को बचाकर रख लेते हैं ,जब तक अपने को संभाल सकते हैं ,खाना बचाकर रखेंगे।
कुछ देर तक तो ,वो लोग इसी तरह तिगड़में लगाते रहे कि किस तरह बाहर निकलें ?तभी रोहित ने सुझाव दिया क्यों न ,इस खिड़की के सरिया निकालकर यहीं से कूदा जाये।
बेवकूफ हो क्या ?देखा नहीं ,कि खिड़की कितनी ऊंचाई पर है ? श्याम ने डांटा।
कुछ देर पश्चात ही ,उन लोगों के लिए खाना आ गया ,उन्हें तो पहले ही बहुत तेज़ भूख लगी थी ,खाना देखकर और बढ़ गयी।
रोहित बोला -हममें से कोई भी ये खाना नहीं खायेगा।
क्यों क्या हुआ ?
इसमें जहर भी हो सकता है ,कुछ देर तक खाना इसी तरह रखा रहा।
कीर्ति बोली -यदि इन लोगों को ,हमें ज़हर ही देना होता ,तो ये लोग पानी में भी जहर मिला सकते थे। इसीलिए मारना तो ये नहीं चाहते होंगे।
जब मरना ही है ,तो क्यों न ,खाकर ही मरा जाये ,इतना सुनते ही तन्मय खाना खाने लगा। उसने किसी का भी इंतजार नहीं किया। सब उसे देखने लगे।
भुक्क्ड़ कहीं का ,श्याम की बात सुनकर सभी हँसे और खाना लगे।
भई ,पहले मैं खाना खाकर देख रहा हूँ ,कहीं इसमें ज़हर तो नहीं ,अपने दोस्तों की जान की सलामती के लिए इतना तो मैं कर ही सकता हूँ।
अभी खाना खाये उन्हें कुछ समय ही हुआ था। तभी एक आदमी आकर एक पैकेट देकर बोला ,जल्दी से तैयार हो जाओ ! श्याम ने वो पैकेट खोला तो, उसमें कुछ कपड़े थे। वो भी लड़कियों के ,
ये देखकर ,श्याम तिलमिला गया बोला - ये लोग क्या चाहते हैं ?एक बात सभी ध्यान से सुन लो ,यदि कोई भी आकर इन दोनों को अपने साथ ले जाना चाहेगा ,तो किसी को भी छोड़ना नहीं।ये लोग इन्हें ले गए तो हमें मार देंगे। जब मरना ही तय है तो एक -दो को साथ लेकर ही मरेंगे।
तुम हमें भी इतना कमजोर मत समझो ,वो तो उस समय पर उनके हाथ में गन थी ,वरना हम उन्हें बता देतीं कि हम क्या बला हैं ?
ओ.... बलाओं !वास्तव में ही तुम बला ही हो ,तुम्हारे कारण ही तो हम भी फंस गए ,वरना उनकी क्या मजाल ?पहली बात तो हम ,इधर आते ही नहीं ,आ भी गए तो इस तरह फंसते नहीं।
क्यों हमने क्या किया ?तुम अपनी सोचो ! तुम्हारे कारण ही हम भी फंस गए ,यदि वो धमकी नहीं देता तो हम दोनों तो भाग ही जाते।
शर्म तो आती नहीं ,''उल्टा चोर कोतवाल को डांटे ''
ओफ्फो !तुम लोग लड़ना भी बंद करोगे या नहीं ,कोई किसी के कारण भी फंसा हो अभी तो हम सभी इनकी कैद में हैं ,ये सोचो ,कि बाहर कैसे निकलना है ,ये भी तो सोचो !चारु अकेली कैसे कर रही होगी ?हम यहाँ कम से कम साथ तो हैं, श्याम ने डांटते हुए कहा।
तब मनु बोली -ये तय है ,इन लोंगो ने हमें जिस तरह के कपड़े दिए हैं ,उन्हें देखकर तो लगता है ,जैसे हमें ये लोग कहीं नचाने वाले हैं वो पुरानी मूवी की तरह तुम कहना -''बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना। ''कहकर मनु हंसी।
कीर्ति बोली -कितनी अच्छी पिक्चर बनेगी ?बताओ !तुममें से वीरू कौन बनेगा ?तब मैं नाचूंगी अपने वीरू के लिए ,कहकर दोनों ही हंसने लगीं।
नाराज होते हुए रोहित बोला -तुम दोनों हंस रही हो ,तुम बात की गम्भीरता को नहीं समझ रही हो।
तुम लोग क्यों इतने परेशान हो रहे हो ?यहाँ ये ऐसी जगह है ,यहाँ कोई क्लब या होटल वगैरह तो होगा नहीं ,तब तुम क्यों परेशान हो रहे हो ?
हाँ ,ये बात तो है किन्तु इन कपड़ों से, हम क्या अर्थ निकालें ?
अभी उन सबमें यही बातें चल रही थीं कि वही व्यक्ति उन्हें देखने के लिए आया कि ये लोग तैयार हुई कि नहीं।
उसे देखकर ,मनु ने पूछा -हम ये कपड़े क्यों पहनें ? हमने अपने कपड़े पहने हैं।
तुम लोग समझ नहीं रहे हो ,कि वो लोग कितने खतरनाक हैं ?वे तुम्हें , तुम्हारे दोस्तों को भी मार सकते हैं ,तुम शीघ्रता से तैयार हो जाओ !उसके पश्चात तुम्हें जो भी करना है ,जैसे भी करना है वो बाद में देख लेना।
चलो !अब तुम तीनों उधर मुँह करो ,हम अपने कपड़े कैसे बदलेंगे ?
क्यों ड़र गयीं ?
नहीं ,डरी नहीं ,आने वाली ''सिच्वेशन ''के लिए हम अपने को तैयार कर रही हैं। आज तुम तीनों भी हमारा कमाल देखना।
कमाल नहीं जलवा कहो ,जलवा !कीर्ति सुधार करते हुए बोली ,कहकर दोनों हंसने लगीं।
ये क्या बेहूदा हरकतें हैं ?श्याम गंभीरता से बोला।
नहीं ,हम इन राजकुमारियों के अंगरक्षक है ,कहकर तन्मय बोला -इसी कारण हम लोग भी इनके साथ चलेंगे। न जाने आगे जाकर क्या स्थिति होगी ?यही सोचकर वो अपने को मन ही मन तैयार कर रहे थे।
कुछ देर पश्चात एक आदमी आकर कहता है ,चलो बाहर गाड़ी खड़ी है।
वो सभी बाहर आने के लिए तैयार हुए।
तुम लोग नहीं ,बस यही दो लड़कियां !
नहीं ,हम भी साथ में ही जायेंगे ,हम इनके 'अंगरक्षक 'हैं।
इतना सुनते ही ,उस आदमी ने तीनों को ध्यान से देखा और हंसने लगा।

