कीर्ति को ढूंढते हुए ,उसके दोस्तों को ,उसका पता तो चल जाता है कि वो कहाँ है ?किन्तु अब वो उसे छुड़ाने के लिए जाते हैं तब वहाँ एक गार्ड दिखता है। किस तरह उसका ध्यान भटकाना है ? यही सोच रहे हैं ,रोहित उसे छुड़ाने गया था, वो भी न जाने कहाँ गया ?या फिर उसे भी पकड़ लिया गया।तब तन्मय ने सोचा -मैं इसे बातों में उलझाता हूँ और ये दोनों उन्हें निकाल लाएंगे किन्तु ऐसा नहीं हो सकता ,सबसे पहले तो वो यही सवाल पूछेगा कि मैं कौन हूँ और यहाँ कैसे आया ?इधर तो किसी का घर भी नहीं ,जो किसी के घर का पता ही पूछ लूँ। तब तन्मय ने बहुत पुरानी तरक़ीब अपनाई। एक मोटा पत्थर फ़ेंक कर उसका ध्यान भटकाया जाये। यही उचित है ,सोचकर उसने एक पत्थर उठाया ,पत्थर क्या, ईंट का टुकड़ा ही उठाया ?फेंका ,उसकी आवाज से , उस गार्ड ने उधर देखा किन्तु अपने स्थान को छोड़कर नहीं गया।
मनु ने अपने हाथ की अंगूठी को घुमाया ,कुछ देर पश्चात एक सांप उस गार्ड को दिखाई दिया। वो उसे देखकर उसे मारने दौड़ा ,जैसे ही वो उसके दरवाजे से आगे गया। तुरंत ही तन्मय ने आगे बढ़कर दरवाजा खोल दिया और अंदर न जाकर बाहर से ही कीर्ति को आवाज लगाई ,उसे डर था कहीं कीर्ति के साथ उसे भी बंद न कर दें। कीर्ति के साथ ,रोहित भी बाहर आया और दोनों तेजी से बाहर की ओर लपके। तभी वो गार्ड तेजी से आकर तन्मय के पीछ खड़ा हो गया और क्रोध में बोला -तुम कौन हो और यहाँ कैसे ?
तन्मय भी शराफ़त से बोला -मेरे दोस्त कहीं गुम हो गए हैं ,उन्हें ही ढूंढ़ रहा हूँ।
यहाँ कोई नहीं है ,तुम यहां कैसे आये ?
वो तो मुझे भी नहीं मालूम ,कहकर उसने तब तक रोहित और कीर्ति को आते देख लिया था ,उनकी तरफ देखकर बोला भागो !
ऐ लड़के ! रूक जाओ !वरना मैं तुम्हे गोली मार दूँगा कहकर उसने गोली चला दी। गोली सन्नाटे को चीरते हुए तन्मय के सर के ऊपर से निकल गयी।उसने फिर से निशाना साधा , तभी पीछे से रोहित ने आकर उसका हाथ ऊपर कर दिया। अब उन दोनों की हाथापाई होने लगी। तब तक कीर्ति बाहर आकर मनु के साथ जा खड़ी हुई। गोलियों की आवाज सन्नाटे को चीर रही थी। तभी एक आदमी दौड़ता हुआ आता दिखलाई दिया ,उसे देखकर कीर्ति मनु से बोली -यही वो आदमी है , जो मुझे यहां बंद करके गया था। उसे देखकर तन्मय रोहित से बोला -उसे छोडो और भागो !
तब तक वो आदमी उसके क़रीब आ चुका था , वो छह फुट से ज्यादा का तगड़ा आदमी और रोहित उसके सामने बालक सा लग रहा था। रोहित ने अब गार्ड से छुटने का प्रयास किया भी किन्तु तब तक वो भयंकर सा दीखने वाला व्यक्ति उसके क़रीब आ चुका था , उसने लपककर रोहित को पकड़ लिया। रोहित ने छूटने का प्रयास भी किया किन्तु छूट नहीं पाया।
तब वो ,तन्मय की तरफ देखते हुए बोला -ऐ इधर आओ !
तन्मय दूर से ही बोला - मेरे दोस्त को छोड़ दो !
तुम लोग यहाँ कैसे और क्यों आये ?
जैसे भी आये हों ,तुम मेरे दोस्त को छोड़ दो।
ज्यादा होशियारी नहीं ,यहां जो भी आता है ,वापस नहीं जाता।
किन्तु हम जायेंगे ,कहकर वो कीर्ति और मनु के पास जाकर बोला ,तुम लोग श्याम के साथ उसी रास्ते से निकल जाओ ! हम भी आते हैं।
नहीं ,सभी एक साथ ही जायेंगे वरना कोई नहीं जायेगा ,कहकर श्याम उससे बोला -देखिये ,न ही हमने कोई चोरी की है ,न ही कोई डांका डाला है। अब आप हमारे दोस्त को छोड़िये।
उन दोनों लड़कियों को छोड़कर चले जाओ !
खबरदार !यदि तुमने ऐसा कुछ भी गलत सोचा ,अंजाम अच्छा नहीं होगा।
क्या कर लोगे ?तुम !
देखिये ! हमारी आपसे कोई दुश्मनी नहीं है ,आप अपना कार्य करिये ,हम चुपचाप चले जायेंगे। श्याम नम्रता से बोला।
चुपचाप तो तुम लोग नहीं जा सकते ,पहले ये बताओ ! तुमने यहाँ क्या -क्या देखा ?
हमने कुछ भी नहीं देखा ,यहाँ देखने को है ही क्या ? कहीं खुदाई हो रही है ,कहीं कुछ इमारतें भी बनी है किन्तु इनमें आप लोग क्या करने वाले हैं ? ये तो आने वाला समय ही बतायेगा।
इतने सीधे तो नहीं लग रहे ,कहीं तुम कोई ख़बरी या प्रेस से तो नहीं हो।
आपको ऐसा क्यों लगता है ? हम पढ़ने वाले बच्चे है , छुट्टियां थीं 'एडवेंचर 'के लिए आ गए ,किसी ने हमसे कहा कि यहाँ भूत रहते हैं ,इसीलिए उनको गलत सिद्ध करने के लिए हम लोग इधर आ गए।
अब तुम ये समझो ,तुमने भूत ही देख लिया , कहकर उसने रोहित को दरवाजे से अंदर की तरफ ढकेला ,श्याम और तन्मय उसे पकड़ने के लिए भागे उससे पहले ही उसने उन दोनों से थोड़ी हाथापाई के पश्चात ,उन्हें भी अपने नियंत्रण में कर लिया ,वो बोला -इन दोनों को भी अंदर ही बंद कर दो।
अब कीर्ति और मनु ने सोचा ,हमें इनके हाथों में नहीं पड़ना है ,सोचकर दोनों भागने लगीं। तभी एक गोली की आवाज आई, दोनों ही काँपकर रुक गयीं।
पीछे से उस सिपाही की आवाज आई ,वो कह रहा था -तुम दोनों भागकर ज्यादा दूर नहीं जा सकतीं ,भागना व्यर्थ है। तुम निकल भी गयीं ,तो तुम्हारे साथी नहीं बचेंगे ,इतना सुनते ही दोनों खड़ी हो गयीं और अपने साथियों के पास आकर खड़ी हो गयीं।
