Bevafa sanam [part 29]

समय बिताने के लिए चारु अपने थेेले में से ,कुछ सामान निकालती है ,उसका उद्देश्य उन लोगों को समझा ,बाहर निकलना था या फिर जैसे भी परिस्थिति हों ,उन लोगों की पकड़ से बाहर आना था।  उसने अपने कार्ड्स फैला रखे थे और देख रही थी। उसे लगा ,कोई ऐसी चीज तो यहाँ है जो उनकी सहायता कर सकती है या फिर करेगी। ऐसा ही उसे लग रहा था ,मन ही मन सोच रही थी -ये तो अच्छा ही हुआ कोई न कोई शक्ति तो यहाँ है ,जो हमारी सहायता करेगी। बाहर जो भी आदमी खड़े थे ,उनमें से एक अंदर आकर चारु से पूछता है। 

ऐ लड़की ! तुम ये क्या कर रही हो ?


क्या ,तुम मुझे नहीं जानते ?

उन्होंने एक -दूसरे को देखा और हँसे ,तुम क्या ,कहीं  की महारानी हो ?जो हम तुम्हें जानेंगे। 

नहीं ,मैं एक ''टैरो कार्ड्स रीडर ''हूँ ,मैंने सोचा -शायद तुम लोग इस सिलसिले में मुझसे मिले हों। 

नहीं ,हम नहीं जानते ,ये क्या होता है ?

जैसे हम हाथ की रेखाएं देखकर ,पता लगाते हैं ,कि हमारे आने वाले भविष्य में क्या लिखा है ? या फिर  'ज्योतिष विद्या 'द्वारा ,जन्मपत्री द्वारा अपना भविष्य जानना चाहते हैं ,उसी प्रकार इन कार्ड्स को देखकर हम भविष्य का पता लगाते हैं। 

चारु की बातें सुनकर सभी हंसने लगे ,उनमें से एक बोला -तुमने अपना भविष्य भी देखा है ,तुम्हें तो अपना भविष्य देखकर ही यहाँ आना  चाहिए था। 

देखकर तो नहीं आई थी किन्तु अब देख रही हूँ। 

क्या पता चला ? इस कैद से कब छूटोगी ?या यहीं की होकर रह जाओगी कहकर वो हंसने लगा। 

तुमने सही कहा ,वो ही देख रही थी ,और मैंने देखा ,यहीं पर मेरे हाथों से कोई अच्छा कार्य होने वाला है ,ये तो नहीं जानती ,कि  क्या कार्य होने वाला है ?किन्तु कोई अलौकिक शक्ति मेरी सहायता करेगी।

यहाँ तो कोई आ ही नहीं सकता ,आ गया तो जाता नहीं ,अब तुम यहाँ किस उद्देश्य से यहाँ आई हो ?ये तुम शराफ़त से बता सकती हो। और तुम्हारे साथ तुम्हारे अन्य दोस्त भी हैं ,वे यहाँ क्या करने आये हैं ?

शराफ़त की बातें तो तुम करो ,ही मत। शैतानों के मुख से शराफ़त की बातें अच्छी नहीं लगतीं। तुम्हें मैं पहले ही बताना चाहती थी ,कि हम लोग शहर में रहते हैं ,पढ़ाई करते हैं ।हमारी छुट्टियाँ थीं , घूमने के उद्देश्य से इधर से जा रहे थे किन्तु इस जंगल की हमने कुछ बातें सुनी थीं। 

क्या बातें सुनी थीं ?

यही कि ये कोई रहस्य्मयी जंगल है ,इसके अंदर जाकर कोई वापस नहीं आता ,इसीलिए हम लोग ये देखने आये थे कि ऐसा इस जंगल में विशेष क्या है ?यही देखने के लिए आये थे किन्तु हमने कुछ लोगों को देखा।

 तुमने किन्हें और कहाँ देखा ?ऐसे ही आते -जाते। 

चारु की बात सुनकर उस व्यक्ति ने गहरी साँस ली ,ओह !!!!

हम लोग तो वापस जा ही रहे थे ,कि हमारे दोस्त इधर -उधर हो गए और तुम लोग मुझे इधर ले आये ,पता नहीं वो लोग कहाँ भटक रहे होंगे ?ये जंगल है भी तो बहुत बड़ा ,कोई भी खो सकता है। 

चारु की बातों से सभी संतुष्ट हो गए ,तभी उन पत्तों पर नजर जाते ही एक बोला -जरा मेरे विषय में बताना। 

ठीक है ,कहकर उससे उसके  जन्म की तारीख पूछी और उसे बताने लगी।

 चारु की बातें सुनकर उसके चेहरे के भाव बदलने लगे और बोला -तुमने जो भी बताया सही लग रहा है। 

तभी दूसरे ने फिर तीसरे ने भी अपना भविष्य जानना चाहा। सभी के बारी -बारी प्रश्नों के जबाब चारु ने दिए। जब सभी उसकी बातों से संतुष्ट हुए ,तब सबसे आखिरी में एक बात और चारु ने उनसे कही ,तुम सभी में एक बात मुझे समान रूप से दिख रही है। 

क्या???

क्योंकि तुम सभी का कार्य एक ही है ,तब तुम्हारी मौत का कारण भी समान ही होगा और कोई अनजानी शक्ति से भी  तुम्हारा नुकसान हो सकता है या फिर जिसके लिए तुम लोग मर मिटने  तैयार हो ,वही तुम्हें मार भी सकता है इसीलिए तुम सतर्क रहना। 

चारु पहले ही अपनी बातों से उनका विश्वास जीत चुकी थी इसीलिए इस  बात पर अविश्वास करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। सभी ने एक -दूसरे का चेहरा देखा ,सभी के चेहरों पर भय  था ,वो लोग वापस बाहर आ गए। अभी वो लोग कुछ सोच समझ नहीं पा रहे थे इसीलिए शांत थे। 

रोहित और तन्मय पेड़ों की आड़ से होते हुए उन लोगों के पीछे थे। वे लोग ,उस नहर की तरफ ही जा रहे थे।

 ओह !ये लोग इधर क्यों आये हैं ? रोहित बोला। इससे तो हम मनु के बताये रास्ते से ,इनसे पहले आ जाते। 

शायद ,उस रास्ते का इन्हें भी पता नहीं होगा ,तन्मय बोला। तभी एक मोटरबोट न जाने कहाँ से प्रकट हुई ?और वो लोग उस ओर बढ़ चले ,उसमें एक बहुत ही पढ़ा -लिखा सा व्यक्ति बैठा था। जिसे देखकर ,रोहित कुछ सोचने लगा ,इसे तो कहीं देखा है किन्तु समझ नहीं आ रहा ,कहाँ देखा है ? उन्होंने उस डिब्बे को खोलकर दिखाया। उस आदमी से कुछ बातें की और उसने उन्हें एक बैग दिया ,वो भी उसे  डिब्बा सौंपकर वापस हो लिए। 

यानि मेरा शक़ सही निकला ,ये लोग अवश्य ही ,अंगों की तस्करी करते हैं और इन्होंने यही सरल रास्ता चुना है ,इधर कोई आता -जाता भी नहीं। 

तुम ऐसा इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकते हो ? 

तन्मय क्या तुम नहीं जानते ?मैं साइंस का विद्यार्थी हूँ। ऐसे बॉक्स का क्या प्रयोग होता है ? क्या मैं नहीं जानता ?


कभी तुम्हें कोई गलतफ़हमी हुई हो ,क्या मालूम बॉक्स इसी तरह के हों किन्तु इनका उपयोग किसी अन्य कार्य के लिए ले रहे हों। 

कुछ सोचते हुए बोला -हो सकता है ,जब तक कुछ भी सुबूत नहीं मिल जाता किसी भी निर्णय पर पहुंचना कठिन है। चलो ! अब वापस चलते हैं ,वो लोग हमारी प्रतीक्षा में होंगे। 

यार........  पहले इन्हें तो निकल जाने दे। इनके पीछे इसी तरह जायेंगे ,इन्हें पता नहीं चलना चाहिए हम इनका पीछा कर रहे थे। 



laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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