Nivratti

निवृत्ति यानि मुक्ति ,कार्यों से अपनी जिम्मेदारियों से मुक्ति। ये सिर्फ नौकरी से ही सेवानिवृत्ति नहीं होती वरन अन्य कार्यों से भी निवृत्ति होती है। प्राचीन समय में मानव जीवन को चार हिस्सों में बांटा  गया था ,पचास वर्ष की उम्र में 'गृहस्थ आश्रम 'के पश्चात ''वानप्रस्थ आश्रम ''में आते थे ताकि उन्हें उनके कार्यों से निवृत्ति मिले। सामाजिक कार्यों को त्यागकर ,अध्यात्म की ओर अग्रसर हों ,उसमें सामाजिक कार्यों में अपनी सेवा न देकर, अपने अनुभवों के आधार पर सलाह अवश्य देकर अपना योगदान देते थे।  उसके पश्चात' मोक्ष 'की प्राप्ति के लिए'' सन्यास आश्रम ''में  प्रवेश करते थे। पूर्णतः मोहमाया से मुक्त होना ही ''सन्यास आश्रम '' आखिरी पड़ाव था। 


किन्तु  आज के समय में सेवानिवृत्ति का अर्थ ,जिस कार्य द्वारा वो  धनोपार्जन कर रहे हैं ,उससे मुक्त होना ही 'निवृत्ति ' है ,उससे मुक्त होने पर भी ,वो सामाजिक कार्यों में लिप्त रहता है ,उनसे मुक्त नहीं हो पाता। अब सामाजिक कार्य भी बदल चुके हैं।आजकल बच्चे अपने भविष्य और करियर को लेकर चिंतित रहते हैं , बच्चों के देर से विवाह होते हैं ,उसी आधार पर सभी कार्य देर से ही होते हैं। 'सेवा निवृत्ति 'के पश्चात कुछ माता -पिता बच्चों के जीवन में आई परेशानी या उनके कार्यों में उनकी सहायता करते हैं ,किन्तु क्या ये सही में निवृत्ति है ? ये तो सिर्फ ''पद मुक्ति ''हुई। उम्र के पचासवें को तो अध्यात्म के लिए चुना गया किन्तु अब इंसान की उम्र का दायरा भी सीमित हो गया है। अधिक से अधिक पच्छत्तर या फिर अस्सी वर्ष तक ही कोई जी पाता है। 

तब अध्यात्म के लिए समय कैसे निकाला जाये ? आज की परिस्थितियों को देखते हुए ,निर्लिप्त रूप सामाजिक कार्यों को करते हुए ,अध्यात्म की ओर बढ़ना है। हम सामाजिक कार्य कर रहे हैं एक जिम्मेदारी समझकर ,किन्तु उनमें लिप्त नहीं होना है। मानसिक रूप से इस संसार से विरक्ति लेनी है। सही रूप से देखा और समझा जाये तो........  ये बड़ा की कठिन कार्य है। किन्तु आज के समय की मांग को  देखते हुए , ये ही असली ''निवृत्ति'' यही है। समाज में हैं ,सभी कार्य कर रहे हैं किन्तु 'निर्लिप्त 'रूप से। घर का त्याग नहीं करना है।  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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