Badli ka chand [part 90 ]

शब्बो यानि शबनम ,क़रतार के साथ दोनों होटल में आते हैं। वो एक साथ रहकर ,एक -दूसरे के साथ कुछ समय व्यतीत करना चाहते थे किन्तु यहाँ आकर शब्बो को खन्ना मिल गया और करतार ,एक केस में फंसकर रह गया। केस वो ही था ,जो शब्बो के संग हुआ था। पैसों के दम पर अपने ही लोग ,शराफ़त की आड़ में, अपनी बीवियों के ज़िस्म का सौदा  करते और इसका जो शिकार होता ,स्वयं उसे भी नहीं चल पाता। शिकायत कौन ,कैसे और किससे करे ?जब अपनों से ही धोखा मिल रहा था। उस रात्रि भी एक महिला के संग ऐसा ही कुछ हुआ था इसीलिए करतार शब्बो को बिना बताये उस केस में उलझ गया। हालाँकि वो केस  उसके  थाने का नहीं था किन्तु इस केस में ,वो उन लोगों की सहायता करने का प्रयास कर रहा था। तब भी , उन लोगों के विरुद्ध कोई सबूत नहीं मिल पा रहा था।



 

शब्बो सब जानती थी -किन्तु चाहते हुए भी ,कुछ कह नहीं पा रही थी ,क्योंकि उसे इस सबसे अपनी ज़िंदगी में आने वाले तूफ़ान का ड़र था। वो जानती थी ,कि करतार उसे पसंद ही नहीं ,प्रेम भी करता है। यदि उसे पता चला -कि उसकी पत्नी इस तरह कि स्थिति से गुजर चुकी है ,तो ये बात वो बर्दाश्त नहीं कर पायेगा। आज भी उस होटल में ,इसी तरह की पार्टी है। शब्बो की नजर ,उन नए जोड़ों पर है ,जो आज ही आये हैं और खन्ना ही नहीं ,कई इसी तरह के वासना के भूखे भेड़िये ,किसी की भी कमज़ोरी को अपने हाथ की लकीर में खींच लेना चाहते हैं ,वे किसी ऐसे ही लालची व्यक्ति की तलाश में रहते हैं। जो अपना जमीर बेच दे ,जिसके लिए इज्जत से ज़्यादा पैसा महत्वपूर्ण हो।  तभी एक व्यक्ति टेबल नंबर बारह पर गया और उसे किसी बहाने बुलाया , वो उठकर गया। 

कौन हो तुम ? मुझे यहाँ क्यों बुलाया ?

पैसा कमाना चाहते हो ,एक ही रात्रि के लाखों रूपये।

 वो कैसे ?उसने प्रश्न किया। 

उस व्यक्ति ने इधर -उधर देखा ,और बोला -अपनी पत्नी की एक रात्रि की कीमत लगाकर...... 

ये क्या बकवास कर रहे हो ? 

बकवास ,नहीं कर रहा हूँ ,मैंने देखा है ,तुम इतने पैसेवाले तो हो नहीं , जाने कैसे -कैसे तुमने पैसे इकट्ठा किये ? तब अपनी पत्नी को घुमाने लाये हो ,तुम चाहो तो......  किसी को पता भी नहीं चलेगा। तुम्हारे वो पैसे भी बचे रह जायेंगे और शान से छुट्टियाँ बीतेंगी ,आगे की ज़िंदगी भी तो तुम्हें वापस जाकर बितानी है कि नहीं।सारी  उम्र उसी के संग ही तो बितानी है।  

टेबल नंबर बारह वाला , कुछ सोच में पड़ गया। 

अरे यार ! वो नहीं मानी तो....... 

तो क्या ? कुछ तो मान जाती हैं ,जो नहीं मानती हैं ,उसका  इलाज़ भी हमारे पास है। 

वो क्या ?

तुम पहले अपने आपको तैयार तो करो ,अब अपनी पत्नी को समझाना ,या फिर बिना समझाये ही उसको हमारे पास लाना ,तुम्हारा काम है।

ये मैं कैसे कर सकता हूँ ? कोई भी महिला ,जिसकी नई -नई शादी हुई हो ,वो कैसे ऐसा कर सकती है ?वो तो इस तरह का कुछ सोच भी नहीं सकती। 

पैसा सब कुछ करा  सकता है ,कई बार तो स्वयं लड़की ही मान जाती है वो  नहीं मानती है तब उसका पति उसे मनाता है। तब उसके हाथ में एक पुड़िया देता है और कहता है -ये उसे शरबत में घोलकर पिला दो ,सब ठीक हो जायेगा ,तुम भी खुश और वो भी। तुम लोग ,मेरी पत्नी को लेकर कहाँ जाओगे ?और वो कौन है कितने पैसे देगा ? 

तुम बस फ़ल खाओ ,गुठली मन गिनो ! हाँ तुम आस -पास ही रहना ताकि जब तुम्हारी पत्नी की आँख खुले उसका नशा दूर हो तब तुम उसके साथ हो। ताकि उसे लगे -''जो भी उसके साथ हुआ ,वो सब तुमने ही किया। ''ये चीजें बहुत ही गोपनीय तरीके से होती हैं ,तुम लोग भी दो चार दिन मस्ती करके चले जाना। पैसा भी बचेगा ,''आम के आम गुठलियों के दाम ''कहकर वो ढीठ सा मुस्कुराते हुए जाने लगा। 

सुनो ! पैसा कब और कैसे ?

पैसा ,उसी हिसाब से ,जैसा माल...... 

मतलब !!!

मतलब क्या ? क्या ,तुमने अपनी पत्नी के साथ एक रात्रि भी नहीं बिताई  ?

नहीं। 

तब तो तुम्हें अच्छा पैसा मिलेगा 

वो सोच रहा था , मेरी पत्नी इस तरह तैयार नही  होगी किन्तु जब उसने अपनी पत्नी से पूछा -तुम ये तो जानती ही हो कि हम 'हनीमून 'के लिए आये हैं किन्तु ये हनीमून तुम किसी और के साथ...... 

उसकी पत्नी ने उसे घूरकर देखा ,ये क्या कह रहे हो ? तुम ! क्या तुम्हें अच्छा लगेगा तुम्हारी पत्नी ग़ैर की बांहों में हो। तुम कैसे लालची इंसान हो ? मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी - कि तुम मेरा इस तरह सौदा करोगे। वैसे ये सौदा, कितने में तय हुआ ? वो अपनी पत्नी की तरफ आँखें फाड़कर देखने लगा अबकि बारी उसके चौंकने की थी। उसे तो उम्मीद ही नहीं थी, कि उसकी पत्नी इतनी जल्दी मान जायेगी। वो अपने हाथ वाली पुड़िया को देख रहा था ,जो उसने अपनी मुट्ठी में कसकर बंद कर ली और सोच रहा था -''इसकी तो अब आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी ,व्यर्थ ही जाएगी ,इस ग़म को मैं कैसे सह सकूंगा ? मेरे स्थान पर कोई और.........  ,शायद मुझे ही पीनी पड़ जाये। आखिर ये लोग कौन हैं ? क्यों किसी की ग़रीबी का मज़ाक उड़ाते है ?और उसका लाभ भी।अब वो अपनी पत्नी के विषय में ही सोचने लगा ,ये भी बिना ना नुकुर के तैयार हो गयी। भला कोई शरीफ लड़की इस तरह कैसे ???



आज की रात्रि उसने सोचते हुए ,गुजार दी है ,सोचा -आज की रात्रि तो मेरी है किन्तु उसकी बात स्मरण कर वो आगे नहीं बढ़ा। ये लालच भी न.... व्यक्ति को कितना नीचे गिरा देता है ?उसने एक बार अपनी पत्नी की तरफ पलटकर देखा ,वो तो आराम से सो रही थी ,जैसे उसे इस बात से कोई फ़र्क ही नहीं पड़ा। 

अगले दिन की शाम को ........    




 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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