असफलता के रहते.....
सफलता टिक नहीं सकती।
सफलता मिलने पर भी ,
'असफलता 'का भय बना रहता है।
माना कि, असफलता सीख देकर जाती है।
जिसने भी चखा ,इसका स्वाद !
इसको स्मृतियों में भी, लाना नहीं चाहता है ।
ये रुला देती है ,तोड़ देती है ,सभी स्वप्न।
एक बार जो टूट गया ,उठ नहीं पाता है।
जिसने एक बार भी देखा , इसका मुख,
पुनः ज़िंदगी में ,उभर नहीं पाता है ।
जो सम्भल गया ,आगे बढ़ जाता है।
इससे पहले ज़िंदगी में ,कहीं कुछ टूट जाता है।
इसके कड़वे घूंट कौन पीता है ?
ये आ जाये न ,ज़िंदगी में ,डर -डरकर जीता है।
