Kahani

नमस्कार ,बहनों  और दोस्तों ! आओ ! आज कुछ नई  कहानी कहते हैं , हम कहानी पढ़ते -सुनते हैं ,किसी के जीवन से जुडी कहानी ,काल्पनिक कहानी ,रहस्यों भरी कहानी। हमारा जीवन भी तो रहस्यों से ही भरा है ,पता नहीं इस जीवन में कब क्या हो जाये ? कह नहीं सकते। हमारे जीवन में भी कौतुहल बसा है ,हमारा जीवन भी इक पहेली है। उसमें अनेक ड्रामे हैं , कभी -कभी तो हम कहानी स्वयं ही गढ़ लेते हैं। किन्तु हम अपने अंदर की कहानी को नहीं देखते ,न ही पढ़ना चाहते हैं। दूसरे की कहानी में रूचि दर्शाते हैं। कभी -कभी तो हम परिस्थिति वश ,बेबस ,लाचार हो जाते हैं। अत्यंत दुःख के कारण ,अवसाद की स्थिति में पहुंच जाते हैं। कभी -कभी बहुत प्रसन्न होते हैं और एक नई कहानी की रचना होती है। अवसाद की स्थिति में भी या तो हम हार जाते हैं या फिर जीत कर एक नई कहानी की रचना करते हैं। हम स्वयं एक कहानी ही तो हैं ,उस कहानी के मुख्य पात्र हम ही हैं। ये हमारे ऊपर निर्भर करता है ,कि हमें नायक बनना है या ख़लनायक। 


जब तक जीवन है ,कहानी ,बनती और चलती रहेगी। अधिकतर ,हमारे जीवन में कोई नया व्यक्ति आता है ,अब चाहे उससे प्रेम प्रसंग हो या फिर घृणा या अन्य कोई रिश्ता। तब भी हमारे जीवन की कहानी में एक नया मोड़ आ जाता है। हमारी बहनों के जीवन में भी ,ऐसे अनेक और नये मोड़ आये होंगे। जिनके कारण उन्हें जीवन में कुछ नए रोमांचक अनुभव हुए होंगे। आज हम अपने ही जीवन की कहानी को पढ़ते और गढ़ते हैं। 

मेरे जीवन में तो ,दीपक के आते ही बदलाव आ गया था। मैं आगे पढ़ना चाहती थी और वो शादी करना चाहता था। मुझसे बेइंतहां प्यार जो करता था। मेरे सामने प्रश्न आ खड़ा हुआ ,मैं शादी करके घर बसा लूँ  या फिर अपनी शिक्षा ग्रहण कर अपनी ज़िंदगी संवार  लूँ। मैं दोराहे पर खड़ी थी ,प्यार या जीवन का सपना नम्रता ने बताया।  

फिर क्या हुआ ,आपने किसे चुना ?

चुनना ,किसे था ?मुझे तो दोनों ही चाहिए थे। 

तब आपने क्या किया ?

तब मैंने दीपक को समझाया कि न ही मैं तुम्हें छोड़ सकती हूँ ,और न ही सपने को ,यदि तुम मेरे साथ हो तो मुझे किसी भी बात से समझौता नहीं करना पड़ेगा। 

तब दीपक ने क्या कहा ? क्या उसने आपका साथ दिया ?

जी..... पहले तो ज़िद पर अड़ गया ,जब कोई बातों को समझना ही नहीं चाहता ,तब ज़िंदगी बड़ी कठिन लगने लगती है ,थोड़ा सा तालमेल हो जाये तब यही ज़िंदगी बड़ी आसान लगने लगती है। तब मैंने दीपक को समझाया शादी तो दो साल बाद भी हो सकती है किन्तु मेरा ये पढ़ने का समय है ,ये दुबारा नहीं आएगा। यदि मैंने शादी कर भी ली तो जीवन भर पछतावा रहेगा और मुझे लगेगा मेरे ही अपने प्यार ने मुझे आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया। 

आगे क्या हुआ ?

होना क्या था ?कुछ उसने समझा ,कुछ मैंने भी। उसने मुझसे वायदा किया कि शादी के बाद वो मुझ पर किसी भी तरह की ज़िम्मेदारी नहीं डालेगा। जब तक मैं अपने मुक़ाम तक नहीं पहुंच जाती। 

अजी कुछ  भी नहीं होता ,सारे वायदे धरे के धरे रह जाते हैं ,कोई नहीं निभाता। 

नहीं ,ऐसा नहीं है ,दीपक से शादी करने के पश्चात ,उसने पढ़ाई में मेरा सहयोग किया  अधिक से अधिक समय पढ़ने के लिए दिया ,उसका परिवार भी अच्छा था किसी ने भी मुझे किसी बात के लिए टोका नहीं। दो साल बाद मैंने भी अपनी जिम्मेदारियों से मुख नहीं मोड़ा। आज मैं नौकरी भी करती हूँ और घर के कार्यों में भी सहयोग करती हूँ। 

चलो आपकी कहानी का सुखांत तो हुआ। किन्तु मेरी कहानी में ,तो मैं इतनी परेशान और दुःखी थी कि एक बार को तो जी में आया कि आत्महत्या ही कर लूँ। 

हैं..... ऐसा क्या हुआ था ?

होना क्या था ?मेरी ससुराल में ,मेरी सास का  व्यवहार ,बहुत ही कठोर था। मैं रात -दिन रोती रहती थी। 

क्यों भाईसाहब ,ने साथ नहीं दिया। 

नहीं ,वो मेरे लिए अपनी माँ को कुछ नहीं कह सकते थे। मुझसे ही सभी बातें समझने के लिए कहते। तब एक दिन मैं इतनी दुखी थी ,छत पर थी ,मन किया -यहीं से कूदकर अपनी जान दे दूँ।

तब जान तो आपने नहीं दी होगी ,वरना आज यहाँ खड़ी नहीं होतीं रेनू ने हँसते हुए बोली। 

किसी की ज़िंदगी पर हंसना कितना आसान होता है ?किन्तु उसके दर्द को समझना कितना मुश्किल ?

नहीं ,मैं तुम्हारी कहानी पर नहीं हँसी बल्कि अपने प्रश्न पर स्वयं ही हंसी थी ,तुम बताओ !तब तुमने क्या किया और सोचा !

तब मैं देर तक रोती  रही ,उसके कुछ देर पश्चात मन हल्का हुआ और अपनी बेटी के विषय में सोचा। ''मैं तो चली जाऊँगी किन्तु मेरे जाने के  पश्चात इसका क्या होगा ?कौन इसे संभालेगा ?किसी के जाने से ज़िंदगी रूकती नहीं किन्तु किसी का जीवन रुक जाने से ,एक कहानी समाप्त हो जाती है। तब मैंने अपनी नई कहानी लिखने का निर्णय लिया और अपनी बेटी के लिए ,खड़ी हो गयी और आज मेरी कहानी आप लोगों के सामने है। 

सही कह रहीं हैं आप ! ज्यादा डराने से ड़र भी समाप्त हो जाता है ,मैंने भी अपने बॉस का ड़टकर सामना किया ,थोड़ी अवहेलना ,थोड़ा तिरस्कार तो झेला किन्तु मैंने भी सच का  साथ नहीं छोड़ा और अंत में उसको जाना पड़ा। 

अब अपनी कहानियों को यहीं समाप्त कर ,हम अपनी कहानी स्वयं लिखते हैं। हम खुद एक कहानी बनकर दूसरों को  ,एक नए जीवन का संदेश दे सकते हैं। मोनिका जी ने सही कहा -जीवन समाप्त हो जाने से ,एक कहानी का अंत हो जाता है किन्तु ज़िंदगी तो इसी तरह चलती रहती है ,किसी के जाने से जीवन  नहीं रुकता। बस एक कहानी का अंत  होता है। तब क्यों न हम ,एक नई कहानी का निर्माण करें। घुट -घुटकर मरने के स्थान पर नवीन  जीवन ज्योति जलाएं ,नई कहानी बनाएं। 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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