Bevafa sanam [part 13]

तांत्रिक ,राजकुमारी की  जली हुई ,लाश लेकर नगरी में आता है। उसकी क्रोध के कारण ,आँखें लाल थीं ,वो अत्यंत क्रोधित था क्योंकि राजकुमारी के जलने के कारण ,उसका उद्देश्य पूर्ण नहीं हो पाया और इसका कारण वो उस नगरी के राजा का धोखा भी समझता है। उसने तो राजा से ,बिना किसी छल -कपट के राजकुमारी का हाथ माँगा था, और उसने राजा की शर्त भी मान ली थी किन्तु राजा ने ही उससे छल किया। और धोखे से अपनी बेटी का विवाह, उसकी शर्त पूरी होने से पहले कर रहा था। वो तो उसे अपनी शक्तियों द्वारा पता चल गया कि उसके साथ छल हो रहा है। किन्तु अब उसकी बेटी ने भी अपनी जान देकर ,उसके सभी अरमानों पर पानी फेर दिया। वो जो चाहता था, वो नहीं हो सका ,उसका उसे क्रोध था।



 

राजन ! बाहर निकलिए ,तांत्रिक क्रोधावेग में चिल्लाया -अब तुम मेरे श्राप से नहीं बच सकते। कहकर उसने एक मंत्र पढ़ा और हाथ में ली गयी भभूत को उसके महल की तरफ फूंका। उसके ऐसा करते ही सैकड़ों काले सर्प उसके महल में प्रवेश कर गए। सिपाही भागने लगे ,महल में चारों तरफ अफरा -तफ़री मच गयी। इतने सारे काले सर्प कहाँ से आये ?राजा ने सिपाहियों को पता लगाने का आदेश दिया। सिपाही बाहर की तरफ भागे किन्तु उन सर्पों से बचना मुश्किल हो रहा था। राजा अपने महल की खिड़की पर आ गया। ये देखने के लिए ,कि इतने सारे सर्प कहाँ से आ रहे हैं किन्तु वो अभी बाहर की तरफ ठीक से देख भी नहीं पाया। उसके सामने ही एक सर्प आकर बैठ  गया। ''राजा को काटो तो खून नहीं '' तभी उसने तेजी से दीवार पर टंगी अपनी तलवार को म्यान से  खींच लिया और  सीधे उस सर्प पर प्रहार कर दिया ,तब उसने देखा ,उस सर्प के कटते ही वो हवा में गायब हो गया। तब उसे एहसास हुआ ,ये जो भी सर्प हैं ,किसी की तांत्रिक क्रिया है। 

तब उसने बाहर आकर ,सिपाहियों को आदेश दिया ,इन्हें मारते रहें ,डरने की आवश्यकता नहीं है ,किन्तु सर्प भी कम नहीं हो रहे थे ,बढ़ते ही जा रहे थे। तब कुछ सिपाही बाहर से आये और उन्होंने राजा को बताया आपकी पुत्री के संग वो तांत्रिक भी बाहर खड़ा है। किसी भी सिपाही में इतना साहस नहीं था कि राजा को सच्चाई बतला सकें कुछ सिपाही तो तांत्रिक ने वहीं बंदी बना लिए ,दो -चार को इसीलिए छोड़ा ताकि वो जाकर राजा को संदेश दे सकें। राजा उनके स्वागत के लिए बाहर आया किन्तु वहां का दृश्य देखकर ,उसे चक्कर  आ गया। मंत्री ने उसे संभाला ,कुछ समय पश्चात उसने अपने आपको संभाला और तांत्रिक से पूछा -तुमने मेरी बच्ची के साथ क्या किया ?

राजन ! ये सब तुम्हारी करनी का ही फ़ल है ,मैंने तो तुमसे तुम्हारी बेटी का हाथ माँगा था किन्तु तुमने मुझे अपनी शर्तों में फंसाकर मुझे धोखा दिया। जब तुम्हारी बेटी से विवाह कर  रहा था ,तब उसने अपने प्राण देकर मेरे क्रोध की अग्नि को और भड़का दिया।  जिसका परिणाम ,अब तुम देख ही रहे हो ,उसने सिपाहियों की तरफ इशारा करते हुए कहा। इतना ही नहीं ,मेरे क्रोध की अग्नि में ,तुम्हारा ये महल ,नगरी सब भस्म हो जायेंगे।

वहां खड़ा ,मंत्री एकदम से उसके क़रीब पहुंचकर उससे क्षमा याचना करने लगा ,भगवन !आप तो जानते ही हैं ,वे एक बेटी के पिता हैं ,पिता को तो अपने बच्ची की चिंता होगी ही ,आप एक अघोरी और वो एक महलों में पलनेवाली ,तब भी आप तो ले ही गए। ये तो आप स्वयं ही समझ गए होंगे उसने आपको स्वीकार नहीं किया इसीलिए तो उसने अपनी जान दे दी। 

अब तुम मुझे समझाओगे ,कि मुझे क्या करना था ? मेरी बरसों की मेहनत पर पानी फिर गया। अब ये राज्य ,ये नगरी भी नहीं रहेगी। कहकर उसने अपने ,झोले में से भभूत निकाली और हवा में उडा दी और चला गया। सभी को लग रहा था ,मंत्री के क्षमा याचना करने पर ,ये चुपचाप चला गया। राजा तो अपनी बेटी के शोक में था। उसे तो कुछ समझ ही नहीं आया ,ये उसके और उसकी बेटी के साथ क्या हुआ ? उसका अंतिम संस्कार किया गया। रात्रि में जब सभी अपने -अपने घरों में थे। गहन अंधकार छाया था। जनता शोक में थी। तभी धरती हिलने लगी। सभी को लगा ,शायद भूकंप आया है ,जब प्रातः काल लोग उठे तो देखा ,पड़ोस की बस्ती की बस्ती गायब है। वहाँ के घर गायब थे ,खाली जमीन थी।



इस तरह रातों -रात आदमियों सहित घर के घर गायब होने लगे। अब तो लोग घबरा गए और ये नगरी छोड़कर भागने लगे। एक आदमी था ,जो पहरा दे रहा था या यूँ समझ लो ,ये देखना चाहता था कि ये घर कहाँ गायब हो रहे हैं ? सुना है, कि उसने ही देखा ,और कोई नहीं जानता। गांव के गांव जमीन में धंस गए। वो तो भागा और लोगों को भी शोर मचाकर उठाया। तब ये बात राजा के पास पहुंची तब राजा जान गया कि ये तांत्रिक के श्राप का असर है और उसने घोषणा करा दी -जो लोग भी बचे हैं और जिन्दा रहना चाहते हैं वे अपना घर छोड़कर कहीं और बस जाएँ। जो भी गांव में लोग बचे हैं ,वो लोग यदि जिन्दा रहना चाहते हैं ,अपने गांव को छोड़कर चले जाएँ ,दिन में जो भी लोग बचे हुए थे ,सभी ने धीरे -धीरे सभी गांव खाली कर दिए। उसके पश्चात तो राजा को भी किसी ने नहीं देखा। तब से ये जमीन ऐसे ही पड़ी है ,कोई गया भी है ,तो वापस नहीं आया। हमारे बड़े -बूढ़े तो कहते थे ,कि अभी भी उस स्थान पर तांत्रिक का श्राप है। जो भी जाता है ,वो भी जमीन में धंस जाता होगा।

ये सब कहानी दादाजी आपको किसने बताई ?मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा कि किसी के श्राप से ,गांव के गांव जमीन में समा गए ,बिल्लू बनी मनु ने पूछा।

बेटे विश्वास तो मुझे भी नहीं हो रहा था ,मुझे ये कहानी मेरी दादी ने सुनाई थी ,हमारे दादा और अन्य बड़ों ने तो हमारे सामने इस बात का जिक्र ही नहीं किया , कहीं  हम जिज्ञासावश ,वहां चले  न जाएँ। 

  

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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