जब तक जीवन है अंतिम कुछ नहीं होता। बस समाप्त हो जाता है। समाप्त के पश्चात ,जीवन की, कार्य की नई शुरुआत होती है। साँस और ज़िन्दगी का ''अंतिम समय ''होता है। कहते हैं -''आत्मा कभी नहीं मरती ,वो तो अजर -अमर है।'' तब ''ज़िंदगी के अंतिम समय ''के पश्चात , आत्मा का भी नया सफर आरम्भ होता है। किन्तु प्रत्यक्ष में ,हमें एक ज़िंदगी का ''अंतिम समय ''दिखलाई पड़ता है। जब तक मानव जीवन है ,मौत ही एक अटल सत्य है ,जो भी पैदा होता है ,उसकी मृत्यु भी निश्चित है ,जिसका भी इस पृथ्वी पर निर्माण होता है ,उसका नष्ट होना भी सत्य है ,फिर चाहे वो मानव जीवन या कोई पदार्थ ही क्यों न हो ? जो भी ''अंतिम समय'' है ,वो भी इस जीवन का ,बस ये सोचो ! आत्मा की तो नई शुरुआत है।
अंतिम मौक़ा -
जीवन में आगे बढ़ने के कई मौके मिलते हैं ,किन्तु हम उन हाथ आये मौकों को कई बार अपने आलस्य ,लापरवाही या फिर अल्पज्ञान के चलते ,गंवा देते हैं। और उसके पश्चात पछताने के सिवा हमारे हाथ कुछ नहीं लगता। ऐसा नहीं कि मौका हाथ से निकल गया तो सब कुछ समाप्त हो गया किंतु कई बार वो मौका पुनः नहीं मिलता। फिर से नई शुरुआत करते हैं ,आगे बढ़ते हैं ,किन्तु गए वक़्त की तरह ,फिर से मौका भी नहीं मिलता। इसीलिए तो कुछ ज्ञानीजन कहते हैं -''ये मानव जीवन भी हमें अपने कर्मों और जीवन को सफ़ल बनाने का अंतिम मौका ही है। ''
