आज कुछ विशिष्ट बात है ,
जो दिल मेरा.... धड़काया है।
आज 'इश्क़ का पैगाम ''आया है।
आज उन्होंने छत पर बुलाया है।
आज ही नहीं ,कई बार आया है।
आज कुछ विशिष्ट बात है,जो छत...
धानी चुनर ओढ़ ,मन मेरा इठलाया है।
अनजाने ही कपोल मेरे ,रक्ताभ लिए हैं।
लज्जा से झुकी पलकें ,लब थरथराये हैं।
स्मृतियों में ,उनका ही ख़्याल आया है।
चेहरे की लालिमा देख ,चंदा भी शरमाया है।
आज ''इश्क़ का पैग़ाम '' आया है।
कैसे कहूं ?
दिल की बात ,जब से उन्हें अपनाया है।
उन्हें ही ख्वाबों में पाया है आज कुछ.....
जो उन्होंने ,छत पर बुलाया है।
आज'' इश्क़ का पैग़ाम ''आया है।
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