Bevafa sanam [part 11]

मनु को पता नहीं ,वो जंगल अपनी ओर क्यों खींच रहा है ?उसके मन में उस जंगल के प्रति उत्सुकता बढ़ती जा रही है। अपनी इस उत्सुकता को ,वो मिटाने के लिए ,अपने मम्मी -पापा से झूठ  बोलकर ,श्याम के गांव ही आ जाती है। उसे किसी भी  बात की  परवाह नहीं ,कि किसी को पता चल गया तो कोई क्या सोचेगा ?किन्तु श्याम को इस बात की परवाह थी इसीलिए उसने मनु को अपने फॉर्म हाउस में रखा। मनु एक सबूत  की तलाश में है जिसके कारण वो उस जंगल में आगे की छानबीन कर सके। अपने उस भरम को भी ,साबित करना चाहती  है ,जिसे उस रात्रि को देखा था। जब श्याम घर में खाना खाने के लिए जाता है ,तब मनु श्याम से , दादा जी से जंगल के विषय में पूछने के लिए कहती है ,तब श्याम उससे कहता है ,मैं नहीं पूछ पाउँगा।



 

श्याम मनु के लिए ,खाना लाता है ,और उसके लिए लड़कों वाले कपड़े भी ,क्योंकि मनु को आये अभी तीन दिन हो चुके थे और वो एक बार भी बाहर नहीं आई थी ,अब वो बाहर निकलकर छानबीन करना चाहती थी। जब मनु तैयार होकर आई तो एक पल को तो श्याम ही नहीं पहचान सका। वो सरदार लग रही थी ,जिसकी गोरी रंगत पर दाढ़ी खूब फ़ब रही थी। 

यार...... तू तो मस्त लग रहा है ,उसके उस सौंदर्य पर श्याम रीझ गया और बोला -बिल्लू अब बता कहाँ चलना है ? मनु ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी ,अबे ओय .... तुझसे ही पूछ रहा हूँ ,तू कहाँ  खोया है ?कहकर मनु की कमर में हाथ मारा। 

तब मनु  को समझ आया ,फिर बोली -ये ''बिल्लू ''नाम कुछ जमा नहीं। 

न जमे ,तुझे क्या करना है ? जब तक ऐसा है ,तभी तक बिल्लू है।

ये बात भी सही है ,चलो !आज दादा जी के पास चलते हैं। 

चलेंगे ,पहले अपनी आवाज में थोड़ा भारीपन तो लाओ !लड़कियों की आवाज में हंसी की पात्र और बनोगी। लड़के की आवाज लड़की जैसी..... हो सकता है ,कोई पहचान भी ले। श्याम हँसते हुए बोला और हाँ......  चाल भी बदलनी होगी ,लड़के की तरह अकड़कर चलना।  

आहो जी आहो !मनु भारी आवाज में बोली। मन ही मन मनु बुदबुदाई -क्या मुसीबत है ?

ओये ! ये मुसीबत तेरी अपनी खड़ी की हुई है ,चलो छोडो !रहने देते हैं। 

नहीं जब ''ओखली में ,सर'' दे ही दिया है ,तो मुसल से क्या डरना ?कहकर मनु आगे बढ़ चली। 

 यार...... तू ! कितना क्यूट लग रहा है ?मुझसे शादी करेगा। 

लड़के की शादी कहीं लड़के से होती देखी  है ,मैं तो अपने लिए सुंदर वोट्टी लाऊंगा ,तुम जैसा खड़ूस दोस्त नहीं कहकर  मनु हंसने लगी। अच्छा अब शीघ्र ही चलते हैं ,आज दादाजी से मिलवा दो। 

दोनों बाहर निकलते हैं ,एक -दो  जानने वाले ने ही पूछा -श्याम ये लड़का कहाँ से पकड़ा ? कब आया ?इत्यादि प्रश्न ! श्याम भी अपने हिसाब से जबाब देता रहा। उसे लेकर श्याम ,दादाजी के पास गया। दादाजी ने उसे देखा और बोले -ये कौन है ?

दादाजी मेरे दोस्त का भाई है ,श्याम को इस तरह बात बदलते देख ,मनु ने उसकी तरफ देखा। श्याम ने भी इशारे से उसे कुछ भी कहने से मना कर दिया। 

दादाजी प्रणाम !मनु ने आवाज बदलकर कहा। 

दादाजी ने उसके चेहरे पर अपनी नजरें गड़ा दीं और बोले -तू सरदार ही है न मुस्कुराकर पूछा। 

आहो जी आहो अपनी गलती में सुधार करते हुए मनु बोली -दादा जी एक बात पूछूं ,वो जो जंगल  है ,क्या उसकी कोई कहानी है। 

तुझे क्या करना है ?उसके विषय में जानकर ,वहां कोई नहीं जाता। 

वो तो मैं जानती.......थोड़ा रूककर , जानता हूँ। मुझे अपने स्कूल में ,एक कार्य मिला है। उसमें कुछ रहस्य की बातें या फिर कुछ ऐसी जिन पर विश्वास न किया जा सके। 

ऐसा कुछ भी नहीं है ,उस जंगल में , टका सा जबाब दे दिया। 

कुछ तो होगा ,क्या वहां कोई भूत या कोई प्रेत आत्मा  या कोई बरसों पुराना रहस्य जो आपने अपने दादा जी से सुना हो। कुछ तो याद कीजिये। 

दादाजी की इतनी खुशामंद करने पर ,वो बताने के लिए तैयार हो गए और बोले -जब हम छोटे -छोटे थे ,तब हमारे दादाजी को कुछ थोड़ा -थोड़ा स्मरण था वो भी लगभग भूल चुके थे क्योंकि उनके भी दादाजी ने उन्हें ये किस्सा सुनाया था -लगभग चार सौ -पाँच सौ बरस पुरानी बात है ,उससे भी ज्यादा पुरानी हो सकती है क्योंकि हमारी भी पांच पुश्ते ही यहाँ रही हैं ,पहले किसी और स्थान पर थे। कहते हैं -जहाँ आज जंगल है ,वहां बहुत सुंदर नगरी थी और उसमें कई छोटे -छोटे गाँव थे।

तब वे सब कहाँ गए ?मनु ने उत्सुकता से पूछा। 

सुना है ,उस नगरी के राजा की बेटी बहुत सुंदर थी, बिल्कुल दूध जैसी गोरी ,परी सी लगती थी। स्वभाव में उससे भी अच्छी ,सबकी सहायता के लिए तत्पर रहती। वो सबसे प्रेम करती ,सभी उससे। एक बार उस नगरी में ,एक तांत्रिक आया और राजा से बोला -मैं तेरी बेटी से ब्याह करूंगा।


 

राजा ने कहा -आप इतने बड़े तांत्रिक ,आप महान आत्मा हैं ,मेरी बच्ची नाजुक सी, कभी बिना रथ के ,बिना सवारी के अपने घर के सिवा कहीं पैदल नहीं चली। आप उससे ब्याह करके उसे क्या सुख दे सकते हैं ?

जो भी हो ,मुझे उसी से विवाह करना है। वो तांत्रिक अड़ गया। कोई रास्ता न देख , उसे टरकाने के लिए ,उसके सामने एक शर्त रख दी। 

कैसी शर्त ?दोनों एक साथ बोले। 


शर्त जाननी है ,तो अगला भाग पढ़िए -बेवफा सनम [भाग १२ ]

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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