कौन हूँ ,क्या हूँ ? क्या मेरी पहचान है।
तलाशती हूँ ,अपने आपको,
पूछती , दिल का क्या अरमान है ?
कभी रिश्तों में ढूँढ़ा ,कभी रंगों में ढूंढा ,
घर के अंदर तो, कभी अपनों में ढूंढा।
ख़ामोशी में ढूंढा ,तो कभी क्षितिज़ में...
तलाशती रही ,उस मंजिल को पूछती रही, पता।
न जाने कौन सी मंजिल मेरी ,अस्तित्व क्या है ?मेरा !
पहचान खोजती रही ,
ख़ुशी को अपनी तलाशती, भटकती रही।
पूछा जो, अपने आपसे ख़ुशी कहाँ है ? तेरी.....
सफर को अपने यादगार बना ले ,
ज़िंदगी को जी,जीभरकर मुस्कुरा ले !
पहले अपने आपको खुश रखना सीख ले !
कर्म जो तुझे करना है ,उसको करता चल !
पहचान ख़ुद ब ख़ुद तुझे ढूंढ़ लेगी ,
मंज़िल तक तेरी इक पहचान होगी।
न भूल,अपने आपको !भीतर अपने झांक ले !
अपनी खुशियों में ,अपने आपको तलाश ले।
