Talash apni pahachan ki

कौन हूँ ,क्या हूँ ? क्या मेरी पहचान है। 

तलाशती हूँ ,अपने आपको,

पूछती , दिल का क्या अरमान है ? 

कभी रिश्तों में ढूँढ़ा ,कभी रंगों में ढूंढा ,

घर के अंदर तो, कभी अपनों में ढूंढा।

ख़ामोशी में ढूंढा ,तो कभी क्षितिज़ में... 


तलाशती रही ,उस मंजिल को पूछती रही, पता। 

न जाने कौन सी मंजिल मेरी ,अस्तित्व क्या है ?मेरा !

पहचान  खोजती रही ,

ख़ुशी को अपनी तलाशती, भटकती रही। 

पूछा जो, अपने आपसे ख़ुशी कहाँ है ? तेरी.....

सफर को अपने यादगार बना ले ,

ज़िंदगी को जी,जीभरकर मुस्कुरा ले !

पहले अपने आपको खुश रखना सीख ले !

कर्म जो तुझे करना है ,उसको करता चल !

पहचान ख़ुद ब ख़ुद तुझे ढूंढ़ लेगी ,

मंज़िल तक तेरी इक पहचान होगी।

न भूल,अपने आपको !भीतर अपने झांक ले !

अपनी खुशियों में ,अपने आपको तलाश ले।  

  

 

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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