जंगल का रहस्य जानने के लिए ,सभी उसमें प्रवेश करते हैं किन्तु उन पर हमला हो जाता है ,जैसे कोई पहले से ही उन पर नजर गड़ाए था। उन पर गोलियों से आक्रमण होता है ,उससे बचते -बचाते वे आगे बढ़ ही रहे थे ,तभी उन्हें बेहोश कर दिया जाता है और कुछ मुखौटे लगाए लोग ,उन्हें उठाकर जमीन के अंदर बने किसी कमरे में लिटा देते हैं किन्तु तन्मय और चारु अभी भी उनके साथ नहीं थे तभी एक व्यक्ति आकर बताता है इनकी एक साथी को मैंने पकड़ा है। वे सभी किसी के कहने पर कार्य कर रहे हैं। तन्मय जिस सुरंग जैसे स्थान पर उन गोलियों से बचने के लिए घुसता है ,और आगे बढ़ता जाता है किन्तु वो आगे बढ़ते ही फिसल जाता है। और वो फिसलते हुए ,एक बड़े से हॉल में पहुंच जाता है। उस समय वहाँ कोई नहीं था। उसे ये देखकर आश्चर्य होता है कि जमीन के इतनी गहराई में ,इस तरह कोई कमरा भी हो सकता है। उसने देखा उसमें कुछ मशीनें हैं।
वे मशीने जमीन को खोदने वाली थीं। इसका अर्थ है ,यहाँ पर खुदाई का कार्य चल रहा है ,मनु ने बताया था कि यहाँ पहले एक पुराना गांव या नगरी भी हुआ करती थी। इसी मशीन के कारण ही हमें जमीन हिलती नजर आती होगी किन्तु यहां इस तरह ख़ुदाई करने का क्या उद्देश्य हो सकता है ?वो उन्हीं मशीनों की आड़ लेकर छिपता -छिपाता आगे बढ़ता है। तब दूर दालान में कुछ लड़के कार्य करते देखे। उन्हें एक आदमी डांट रहा था। मिटटी को ठीक से जाँच लो ,कहीं कुछ मिले तो बताना ,छुपा कर मत रख लेना। जल्दी - जल्दी काम करो ,आगे भी जाना है। मिटटी का एक पहाड़ बना हुआ था ,आगे क्या हो रहा है ?वो जान नहीं पा रहा था।
मनु उठी ,उसने अपने को ,एक कमरे में जमीन पर पड़े पाया ,उसने श्याम और अन्य दोस्तों को उठाने का प्रयत्न किया किन्तु जब कोई भी नहीं उठा ,उसने उनकी नब्ज की जाँच की और बाहर आई। बाहर उसने एक तरफ झरना देखा ,उसने वहां से अपने हाथों की अँजुरी बनाकर उसमें पानी भरा और दौड़कर उनके ऊपर छिड़का किन्तु तब तक पानी उसके हाथों से निकल चुका था। उसने आस -पास कोई सामान तलाशा ताकि उसमें पानी भरकर ला सके। तब उसने ,अपने कुर्ते का काफी बड़ा हिस्सा जो लटक रहा था भिगो दिया और उनके पास आकर थोड़ा -थोड़ा सभी के चेहरों पर निचोड़ दिया। धीरे -धीरे सभी को होश आया और ये जानने का प्रयत्न करने लगे कि हम कहाँ हैं ?
जहाँ उनको बेहोश करके लाया गया , कमरे में रखा ,वो देखकर लग रहा था जैसे ये अभी निर्माणाधीन है। इसका अर्थ है ,यहां कुछ बनाया जा रहा है। न ही कोई दरवाजा ,न ही कोई ताला ,वो लोग बाहर आ गए। तब मनु ने वो झरने वाला स्थान भी उन्हें दिखाया। जिसे देखकर लग रहा था ,ये शायद बग़ीचे के लिए सोचकर बनाया गया स्थान है। वे आस -पास भी घूमे किन्तु कोई दिखलाई नहीं दिया ,ऐसा कैसे हो सकता है ? यहां कार्य चल रहा है ,तब वे घूमते हुए उस हॉल में भी पहुंचे जहाँ पर वो मास्क वाले व्यक्ति ,न जाने किस से बात कर रहे थे ?किन्तु वहाँ उन्हें चारु मिल गयी।
चारु के उन्होंने हाथ -पांव खोले और उससे पूछा कि वो यहाँ कैसे आई ?किन्तु वो कुछ भी जबाब देने में असमर्थ थी ,बोली -मेरे सिर पर चोट लगी थी ,और मैं बेहोश हो गयी। उसके पश्चात क्या हुआ ?मुझे नहीं मालूम ! तुम लोग यहाँ कैसे आये ?वही प्रश्न उसने भी दोहराया।तन्मय कहाँ है ?वो भी नहीं दिख रहा।
हमें भी नहीं मालूम ,हमें भी बेहोश करके यहाँ लाया गया किन्तु हमारा तरीका कुछ अलग था।जब गोलियां चली थीं ,तन्मय तो तभी से हमारे संग नहीं है ,रोहित बोला।
चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए ,श्याम बोला - ऐसा लगता है ,जैसे यहां किसी इमारत का निर्माण कार्य चल रहा है। किन्तु इसमें छुपाने वाली बात क्या है ?कुछ समझ नहीं आ रहा। किन्तु यहाँ कोई दिख भी नहीं रहा और न ही कोई रास्ता ही दिख रहा है। हम यहॉ किस रास्ते से आये थे ?कुछ समझ नहीं आ रहा।
देखो !आस -पास देखो !अवश्य ही कोई रास्ता नजर आएगा ,सभी रास्ते की तलाश में भटकने लगे किन्तु रास्ता नहीं दिख रहा था।
थककर कीर्ति ,एक पत्थर पर बैठ गयी ,उसके बैठते ही ,पत्थर अपने स्थान से खिसक गया और उसके खिसकते ही ,झरने के नीचे एक रास्ता बन गया। वो लोग उस और बढ़े ,तभी चारु ने रोका कहीं किसी गलत जगह न फंस जाएँ ,जरा संभलकर !!
अब जो भी होगा देखा जायेगा ,कहकर वे सभी उस झरने के रास्ते से बाहर की तरफ निकल आये ,जैसे ही कीर्ति अपने स्थान से उठी वो वहीँ रह गयी। वो लोग दूसरी तरफ जा चुके थे। उधर से वे लोग चिल्ला रहे थे और इधर से कीर्ति ,किसी को भी किसी की कोई बात सुनाई नहीं पड़ रही थी। तभी कीर्ति को कुछ सूझा किन्तु उसे कोई भी ऐसा पत्थर नहीं दिखा जिसे उस स्थान पर रख दे। वो फिर से उसी पत्थर पर बैठ गयी। फिर से झरने का रास्ता खुला और उधर से श्याम आया ,जो एक भारी खम्बे जैसा कुछ लिए था। अब उस रास्ते से निकलते ही स्वतः ही वो रास्ता बंद हो गया। वे सभी एक मंदिर के खंडहरों के बीच पहुंच गए ,वहां उन्हें कुछ लोग अवश्य दिखाई दिए ,जो खुदाई कर रहे थे। उस मंदिर को देखकर मनु बोली -ऐसा लगता है ,जैसे मैंने इस मंदिर को कहीं देखा है।
उसकी बात सुनकर सभी हँस दिए और बोले -ख्वाबों में देखा होगा ,तुम तो हमारे संग पहली बार ही तो यहाँ आई हो।
हां शायद , वे लोग आगे बढ़े ,एक स्थान पर उन्होंने देखा ,बहुत सारी मंदिर की मूर्तियाँ रखी हैं। इस तरह मंदिर की खुदाई कर मूर्तियों को इस तरह इकट्ठा करने के पीछे ,इन लोगों का क्या उद्देश्य हो सकता है ?
श्याम बोला -इसमें इतनी सोचने वाली बात ही क्या है ? एक ही उद्देश्य हो सकता है इन कीमती मूर्तियों की तस्करी।
तुम सही कह रहे हो ,और इनके आने -जाने का साधन इनके पीछे ही है ,मनु बोली।
मतलब!!!!!
मतलब ये कि इसी मंदिर के पीछे ही कुछ आगे जाकर वो नहर भी है ,ये लोग नहर के रास्ते इन मूर्तियों की तस्करी करते होंगे।
तुम्हें कैसे पता चला ?इधर से ही नहर का रास्ता पड़ता है।
शायद ,जब मैं इस जमीन के विषय में जानकारी जुटा रही थी ,तभी की जानकारी होगी।तन्मय भी तो कहीं नहीं दिख रहा ,वो मिल जाता तो आगे चलते। इस तरह यहाँ खड़े रहकर तो कभी भी इन लोगो की निगाहों में आ सकते हैं। तभी मनु बोली -वे रहीं सीढियाँ ! सभी बड़ी सावधानी से उन सीढ़ियों के क़रीब पहुंचकर नीचे उतर जाओ ! मनु के व्यवहार से लग रहा था ,जैसे वो इन सभी का संचालन कर रही हो।
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