छह लोग उस जंगल के अंदर घुस चुके थे , जिसमें जाने का , आज तक किसी में साहस नहीं हुआ ,जो गया तो आज तक कोई वापस नहीं आया। उसमें क्या है ? कोई नहीं जानता। श्याम और मनु के साथ उनके अन्य दोस्त भी हैं ,जो एक व्यक्ति का पीछा करते इधर आये किन्तु उस आदमी का तो पता ही नहीं चला कि वो कहाँ गया ? अगले दिन प्रातः उठते ही वो ,अभी सोच ही रहे थे कि आगे कैसे बढ़े और कहाँ जाएँ ?तभी उन्हें कुछ झाड़ियां हिलती दिखाई दीं ,सभी सतर्क हो गए। उन झाड़ियों से एक नील गाय निकलकर भागी।तभी चारु जिस पेड़ के पीछे छुपी थी ,उस पेड़ से कुछ गिरा और वो वहीं बेहोश हो गयी। किसी को भी इसकी कानों -कान खबर नहीं हुई कि उसे कोई उठाकर ले गया। तभी तन्मय को एक गड्ढा दिखाई दिया ,वो बड़ा अज़ीब और गहरा गड्ढा था।
तन्मय उसे ध्यान से देखने लगा ,और बोला -ये कोई गड्ढा नहीं लग रहा ,ये तो कोई सुरंग है ,वो उसे ध्यान से देखने के लिए जैसे ही नीचे बैठा ,तभी एक गोली उसके सिर के ऊपर से निकल गयी और सीधे पेड़ में जा घुसी। ये देखकर सभी आश्चर्य चकित रह गए ,इससे पहले की कुछ सोच पाते गोलियाँ चलने लगीं ,ये भी पता नहीं चल पा रहा था कि वो किधर से आ रही हैं ?सभी तेजी से भागने लगे क्योंकि उनका पता नहीं चल पा रहा कि अगली गोली किधर से आयेगी ?तन्मय तो अपनी जान बचाने के उद्देश्य से ,उसी गड्ढे में कूद गया। मनु ,कीर्ति श्याम और रोहित पेड़ों के पीछे जा छिपे।
तन्मय जो उस गड्ढे में कूदा था ,उसने देखा ,उस गढ्ढे की दीवार में एक सुरंग जैसा रास्ता है। वो उसमें आगे बढ़ने लगा। वो देख रहा था कि ये सुरंग अपने आप ही नहीं बनी बल्कि किसी आदमी द्वारा बनाई गयी है। कुछ देर तो वो यूँ ही चलता रहा किन्तु आगे ढलान आने पर फिसल गया और जमीन की गहराइयों में फिसलता हुआ न जाने किस जगह जा रहा था ? उधर वे चारों पेड़ों से बाहर आये ,तब उन्होंने देखा ,न ही तन्मय है और न ही चारु उन्हें ढूंढते हुए वे उस जंगल में आगे बढ़ चले। कीर्ति तो लगभग घबरा कर बोली ,यहाँ अवश्य ही कोई बड़ा ख़तरा हमारी प्रतीक्षा कर रहा है। जिस आदमी का हमने पीछा किया वो भी नहीं दीख रहा। मैं तो घर वापस जाना चाहती हूँ। मनु ने समझाया -तुम्हें तो रहस्य्मयी चीजों की जानकारी लेनी होती है। इस तरह डरोगी तो कुछ भी नहीं कर पाओगी।
रहस्यों को देखने और जानकारी लेने में रूचि है किन्तु मरने में नहीं ,तुमने देखा नहीं ,किस तरह से ताबड़तोड़ गोलियाँ चल रही थीं। इसका मतलब है ,उन लोगों को हमारे इस जंगल में होने की जानकारी हो गयी है कीर्ति ने जबाब दिया।
ये तो तुम समझ ही गयीं कि यहाँ कुछ आदमी ही हैं। कोई भूत नहीं ,क्योंकि भूत गोली नहीं चलाते और एक इंसान ही ,इस जंगल में आया था। अब तो ये पता लगाना है कि वे लोग कौन हैं और उनका उद्देश्य क्या है ?
मनु की बातों से ,कीर्ति में थोड़ी हिम्मत आई और वो आगे बढ़ने लगे किन्तु चारु और तन्मय की चिंता भी स ता रही थी। वे बेहद सतर्कता से आगे बढ़ते रहे ,उन्हें चलते -चलते लगभग आधा घंटा हो गया। तभी उन्हें जमीन हिलती महसूस हुई , समझ नहीं आ रहा था कि ये जमीन क्यों हिल रही है ? श्याम बोला -जमीन के ऊपर तो ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा। अवश्य ही जमीन के अंदर ही कुछ है लेकिन इसमें अंदर जाने का कोई रास्ता भी तो नजर नहीं आ रहा। वे चारों बड़ी सतर्कता से चारों और देख रहे थे। तभी वहां एकदम से धुंआ उठा और वे चारों उस धुएं से बचने के लिए, फिर से पेड़ों के पीछे छिपने के लिए दौड़े इससे पहले की वो उस धुएं से बचते ,बेहोश हो गए। उनके बेहोश होते ही ,कुछ लोग,मास्क लगाए हुए पेड़ों से उतरे और एक -एक ने उन्हें कंधे पर उठा लिया और चुपचाप उन्हें लेकर चल दिए।
वो लोग चुपचाप ,आगे बढ़ रहे थे ,तभी एक बड़े गहरे से स्थान पर ,उन्हें लेकर उतर गए ,उससे होते हुए एक गलियारे में पहुंचे ,गलियारे से होते हुए वे नीचे उतरे ,नीचे उतरकर एक कमरे की तरफ बढ़ चले। और उन चारों को वहीं जमीन पर लिटा दिया। वे चारों अभी भी बेहोश थे ,उन्हें वहीं छोड़कर वो लोग आगे बढ़ गए और एक बड़े हॉल में पहुंचकर ,बताया काम हो गया। कुछ पता चला ,ये लोग , इधर क्यों आये हैं ?
जी नहीं......
लगता है ,पढ़े -लिखे बच्चे हैं ,शायद घुमने के उद्देश्य से यहाँ आये हैं।
नहीं ,घूमने के उद्देश्य से तो नहीं लगते वरना हमारे आदमी का पीछा करते हुए नहीं आते वो भी चोरी -छिपे !
जी.... बाक़ी तो उन लोगों के उठने पर ही पता चलेगा कहकर वो जाने लगा।
किन्तु मुझे तो लगता है ,वो लोग चार नहीं ,ज्यादा थे , बाकि और कहाँ हैं ?पता लगाओ !
जी...... तभी एक आदमी दौड़ता हुआ आया और बोला -एक लड़की को मैं उठा लाया था।
बहुत ठीक......... इन्होंने अपनी मौत स्वयं ही बुलाई है ,इसमें हम क्या कर सकते हैं ?कहकर वो जोर -जोर से हंसने लगा।
जब इन्हें मारना ही है ,तो इन्हें यहाँ क्यों मंगवाया ?वहीं मार देना था।
नहीं वो आवाज गंभीर हो गयी ,पहले इनसे काम लिया जायेगा कहकर वो फिर से हंसने लगा।तुमसे तभी तो कहा था -इन्हें गोलियों से डराना है ,मारना नहीं ,ये सोच रहे होंगे कि हम अपनी समझदारी से बचे हैं।

