मनु का प्रेम भी अनोखा है ,जिससे उसका रिश्ता बचपन में हुआ ,उसने उम्र की उस दहलीज़ पर जाना ,जब वो अपने हम उम्र ,अपने सहपाठी के संग प्रेम और जीवन के सपने सजाने लगी किन्तु जब माता -पिता ने उसे उसके बचपन के मंगेतर से मिलवाया तो ,उसके साथ के लिए भी इंकार न कर सकी ,जो अनुभूति श्याम के संग हो रही थी ,वो मोहित के साथ महसूस नहीं किया। अब वो दो लोगों के प्रेम और व्यवहार को समझने का प्रयत्न कर रही है। मोहित को इसीलिए स्वीकार करती है ताकि उस जैसा दोस्त कहीं खो न दे। वो अपनी जिंदगी में अभी स्वयं ही नहीं समझ पा रही है कि वो मोहित को चाहती है तब श्याम की तरफ क्यों खींची चली जा रही है ?इसी के वशीभूत वो ,श्याम के गांव भी ,अपने दोस्तों को लेकर पहुंच जाती है किन्तु वहाँ तो अलग ही पहेली मे उलझ जाती है।
वो पहेली थी उसके गांव का जंगल ,गांव वालों के लिए तो कुछ भी नहीं किन्तु मनु के लिए तो ,उस जंगल में बड़ा रहस्य छिपा था। वो समझ नहीं पा रही थी कि कैसे उस जंगल की जानकारी जुटाए ? उसके अंदर जाने के लिए भी मना कर दिया गया था। बिना तैयारी के एकाएक इस तरह जाया भी नहीं जा सकता। तब उसने उस जंगल की जानकारी आस -पास से निकाली। एक दिन ,स्वयं ही उस जंगल के छोर को देखते हुए गाड़ी से निकली ,जंगल तो बहुत बड़ा था ,उसके एक सिरे पर जिस तरफ सड़क थी ,उसके एक तरफ बड़ी नहर थी ,दूसरी तरफ कई गाँव थे ,जिनमें एक गाँव श्याम का भी था।और ये जंगल कहाँ तक जाता है ,उसका कुछ नहीं पता। सबसे ज्यादा परेशानी मनु का शहर ,उससे बहुत दूर था। तब मनु ने श्याम से ही, सहायता लेने में भलाई समझी। किन्तु श्याम को भी समझ नहीं आया कि मनु की किस तरह से सहायता कर सकता है ?
शुरुआत कहाँ से की जाये ?मनु ने कुछ दिन के लिए अपने मम्मी -पापा से कहा -मैं अपनी दोस्त के घर ,दूसरे शहर रहने जा रही हूँ ,जिसका उसने नाम लिया ,उसे वे लोग जानते थे। उन्होंने मनु को इजाज़त दे दी मनु ने भी अपनी दोस्त को समझा दिया ,कभी मम्मी पापा पूछें -तब उसे क्या कहना है ?
सम्पूर्ण तैयारी कर ,वो श्याम के ''फार्म हॉउस 'में रहने आ गयी। उसने जंगल की तरफ की खिड़की को चुना और उस खिड़की में ,अपने द्वारा लाई ''दूरबीन ''को उसमें लगा दिया।एक कैमरा भी जंगल की तरफ लगा दिया हालाँकि वो उस जंगल से काफी दूर था फिर भी मनु को उम्मीद थी कि इसमें जंगल का तो नहीं किन्तु राह का ही कुछ भी दृश्य आ सकता है ,जो ''भागते भूत की लंगोटी ''की तरह कार्य कर सकता है।
श्याम को ,मनु का इस तरह आना और इस तरह फॉर्म हॉउस में रहना अच्छा नहीं लग रहा था किन्तु उसकी ज़िद के आगे क्या कर सकता था ?उसने भी घरवालों को बता दिया कि शहर से मेरा कोई दोस्त आया है। उसका भी खाना बनेगा और वो स्वयं भी अपने दोस्त के संग ही रहेगा। जब भी बाहर जाता ,ताला लगाकर जाता। मनु को जितनी भी जानकारी थी , उसी आधार पर उसने अपना कम्प्यूटर लगा दिया। पैसों की कोई कमी नहीं थी ,जो भी आवश्यकता होती श्याम उसे लाकर देता। एक दिन तो ऐसे ही निकल गया।
अगले दिन , दिन श्याम ने जो बस्ती बसा रखी थी ,उसकी तरफ से कुछ हो हल्ला सुनाई दिया। सभी उधर लड़ाई देखने में लग गए ,मनु भी छत पर चढ़कर ,देखने लगी। तभी उसने देखा ,एक व्यक्ति इस झगड़े का लाभ उठाकर , बस्ती के पीछे की तरफ गया है। झगड़े का कारण तो पता नहीं चला क्योंकि इतनी दूर से स्पष्ट कुछ भी नहीं सुनाई पड़ रहा था। तब मनु ने देखा ,श्याम भी उधर ही गया है और उनकी समस्याओं का निदान कर रहा है। चलो !अच्छा हुआ श्याम आ गया उसने एक ठंडी और गहरी श्वांस ली ,और नीचे आ गयी।
कुछ समय पश्चात ,श्याम आया तब मनु ने पूछा -क्या हुआ था ?
अरे ,कुछ नहीं ,ये लोग भी न..... कितना भी इन लोगों के लिए कर लो ?अपनी फ़ितरत नहीं छोड़ते। मैं इन लोगों को यहाँ इसीलिए लाया था कि इन्हें रोज़गार मिलेगा ,ग़रीबी से निजाद मिलेगी। भीख़ मांगना नहीं पड़ेगा किन्तु न जाने कहाँ से एक व्यक्ति आया और उसने पैसों का लालच दिया और रामफल ने अपना बच्चा उसके संग भेज दिया। कुछ दिनों तक पैसा आता रहा ,उसकी देखा -देखी दूसरे ने भी ,अपना बेटा उसके संग भेज दिया किंतु अब पहले वाले के रामफल के बेटे का पैसा नहीं आ रहा। जब रामफल ने इसका कारण पूछा ,''तो वो कहता है ,कि तुम्हारे लड़के ने जब तक कार्य किया ,पैसा आता रहा। अब वो वहाँ से भाग गया। तो जब वो कार्य ही नहीं कर रहा ,तो पैसा किस बात का ?
फिर रामफल क्या कह रहा है ?
वो कह रहा है ,''मेरा बेटा तुम अपनी ज़िम्मेदारी पर ले गए थे ,उसे लौटाना भी तुम्हारी ही ज़िम्मेदारी बनती है। मेरा बेटा इस तरह भाग ही नहीं सकता।
ये बात भी सही है ,मनु श्याम की बातें ध्यान से सुनते हुए बोली।
तब उस व्यक्ति ने क्या कहा ?
उसने कहा -चतरू का लड़का भी तो काम कर रहा है ,उसका पैसा तो आ रहा है।
मनु बोली -वो अनजान व्यक्ति कौन है ?कहाँ से आया ?क्या ये सब, तुमने जानने का प्रयत्न नहीं किया। वो तुम्हारे लाये आदमियों को बहलाकर उनके बच्चे कैसे ले जा सकता है ?
मैंने मना किया था कि यहीं बहुत कार्य है ,किन्तु उन्हें लगा -यहाँ रहकर हम आगे नहीं बढ़ सकते। कहने लगे -''यहाँ तो हम कार्य कर ही रहे हैं ,बच्चे हमसे आगे निकल जाएँ तो क्या बुराई है ? मुझे लगता है ,- उसने कुछ ज्यादा ही पैसों का लालच उन्हें दिया।मैं उन लोगों को यहाँ लाया ,उन्हें यहां बसाया किन्तु उनकी स्वतंत्रता नहीं छीनी ,उनकी इच्छा है ,जहाँ चाहें रहें।
तुम्हारी ये बात तो सही है ,किन्तु कोई तुम्हारे लोगों के पास आता है और उनमें से बच्चे ही नहीं ,उन्हीं लोगों को उकसा कर ले जाता है ,ये तो सही नहीं है। तभी कुछ सोचते हुए ,कहीं श्याम ! ये लोग , बच्चों को कमाई का लालच दे ,उनसे किसी तरह का कोई गलत कार्य तो नहीं करवा रहे या फिर.......
तुम अपना ये जासूसी दिमाग़ बंद करो ,ऐसा कुछ नहीं है। मैं खाना खाकर आता हु और तुम्हारे लिए खाना लेकर आता हूँ। अब तुम ये सोचो !ये जो तुमने अपना जासूसी पिटारा यहाँ खोला है ,उसका कुछ लाभ भी है या बस ऐसे ही रहना है। कल को घरवालों को पता चल गया तो ,मैं क्या जबाब दूंगा ?और तुम अपने घर और क्या बहाना बनाओगी ?

