ज़िंदगी में कभी -कभी,
ऐसा मोड़ आ जाता है।
जब हम चाहें किसी को ,
वो किसी ओर को चाहने लगता है।
प्यार का मोती तुम्हें छोड़......
किसी और पर लुटाने लगता है।
दिखी नहीं ,सुंदर नार पटाने लगता है।
दौलत तुम्हारी थी ,कोई चुराने लगता है।
दो किनारों के बीच में........
एक स्वछंद धरा बहने लगती है।
टूट जाते हैं ,सभी सपने ,
जब बयार उल्टी बहने लगती है।
त्रिकोणीय प्रेम ,न जीता है ,न जीने देता है।
बेचैनियों की हालत में ,रात -दिन रुलाता है।
क़ीमती वस्तु ,कोई बांटता नहीं ,
इंसानी फ़ितरत को बदल पाता नहीं ।
तुम भी क़ीमती हो ,ये कौन जानता है ?
जौहरी ही हीरे की चमक को पहचानता है।
जो तुम्हारा है ,लौटकर अवश्य आएगा ,
तुम्हारा प्रेम सच्चा है ,लाखों में पहचान जायेगा।
