नमस्कार बहनों और दोस्तों ! आज हम चोरी की बातें करेंगे। अरे नहीं !आप गलत मत समझिये। मैं आपको कोई चोरी की योजना में शामिल करने वाली नहीं हूँ। जब हम छोटे थे ,तो दादी चोर की कहानी सुनाती थी -एक चोर ! किसी राजा के महल में घुसा वो इतना तेज ओर शातिर था कि सभी सिपाहियों और महल में इतने लोगों के होते हुए भी ,चोरी करके ले जाता था। इसका अर्थ था, कि एक चोर को बुद्धिमान और चालाक दोनों ही होना चाहिए अथवा उनकी कहानियों के चोर बुद्धिमान और होशियार भी थे। कुछ फ़िल्मों में ,चलचित्रों में भी हमने देखा- कि कोई चोर है ,किन्तु दयालु है। वो चोरी करता है और चोरी का माल गरीब लोगों में बाँट देता है। तब चोर का एक प्रकार और भी मालूम हुआ। उन कहानियों से हमें इतना तो पता चल ही जाता था कि उस समय के चोर बुद्धिमान ,चालाक और दयालु होते थे।चोर बनना ,उनका शौक नहीं ,वरन मजबूरी थी। तब भी वो लोग ग़रीब लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहते थे। वे विवशता अथवा बेबसी के कारण चोर बने या फिर अमीरों के अत्याचारों के कारण चोर बने। शायद इसी शर्म के कारण मुँह को ढांपकर रखते होंगे ।
वो जमाने तो चले गए ,डाकू और चोरों के जमाने नहीं रहे ,जो धन के कारण चोरी करते थे।आजकल तो बिजली चोर भी मिल जाते हैं ,डाटा चोर भी मिल जाते हैं। आजकल लोगों की आवश्यकताएँ ,अलग ही तरह की हो गयीं हैं। धन तो अब भी चुरा लेंगे ,बल्कि उनके खाते में से ही ,किसी की भी जमा राशि मिनटों में उड़ा सकते हैं। किसी की सहायता के लिए नहीं ,वरन अपने ऐशो -आराम के लिए। उन्हें फर्क नहीं पड़ता -कि ये किसी बुजुर्ग की जीवनभर की कमाई है ,या किसी ग़रीब का ,''पेट काटकर ''जोड़ा गया पैसा ! हालाँकि महंगाई ही सबकी जेब पर निग़ाह रखे हुए है। बाकि के कर इत्यादि ,बस आम जनता तो कमाने और पिसने के लिए ही होती है। चाहे युग कोई भी हो।
कहानियाँ ,कविताएँ अथवा किसी के विचार चुरा लेना ,ये तो मामूली घटना है। आजकल तो अलग ही तरह के चोर हैं। दिल चुराते हैं , नींद चुराते हैं ,फोन चुराते हैं ,किसी की गर्ल फ्रेंड ही चुरा लेते हैं ,दिल चुराना कोई बुरी बात नहीं किन्तु किसी की पत्नी को पहले ,सम्मान की नजर से देखते थे किन्तु आजकल तो क्या लड़की ,क्या महिला ?उम्र का कोई सीमित दायरा नहीं।एक गाना भी तो है -''ना उम्र की सीमा हो ,ना जन्मों का हो बंधन। ''और इसी गाने के शीर्षक पर एक धारावाहिक भी आ रहा है। साठ बरस की आंटी से सोलह साल का लड़का कहता है - मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता ,मैं तुम्हारे प्यार में पागल हो गया हूँ। पचास साल के ,व्यक्ति ज़िंदगी की दूसरी पारी खेलना चाहते हैं। जब से ये सामाजिक माध्यम बना है ,तबसे अपनी ही पहचान ,अपने आपसे ही नहीं, गैरों से भी छिपा लेते हैं। कुछ तो इतने कायर होते हैं ,अपना चेहरा ही छुपा जाते हैं , लड़का होकर लड़की बन जाते हैं। ये चोरी नहीं तो और क्या है ?
ये किस्सा ,आपने सही सुनाया ,मेरे साथ अक्सर ऐसा ही हो रहा है ,एक लड़का मुझे प्रतिदिन 'मैसेज 'भेजता आप मुझसे दोस्ती कर लीजिये। जब दोस्ती कर ली , तब आप बातें क्यों नहीं करतीं ? मैं तुम्हारे प्यार में मर मिटा हूँ। बिन देखे ,बिना जाने उसे मुझसे प्यार हो गया। मेरे बच्चों की उम्र का है ,पता नहीं ,उसका नाम सही है ,या नहीं ,उसका अपना फोटो भी अपना है ,या किसी और का लगाया हुआ है। कहता है -आप मुझ पर विश्वास रखिये। रेनू ने अपने साथ हुई घटना बतलाई।
कामिनी बोली -उस कल के लौंडे पर यकींन कर लें ,यहाँ तो ,जिनके बच्चों को हम पाल रहे हैं ,जिनका घर संभाल रहे हैं ,जो इतने लम्बे रिश्ते की बुनियाद हैं ,वे ही विश्वसनीय नहीं रहे। न जाने ,किस -किसकी तस्वीरें ताड़ते रहते हैं ? उनका भी जी करता है ,अब ये तो घर में ही है ,क्यों न प्यार मुहब्बत का खेल वाक्यों ही वाक्यों में खेला जाये ?उदास ,निराश रिश्तों में जान सी पड़ जाती है । हैलो जी ! खाना खाया। उससे कोई पूछे ,खाना तो देने वाली मैं ही हूँ ,उनकी अपनी धर्मपत्नी।
इसमें तो कुछ भी गलत नहीं ,थोड़ा -बहुत यारी -दोस्ती में चल जाता है। किन्तु यही यारी हम निबाहने लगें तो पतिदेव के ततियाँ लग जाये। चलो ये बात यहीं छोडो !किन्तु जब फोन पर हर जगह ताला लग जाये और चोरी -छिपे बातें होने लगें ,तब ये भी तो चोरी हुई ,अपनी भावनाओं और जज्बातों की। यदि तुम गलत नहीं हो तो....... जिसे ये लोग 'लॉक ' कहते है ,वो क्यों लगाना ?बाहरवालों के लिए तो..... मैं मान सकती हूँ किन्तु बीवी से क्यों छिपाना ? जब तुम गलत नहीं हो ,तुम्हारे मन में कोई चोर नहीं है ,मेरा तो ''उसूल है ,न कर न डर ''तिलमिलाते हुए यामिनी बोली।
चलिए जी ,आज की चर्चा को यहीं विराम देते हैं। कुछ ज्यादा ही गर्मागर्मी हो गयी ,चोरों का पता तो चले या न चले किन्तु चोरों के प्रकार तो हमने गिना ही दिए ,ये आप स्वयं ही ,इस रचना को पढ़कर निश्चित कीजिये कि कौन ,किस तरह का चोर है ? धन्यवाद !
