नमस्कार दोस्तों और बहनों ! आजकल जमाना बहुत ही आगे बढ़ रहा है। बच्चे क्या ,बड़े क्या और महिलाएं भी आज समय के साथ चलना पसंद करती हैं ,हो भी क्यों न ?समय के साथ नहीं चलोगे तो पीछे रह जाओगे ,पिछड़े कहलाओगे ! आज सेहत की दृष्टि से भी सभी जागरूक हो गए हैं। बड़े लोग योग करते हैं और लड़के तो अपनी सेहत के लिए जिम जाने लगे हैं ,इसी कारण अब गली मोहल्लों में भी ज़िम खुल गए हैं। महिलाएं भी अब पीछे नहीं ,ज़िम जाती हैं किन्तु समयाभाव के कारण और घर की ज़िम्मेदारियों के चलते वो अपनी सेहत से समझौता कर जाती हैं। कुछ महिलाएं अब भी ऐसी हैं ,पहले अपने आप की सेहत देखती हैं तब घर -परिवार संभालती हैं। उनका कथन होता है -''जब हम स्वस्थ रहेंगे ,तभी तो घर की भी देखभाल कर पाएंगे ''किन्तु आज भी ऐसी महिलाएं अधिक हैं ,जो सारा दिन घर के कार्यों में अपने को व्यस्त रखती हैं। जिसका परिणाम होता है उनका बिगड़ता स्वास्थ्य और बेड़ौल शरीर !
हो भी क्यों न ?घरों में काम ही इतना रहता है कि वो अपने ऊपर ध्यान ही नहीं दे पातीं और घर के कार्यों में ही थक जाती हैं। मैं ये उन महिलाओं की बात कर रही हूँ , जो जब से इस घर में ब्याहकर आईं हैं और चौबीसों घंटे की ड्यूटी बजा रही हैं।ये बात उनकी नहीं ,जिनके घरों में कामवाली लगी हुई है और बाहर नौकरी भी नहीं करतीं सिर्फ घर की देखभाल और टेली विजन पर धारावाहिक देखना ही उनका कार्य है। उनके लिए तो उनका आलस्य ही सबसे बड़ी बिमारी है। बच्चे होने पर वैसे वे भी ,व्यस्त हो ही जाती हैं। तब ऐसी महिलाओं का दूसरा ही रूप निकलकर आता है। उनका बेडौल शरीर ,कारण कोई भी रहा हो किन्तु विवाह के कुछ वर्षों पश्चात ही ,वो थुलथुली और बेडौल तन के साथ नजर आती हैं और ये तन अधिकतर बच्चे होने में परिवर्तित हो जाता है। जो महिलाएं अपने शरीर के प्रति सचेत रहतीं हैं और परिवार के अन्य सदस्यों का भी सहयोग मिल जाता है। तब वे कुछ सम्भल भी जाती हैं ,किन्तु जिनके ऊपर बच्चे के साथ -साथ घर की भी अनेक जिम्म्मेदारियाँ रहतीं हैं ,उन्हें अपने तन से समझौता करना पड़ ही जाता है।
कुछ तो घर के कामों के साथ -साथ ,खाना भी ठीक से नहीं खाती हैं किन्तु फिर भी उनका शरीर फैल ही जाता है। ऐसे में उन्हें सहारे और सहानुभूति की आवश्यकता पड़ती है ,जो कहीं से नहीं मिलती। पति को भी सभी कार्य समय पर चाहिए ,बच्चो के कार्य भी हो जाते हैं। घर में ,यदि कोई बड़ा -बूढ़ा और बिमार है। तब किससे सहारे की तमन्ना करें ?तब एक समय ऐसा आ जाता है कि वो अपने ही घरवालों को भद्दी -मोटी ,बेडौल और न जाने क्या -क्या नजर आने लगती है ?
जिस पति के परिवार और बच्चों को संभालने में ,उसने अपनी ज़िंदगी के न जाने कितने दिन ,महीने और साल बिता दिए ?उसकी नजर में उसके प्रति न ही धन्यवाद ,न ही सहानुभूति दिखलाई पड़ती है। वरन वो उसके अंदर पहले वाली छरहरे बदन वाली पत्नी ढूंढने का प्रयत्न करता है। जब वो उसे नहीं दिखती ,तब उसकी दृष्टि इधर -उधर घूमने लगती है, उसे अपनी पत्नी को छोड़कर अन्य सभी की पत्नियाँ सुंदर और सुशील नजर आयेंगी। किन्तु वो ये नहीं समझ पाता ,कि इस महिला ने तेरे ही परिवार के लिए ,तेरे बच्चों के लिए ,अपनी सुंदरता कुर्बान कर दी। उसके पेट पर पड़े निशान ये बतलाते हैं- कि वो एक माँ है। ये उसके माँ होने की निशानी है। इस बदन ने तेरे वंश को बढ़ाया है। ये बेडौल शरीर इस बात का सबूत है कि इस माँ ने अपने शरीर पर ध्यान न देकर ,तेरे माता -पिता को समय पर खाना और दवाई पहुंचाई है। तेरा समाज में मान -सम्मान और समय पर हर चीज तैयार मिलने पर, आज चार लोगों के बीच बैठकर शान से बातें करता है। ये तेरी उसी पत्नी ने ,तेरी चार बातें सुनकर भी मान बनाये रखा है।
उस शरीर के अंदर एक सुंदर आत्मा निवास करती है ,जो अपने परिवार के लिए चिंतित है और वो इंसान उसकी उपेक्षा कर ,बाहरी महिलाओं से दोस्ती करना चाहता है ,उनसे बात करने में ,उनके साथ बैठने में अपनी शान समझता है।
ये बात तो दीदी आपने सही कही -जब से मेरे बच्चे हुए ,शरीर फूलने लगा। घर का सारा काम भी मैं ही देखती हूँ। खाना भी कम ही खाती हूँ ,ताकि मेरा वज़न नियंत्रित रहे ,मैं भी चाहती हूँ-'' कि पहले की तरह सुडौल हो जाऊँ'' पर क्या करूं ?कुछ भी फर्क नहीं पड़ रहा। प्रातः काल ही उठकर ,दौड़ती हूँ ,ये स्वयं तो पड़े सोते रहते हैं और मुझ पर झल्ला जाते हैं। कभी -कभी तो मुझे लगता ,मैं पतली होने के चक्कर में अपने आप को यातनाएँ दे रही हूँ कहकर काव्या रुआँसी हो गयी।
भाभी जी ,मैंने भी अपने वजन को नियंत्रित करने का प्रयत्न किया किन्तु मेरे को तो कमज़ोरी आने लगी, सिर घूमने लगा। तब डॉक्टर ने बताया इस तरह तो तुम्हारे अंदर विटामिन्स की कमी हो जाएगी। ये भी कहने लगे -तुम जैसी हो ,मुझे ऐसे ही अच्छी लग रही हो ,ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं ,रेनू ने बताया।समय के साथ -साथ अपने आप ही वजन नियंत्रित होने लगा ,थोड़ी योग इत्यादि करती हूँ और कोई सिरदर्दी नहीं।
जी दीदी !हम जैसे हैं ,वैसे सही हैं। कौन महिला नहीं चाहेगी ? कि वो किसी भी सुंदर महिला से कम न हो। काव्या के पति की तरह नहीं ,इससे प्यार करता तो इसके साथ खड़ा होता ,झल्लाता नहीं। इसे मानसिक रूप से सहारा देता। अभी इसके बच्चे भी छोटे हैं ,किन्तु कुछ लोग किसी भी तरह से समझना ही नहीं चाहते ,कि वो बेचारी बच्ची कैसे अपने को संभालेगी ?
अजी पतियों का क्या है ?एक उम्र के पश्चात भी ,वो नहीं सुधरते ,जब लगा इसने बच्चे पाल दिए ,घर संभाल दिया ,तब अड़ोस -पड़ोस में ताकने लगते हैं। आपको एक किस्सा सुनाती हूँ -मेरी एक सहेली ने किसी सुंदर लड़की की फोटो डाल रखी थी ,नाम तो वही था। मेरे पति ने उसे फ्रेंड रिक़्वेस्ट भेजी और उसने स्वीकार भी कर ली। दोनों की फोन पर बातें होने लगीं ,मेरे पति ने अपनी ही फोटो लगाई थी इसलिए उन्हें पहचान गयी और खूब मजे लिए ,मुझे भी दिखाती। जब बात प्यार -मुहब्बत तक पहुंच गयी तब उसने बताया। जीजाजी मैं हूँ ,आपकी साली !
तब तो उनकी हालत ख़राब हो गयी होंगी सच्चाई सामने आने पर।
नहीं जी ,पहुंचे हुए खिलाड़ी हैं ,कहते हैं -मैं तो तुझे तभी पहचान गया था ,वो तो मैं भी न पहचान पाने का अभिनय कर रहा था। उनकी बातें सुनकर सभी हंस पड़ीं ,हमारी चर्चा भी न जाने कहाँ से कहाँ पहुंच गयी ?अब अपनी चर्चा यहीं समाप्त करते हैं। स्वस्थ रहिये ,प्रसन्न रहिये और योग भी करते रहिये और चुगलियां भी पढ़ते रहिये ,फिर मिलेंगे ,धन्यवाद !
