Kalm ki takat

कलम मेरी.... न ही चैन से..... 

 रहती है ,न ही रहने देती है। 

दिखा नहीं ,सुना नहीं ,

किसी का दर्द बेचैन हो उठती है।

भाव मेरे ,विचार मेरे......  ,

किन्तु कलम की ताकत बढ़ जाती है।


डरना तो जैसे ,उसने सीखा ही नहीं ,

गलत को गलत ,सही को सही कह जाती है। 

जब तक न उठा लूँ ,बेचैन करती जाती है। 

लिखती है ,एक माँ का दर्द......  ,

एक बहन की राखी लिखती है। 

लिखती है ,भावों को......  !

 ख़ुशियों को लिखती जाती है। 

त्यौहार मनाती और सिखलाती है ,कभी -कभी !

दर्द से बेचैन हो ,मौत का ग़म भी लिखती है। 

ये इतनी ताकतवर है.......  ,

छोटी होने पर भी ,शूल बन जाती है। 

अर्ध  रात्रि को उठा ,लिखने लग जाती है। 

मैं थक जाती हूँ ,कभी -कभी ! ये चलती ही जाती है।   

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

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