यूँ तो ज़िंदगी ही अपने में ,एक सुहाना सफर है ,किन्तु इस सफर में भी कई छोटे -छोटे सफर आ जाते हैं ,जो हमारे उन लम्हों को ''यादगार ''बना देते हैं। ऐसा ही मेरा एक ये ''सफर ''है ,लेखन का ''सफ़र '' लिखती तो बहुत हले से हूँ किन्तु आज मैं उस सफर की बात कर रही हूँ जब मैं ''प्रतिलिपि से जुडी। मेरी यात्रा को अभी ज्यादा समय नहीं हुआ। जब भी कभी मैं ,''प्रतिलिपि ''की कहानियाँ ,''फ़ेसबुक पर पढ़ती थी ,तब मैं भी सोचती थी। काश !!!!!!मेरी भी कहानियाँ इसी तरह छपें और मैं भी प्रतिलिपि के लिए लिखूं।
मैं अपनी कहानियाँ अपने ब्लॉग पर ही लिखती थी ,उससे मैं संतुष्ट थी ,किन्तु कुछ समय पश्चात ,ही मेरी जिज्ञासा बढ़ी और मैंने इस एप्प को डाउनलोड भी किया। किन्तु समझ नहीं आया ,कैसे लिखूँ ?मैं अपनी वो कहानियाँ भी डालना चाहती थी। जो मैं लिख चुकी थी ,तब मेरे बेटे ने कॉपी करना बताया और इस तरह मेरी ''यात्रा ''अट्ठारह सितंबर दो हज़ार इक्कीस ''से ''मेरी कहानी ''बड़ी बहु ''से आरम्भ हुई। इसे लोगों ने पढ़ा और सराहा भी ,और तब से अब तक मेरी ''यात्रा ''चल ही रही है। अब तक'' तीन सौ अड़तालीस ''कहानियाँ ,धारावाहिक और कविताएँ ,लेख भी इनमें शामिल है। पहले मैं कहानी ही लिखती थी -यहाँ आकर मैंने धारावाहिक लिखने भी आरंभ किये। वो भी ,डरावने ,रहस्यमयी धारावाहिक भी शामिल हैं ,जो कि मैंने कभी लिखने का सोचा भी नहीं था। किन्तु आप लोगों के सहयोग ने ,मुझे साहस दिया और मैं लिख सकी।
उम्मीद करती हूँ ! आप लोग ,इसी तरह अपना आशीर्वाद और सहयोग बनाये रखेंगे। आप लोगों की हिम्मत के सहारे ''सुपर लेख़क अवार्डस -४ ''में लिखने का प्रयास करुँगी। बस आप साथ रहिये ,अपने आशीर्वाद के साथ ,ताकि मैं अपनी इस यात्रा को जारी रख सकूँ और आप लोगों के लिए ''यादगार ''बना सकूँ।
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