सुख -दुःख में ,यही है ,सहेली ,
ज़िंदगी लगती है ,एक पहेली.....
कभी चेताती ,कभी सिखाती ,
कभी रुलाती ,कभी हँसाती।
दिल में यही ,उमंग जगाती ,
यही दुःख में ,लड़ना सिखलाती।
जीवन के ,अनेक रंग दिखलाती।
हर पल अनबूझ 'पहेली बन जाती।
धूप -छाँव का अंतर् जतलाती।
कभी खिलाती ,कभी प्रेम से...
कभी निराशा से भर जाती।
सुख -दुःख की अजब पहेली है।
कभी लगती ,अपनी सी ,
कभी एक ,धोखा सी ,
कभी लगती ,तितली सी ,
कभी लगती ,अनजानी सी ,
ज़िंदगी है ,एक पहेली सी।
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