नाम पढ़ते ही ,तुरंत ,बहुत पुराना उन्नीस सो सड़सठ का'' उपकार ''फ़िल्म का गाना स्मरण हो आता है। उस गाने के अनुसार हमारे देश की धरती सोना उगलती है। और बचपन में भी सुनते आये हैं ,हमारा देश -''सोने की चिड़िया था ''ये बात तो सही है -हमारी प्रकृति ने हमारे लिए ,साँस लेने के लिए वायु ,पीने के लिए जल ,और प्रकाश ,और अन्न उपजाने के लिए भूमि 'मिटटी 'जैसे अनेक ''प्राकृतिक संसाधनों ''की सभी सुविधाएँ दी हैं ,हमारे देश में धन -धन्य की भी कमी नहीं है।
इस सभी का उपयोग हमारी सुविधाओं के लिए है किन्तु कुछ संसाधन बिना मेहनत के हमें प्राप्त नहीं हो सकते। जैसे की भूमि जल प्रकाश तो मिला किन्तु अन्न प्राप्त करने के लिए परिश्रम की आवश्यकता होती है ,प्रकृति ने इतने संसाधन दिए किन्तु उनका लाभ उठाने के लिए ,परिश्रम भी आवश्यक है बिन परिश्रम हम इनका लाभ नहीं ले सकते।
हमारे देश में ,अनेक वीर ,संत -महात्माओं ,ने भी जन्म लिया। अनेक देश भक्त इसी मिटटी में पैदा हुए ,हमारे देश की सम्पदा देख बाहरी लोग भी ,इस पर अधिकार की भावना से आये ,न जाने कितनों ने ''मुँह की खाई। ''अधिकार भी किया किन्तु हमारे देश भक्तों ने उनके पैर जमने नहीं दिए। हमारे देश को कई बार लूटा भी गया। जिसकी हानि हमारे देश के लोगों ने झेली भी ,अपना देश आजाद करने के लिए ,भी हमारे ही देश के नेता शहीद भी हुए ,प्राकृतिक सम्पदा से ही नहीं ,आध्यात्मिक दृष्टि से भी हमारा देश अनेक महान संतों से भरा पड़ा है। सनातन धर्म की ,संस्कृति ,सभ्यता ,सबसे पुरानी होने के साथ ही सर्वोच्च है। अनेक ऋषि -मुनि यों ने इसी धरती पर ही जन्म लिया।
लो !आपने मेरे देश का नाम तो पूछा ही नहीं ,मेरे देश का नाम ''भारत '' है ,हम विभिन्न जाति ,प्रान्त के होते हुए भी ''विभिन्नता में एकता ''लिए भारतीय हैं। जय हिन्द !
