अभी तक आपने पढ़ा - शैलेश रूहाना से मिलता है ,वो प्रतिदिन उसे शाम को मिलती है और वो ये भी जान नहीं पाता ,कि वो कहाँ जाती है ? उधर नंदिनी के जीवन में भी हलचल मची हुई है ,उसके कॉलिज का लड़का तुषार उसे ''ब्लैक मेल 'कर रहा है और उसे अपने साथ होटल में ले जाना चाहता है। उसके इरादे भाँपकर, नंदिनी उससे कुछ समय मांगती है। अब आगे -
आज प्रातःकाल ही ,शैलेश उठ जाता है ,ताकि जो पहचान उसने बनाई है ,उसे जाकर देख सके। वो जानना चाहता है ,रूहाना किधर से आती -जाती है ?आज वो बहुत ही प्रसन्न है ,जब वो अपनी पहचान वाले स्थान पर जाता है ,तब उसे एक नहीं ,ऐसे कई निशान दिखलाई देते हैं ,उन निशानों को देखकर ,शैलेश को ''अली बाबा चालीस चोर ''की कहानी स्मरण हो आई। अलीबाबा के घर का ,चोरों के सरदार को ,पता न चल सके इसीलिए मरजीना ने उसके दरवाज़े पर लगे निशानों की तरह ,अन्य दरवाजों पर भी ,वैसे ही निशान लगा दिए थे । इसी तरह आज ये निशान भी लगे देखकर ,उसे क्रोध नहीं आया वरन चेहरे पर ,मुस्कुराहट आ गयी।
वो अपने क्लीनिक चला गया ,पता नहीं क्यों ?रह रहकर उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती ,शाम की प्रतीक्षा में ही ,न जाने कब समय व्यतीत हुआ ,उसे पता ही नहीं चला ? बेचैनी ,बेसब्री से वो गाड़ी में बैठा किन्तु रास्ते में वो कहीं नहीं मिली ?उसके विषय में जानने की इच्छा तीव्र हो चली थी। कभी -कभी अपने -आप से ही प्रश्न करता मैं उसके लिए क्यों बेचैन हूँ ?क्यों जानना चाहता हूँ ?उसके पास कोई जबाब नहीं था ,जहाँ वो मिलना चाहता था ,वहां वो मिलती ही नहीं ,शैलेश उसके साथ अधिक से अधिक समय व्यतीत करना चाहता है किन्तु वो तो दिखती ही नहीं ,उसी स्थान पर पहुंचकर दिखाई देती है आज भी वो वहीं थी ,आज तो इससे पूछ कर ही रहूंगा। वो उसके समीप जाकर अपनी गाड़ी रोक देता है और पूछता है -लिफ्ट चाहिए !
वो मुस्कुराती हुई उसके बगलवाली सीट पर आकर बैठ जाती है ,आज तो कोई पर्स नहीं छूटा ,वो सिर्फ़ मुस्कुरा दी। मैं समझ नहीं पाया ,आप यहीं क्यों मिलती हो ? मैं तो तुम्हें वहीं से लाना चाहता हूँ ,जहाँ तुम काम करती हो किन्तु तुम कहीं दिखती ही नहीं।
मैं वहां आपको नहीं मिलूंगी।
क्यों भला !
क्योंकि ,उधर मेरे कुछ जानने वाले भी लोग हैं ,अभी मैं किसी से कुछ भी बताना या कहना नहीं चाहती।
उसके जबाब से , शैलेश ने सोचा -कोई भी लड़की अपनी बदनामी तो करना नहीं चाहेगी किन्तु आज के समय में तो, लड़कों से दोस्ती आम बात है उसने पूछा।
है तो..... किन्तु मेरी बात कुछ विशेष है।
हाँ ,ये तो तुमने सही कहा ,तुममें कुछ तो विशेष है। वैसे एक बात पूछूं ,यदि तुम बुरा न मानो कहते हुए उसने रूहाना की तरफ देखा। उसने देखा ,वो वातावरण में कुछ महसूस कर रही है और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। वो उसको इस तरह देख ,मंत्रमुग्ध सा हो गया। तभी उसको एक झटका लगा और उसने हड़बड़ाकर गाड़ी को ब्रेक लगाए। उसे गाड़ी की रौशनी में ,दो चमकती आँखें दिखी। एकाएक वो ड़र गया। पता नहीं ,कौन सा जानवर है ?
तभी रूहाना भी घबरा गयी और शीघ्रता से बोली -मुझे यहीं उतार दीजिये !
क्या यही जगह है ?शैलेश ने अविश्वास से पूछा। मुझे लगता है ,बाहर वहाँ कोई जानवर है ,ख़तरनाक भी हो सकता है शैलेश ने अपनी चिंता व्यक्त की।
नहीं ,बस आप यहीं रोक दीजिये कहकर उसने दरवाज़ा खोला और बाहर निकल गयी। हल्की रौशनी होने पर भी ,तो भी पेड़ों के कारण अँधेरा ही लग रहा था।
शैलेश इससे पहले की कुछ समझ पाता ,एक तेज़ झोंका सा आया और सब शांत हो गया। वहां न ही ,रूहाना थी ,न ही कोई जानवर दिख रहा था। वो कुछ देर अपनी आँखों को बड़ी -बड़ी करके देखने का प्रयत्न कर रहा था। उसने एक दो बार रूहाना को पुकारा भी ,किन्तु वहां की शांति देखकर वो स्वतः ही डर गया।
रूहाना को लेकर वो झोंका, उसके घर उसके परिवार के समीप गया ,वो उस पर ऐसे अधिकार जता रहा था ,जैसे उसकी सम्पूर्ण ज़िम्मेदारी उसी की थी।
लीजिये ! आपने इसे जाने दिया और ये उस इंसान से इश्क़ लड़ा रही है ,आज तक भी ये ,सफल नहीं हो पाई।
रूहाना !ये हम क्या सुन रहे हैं ?हम लोग इश्क़ नहीं कर सकते ,वो भी ,इन इंसानों से। वे लोग हमारे बीच नहीं रह सकते ,न ही हम उनके बीच ,वे हमारे शत्रु हैं।
ये सब तो रूहाना जानती है ,बल्कि जब वो शैलेश के समीप जाती है ,अपने को नियंत्रित करने का प्रयत्न करती है। उसके ताजे ,गर्म ख़ून की महक उसे मदहोश करती है किन्तु न जाने क्यों ?
वो उसे अच्छा लगने लगा। अपनी प्यास तो वो ,किसी से भी बुझा सकती है किन्तु उसे छूने का मन नहीं करता।
