Barsat ki wo raat [part 10 ]

शैलेश कुछ समझ नहीं पाया ,वो चमकती आँखें किसकी थीं ?और किस कारण से ,रूहाना  डरी  और यहीं उतर  गयी ,तब वो गयी तो गयी कहाँ ?वो कुछ भी नहीं समझ पा  रहा था। ये हादसा इस तरह अचानक हुआ ,समझने से ज्यादा वो ड़र गया। वो वहां से चला  तो आया किन्तु ये सोचकर ,परेशान हो रहा था ,रूहाना कहाँ गयी होगी ,वो अचानक कैसे गायब हो गयी ?जिसने उसे गायब किया वो हवा का झोंका था ,या फिर कुछ और ,वो चमकीली आँखें किसकी थीं ?क्या कोई जानवर या  शैतान ?आज उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें ,साफ नजर आ  रही थीं। कविता ने उसे इस तरह चुपचाप देखा तो बोली -क्या कोई बात है ?

कुछ नहीं माँ....... कहते हुए वो अंदर चला गया। 


कविता को चिंता हुई ,कि ऐसी क्या बात है ?जो ये चिंतित है और कुछ छिपा भी रहा है।अभी भी ,कहीं कोई बात नहीं बनी ,हे !भगवान... कहीं पंडितजी का कथन सही न हो जाए। सुबह का थका -हारा है ,अब इससे कल ही बात करुँगी। 

नंदिनी को फिर से तुषार का फ़ोन आता है ,क्या हुआ अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया। 

ये तुम्हारी मांग अनुचित है। 

तब तुम्हीं सुझा दो ,क्या सही है ?

मैं तुम्हारे पास आने के लिए ,तैयार हूँ किन्तु उससे पहले तुम्हें मुझसे विवाह करना होगा। 

अब ये तो नहीं हो पायेगा ,मेरी जान...... 

क्यों नहीं हो पायेगा ?तुम तो मुझसे प्रेम करते थे न...... 

इस बार उधर से कोई आवाज नहीं आई ,तुषार की आँखें नम अवश्य हुईं क्योंकि वो तो अब भी उसे प्यार करता है किन्तु अब उस प्यार के लिए कमजोर नहीं पड़ेगा। इसने मेरे प्यार को समझा ही कब ?बोला -जब मैं तुम्हें प्यार करता था, उसकी तुमने क़द्र ही कहाँ की ?अब वो प्यार कब का समाप्त हो गया ?

जो प्रेम करते हैं ,उनका दिल इतना कठोर नहीं हो सकता ,तुम वो तुषार हो ही नहीं ,कहते हुए नंदिनी की आँखों से अश्रु की कुछ बूंदें बह चली और एक हल्की सी सिसकी भी जिसे तुषार ने महसूस किया। 

बोला -ये बात बाद में करेंगे ,अभी तो तुम्हें  मेरे पास आना ही होगा ,मैं और सब्र नहीं कर सकता कहकर उसने फोन काट दिया। 

नंदिनी रो रही थी ,अब करे भी तो क्या ?वो तो बुरी तरह फंस चुकी है ,उसकी वो दोस्त..... कभी किसी पर भरोसा नहीं करूंगी। उस पर विश्वास कर वहाँ गयी भी ,और एक बार देखा भी, कि कौन है ?उस चीनी लड़की को देखकर ,वो निश्चिन्त होकर आँखें बंद करके ,आराम करने लगी। पता नहीं ,कब उसे नींद आ गयी ?कब उसके कपड़े उसके तन से अलग हुए और उसकी बाहें तुषार से लिपट गयीं। जब वो उठी ,तो उसी तरह लेटी  हुई थी और बदन पर दो कपड़े ही थे। तब उसने उस लड़की से कहा भी ,ये क्या ?मेरा तौलिया भी नहीं है। 

मालिश तो ऐसे ही होती है ,क्या आप इस पार्लर में पहली बार  आई हैं ?

नहीं ,मैं तो आती रहती हूँ किन्तु वो दूसरी थी ,आज पता नहीं ,मैं कैसे सो गयी ?वो मुस्कुराई और चली गयी।

 उस दिन के बाद से ,इस तुषार ने ,अपनी हरकतों से, उसे हॉस्टल छोड़ने पर मजबूर कर दिया। वो भी किसी भी तरह झुकने के लिए तैयार नहीं थी ,उसे मज़ा चखाना चाहती थी। उसने भी अपनी एक दोस्त का सहारा लेकर ,वो फोटो मिटाने का प्रयत्न करती है किन्तु सफ़ल नहीं हो पाती ,जो तुषार उसे इतना सीधा -दब्बू सा लगता था ,उसका एक रूप ये भी देखने को मिला। बेहद अड़ियल ,नारियल की तरह सख़्त ,ज़िद्दी। पता नहीं ,वो मुझसे प्रेम करता भी था या मुझे पाने के लिए ही ,प्रेम के पैंतरे आजमा रहा था। एक मन तो किया कि भाई को बताकर ,उसकी हड्डियाँ तुड़वा दूँ। फिर स्वतः ही घबरा गयी ,कहीं बात ज़्यादा  न बिगड़ जाये।अब उसने मन ही मन निश्चय किया ,वो उसके पास जाएगी ,तभी मन में प्रश्न उठा उसने तब भी फोटो नहीं हटाई और हर बार का ही बहाना हो गया तो.... अंदर ही अंदर वो घुटती जा रही थी। उसे कुछ सूझ नहीं रहा था। ये ऐसी बात है ,हर किसी को बताई भी नहीं जा सकती थी।पता नहीं ,सोचते -सोचते उसे कब नींद आई ?


प्रातः काल का समय , सभी के लिए एक जैसा ही होता है ,प्रकृति सभी के लिए समान रूप से अपनी छटा बिखेरती है किन्तु हर आदमी उसे अपने -अपने रूप से लेता है। आज नंदिनी तुषार के पास जाएगी। आज शैलेश रूहाना का पता लगायेगा। आज कविता किसी अन्य लड़की की तलाश करेगी और अपनी तलाश में शीघ्रता करेगी। शैलेश ने नाश्ता किया और अपनी गाड़ी से बाहर निकल गया वो उस स्थान की तलाश में था। जहाँ रूहाना के  होने की  उसे उम्मीद थी ,वो गाड़ी से उतर  गया और आस -पास के स्थान में कुछ ढूंढने लगा। आज उसने अपने फोन पर, उस स्थान का नक्शा निकाला। उस स्थान के आस -पास कोई भी ऐसा गांव या रहने का स्थान नहीं था। हाँ काफी दूर ,पहाड़ियों के आसार नजर आ रहे थे। ये उसके लिए अविश्वश्नीय था। इतनी दूर ,पहाड़ी से कोई इधर आ भी सकता है। वो इलाक़ा तो..... वहां कोई रहता नहीं। घूमने  जाने वाले भी आज तक ,लौटकर नहीं आये।तब रूहाना कहाँ गयी होगी ?और वो प्रतिदिन इन्हीं  किन्हीं रास्तों से होकर कहाँ  जाती है और हमेशा शाम नहीं अँधेरा ही समझो ,अँधेरे में ही क्यों मिलती है ?और वो चमकीली बड़ी -बड़ी आँखें किसकी हो सकती हैं ?तभी उसे माँ की बात स्मरण हो आई -''रात्रि में ,चुड़ैल ,पिशाचिनी और ऊपरी हवाएं घूमती हैं ,शीघ्र ही घर आया कर...... 

कहीं  ये कोई साया तो नहीं ,जिस कारण ,मैं उसकी सुंदरता के जाल में फंसा जा रहा हूँ। अबसे मैं शीघ्र ही अपने घर जाया करूंगा ,उसकी प्रतीक्षा नहीं करूंगा। तभी मन में विचार आया -कहीं ,वो कोई सीधी -सा धी लड़की हुई ,अथवा किसी मुसीबत में भी हुई ?तो ये तो बहुत बुरा होगा कि मैं उसकी सहायता नहीं कर पाया। 

  

 


 


laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post