माता वैष्णो देवी
कुदरत का कहर है ,छाया ,
घनघोर घटा काला बदल है आया।
देवी माँ ,ने अपना कैसा रूप ये दिखाया।
भक्तों ने भी ,जोरों से जयकारा लगाया।
हिल उठी धरती ,काँप उठा हर साया।
ये कैसा ?कुदरत ने अपना कहर दिखलाया।
कोरोना
था तो ,ये इंसानों की ही देन !
किन्तु बन गया ''क़ुदरत का कहर। ''