शैलेश की सगाई ,सुनेहा के साथ हो जाती है ,किन्तु जब शैलेश से ,रुहाना मिलती है तब उसे सब स्मरण हो जाता है और अपनी माँ कविता से उसे मिलाने की बात करता है। रुहाना का प्रेमी ,मैक भी इंसानों के विरुद्ध अपने कुछ लोगों को इकट्ठा करता है। माँ भी अपने कुछ प्रश्न शैलेश के सामने रखती है। तब शैलेश कई पुस्तकें छान मारता है और हार थककर सो जाता है। अगले दिन वो रुहाना से मिलता है और जानना चाहता है -क्या वो बिना रक्त के ऐसे ही रह सकती है ?रुहाना ने 'हां 'तो कर दी,उसने दो दिन तक कुछ नहीं खाया या पिया , किन्तु जैसे -जैसे समय व्यतीत होता गया, उसकी हालत खराब होती गयी। तब उसकी माँ बोली -बेटा यही तो हमारी कमजोरी है ,यही हमारा भोजन है ,इसके बिना हम जिन्दा नहीं रह सकते।
रुहाना की कमजोरी बढ़ती जा रही थी ,उसे देखकर ,मैक का क्रोध भी बढ़ता जा रहा था। क्यों वो किसी इंसान के पीछे ,इस तरह अपनी जान गंवा रही है ? जब शैलेश उससे मिलता है ,तब उसकी हालत देखकर ,उसे अपने कहे पर ,पछतावा होता है और वो उससे कहता है -कि वो मेरा ही खून पी ले किन्तु स्वस्थ रहे ,वो मुस्कुराती है और कहती है -तुम हम सबसे अलग हो। अच्छे इंसान हो ,तुम्हारी अच्छाई और ये प्रेम ही तो मुझे तुम्हारे समीप लाया। अपने स्वार्थ के लिए ,मैं तुम्हें नहीं मार सकती। तुम नहीं जानते ,हम जिन्दा दीखते तो हैं किन्तु हैं नहीं ,तुम्हारा प्रेम ही मेरे लिए काफी है।
इधर नंदिनी को एक फोन आता है ,तुमने जो अपनी नौकरी के लिए फार्म भरा था ,उसके साक्षात्कार का समय निश्चित किया है और तुम्हें सही समय पर पहुंच जाना है। वो फॉर्म भरकर तो ,नंदिनी भूल भी चुकी थी और आज अचानक ,वो ये खुशखबरी अपनी मम्मी को सुनाती है। मम्मी उसे जाने की इजाज़त दे देती है।
आज घर में मेहँदी की रस्म है। कविता भी लड़की वालों को इंकार का कोई कारण न बता पाने के कारण ,समय पर सब छोड़ देती है। तभी एक साथ कई लोग, वहां आकर रंग में भंग डाल देते हैं। वे सब और कोई नहीं मैक और उसके साथी थे। रुहाना की दुश्मनाई में , मैक के दोस्त ,इंसानी खून के लालच में चले आते हैं। हवा में उड़ते वो दानव आये मेहमानों पर आक्रमण कर रहे थे।
रुहाना भी अपने ,प्रेम से मिलने उसके घर आती है किन्तु वहां चीख़ -पुकार सुनकर ,उसके कदम तेजी से ,उसकी गली और उसके घर में जाकर देखती है। मैक और उसके साथी ,यदि कोई इंसान गली में या किसी घर में ही दिख रहा था तो उनका खून पी रहे थे। मैक ने ,अपने दोस्तों के संग आकर वहां आतंक मचा रखा था। रुहाना ने ,मानसिक तरंगों द्वारा अपनी माँ को सूचित किया और अपने सभी लोगों को ,मैक और उसके दोस्तों को रोकने के लिए बुलवा लिया। कुछ ही देर में ,रुहाना की तरफ से भी लोग आ गए और उन सभी में लड़ाई होने लगी। मैक के आदमियों ने शैलेश और उसके माता -पिता को बांध रखा था। वैसे उसके घर में आतंक मचा रखा था , उनसे बचने के लिए कोई मेज के नीचे ,कोई स्नानागार में ,कोई बालकनी में ,जिसको भी जहाँ जगह मिली ,छिप गया था। किन्तु मैक के साथी तो एक -एक को ढूँढ -ढूँढ़कर ,उनका रक्त पान कर रहे थे।
अब तो रुहाना की तरफ से भी लोग आ गए , उड़ -उड़कर लड़ रहे थे। रुहाना ने मैक के आदमियों को समझाया कि वो अपने आदमियों को रोक ले ,वरना अंजाम बुरा होगा। इस लड़ाई में सबने अपनी -अपनी शक्तियों का प्रदर्शन भी किया। एक -दो इंसानों ने हिम्मत भी दिखाई और उनसे लड़ना भी चाहा किन्तु ''मुँह की खानी पड़ी। ''मैक हँसते हुए बोला -हम तो पहले से ही मरे हुए हैं ,हमें मारना तुम्हारे बस में नहीं। कभी वो हवा में उड़ जाते ,कभी नीचे आ जाते ,कभी पंछी का रूप धारण कर लेते ,वे जवान पिशाच थे उनकी ताकत भी ज्यादा थी। तब एक ने मैक से कहा -ये तुम क्या खेल कर रहे हो ?जो इसकी जड़ है ,उसे ही समाप्त क्यों नहीं कर देते ?तब मैक बोला -इस तरह तो रुहाना भी उसे अपने में शामिल कर सकती थी। हमने काटा तो ये भी हम जैसा ही हो जायेगा और इसे भी बहुत शक्तियां प्राप्त हो जाएँगी। जब हम जैसा ही हो गया ,तब रुहाना को इससे विवाह करने से कोई नहीं रोक सकता। अभी इन दोनों के न मिलने का कारण इसका इंसान होना ही है।
तब मैक ,रुहाना से कहता है -यदि तुम मुझसे विवाह के लिए तैयार हो तो ,ये ख़ूनी खेल रुक सकता है।
रुहाना कहती है -मैं भी ख़ून ख़राबा नहीं चाहती ,मैं अपने प्यार और उसके परिवार को बचाने के लिए ,तुमसे विवाह करने के लिए तैयार हूँ। रुहाना तब शैलेश से कहती है -चाहती तो मैं ,भी यही थी कि मैं और तुम साथ रहें किन्तु मुझमें और तुममें बहुत अंतर् है। जो खून तुम्हारी रगो में दौड़ रहा है ,वही मेरा भोजन है। तुम्हारा साथ पाकर मुझे बहुत अच्छा लगा किन्तु अब मुझे जाना होगा ,तुम मेरी यादों में हमेशा रहोगे कहकर उसके परिवार को मुक्त कर देती है और मैक से कभी भी इधर न आने का वायदा लेकर ,वे सभी चले जाते हैं।अगले दिन शांतिपूर्वक ,शैलेश और सुनेहा का विवाह हो जाता है। रुहाना मैक के द्वारा अपने को इस तरह धमकी दिए जाने पर माफ नहीं करती और उसका सिर काटकर ,अपने विवाह के कुंड में डाल देती है।
नंदिनी जब अपने साक्षात्कार के लिए पहुंचती है ,तब उसे पता चलता है -उसकी नौकरी तो लग गयी उसे बड़ा आश्चर्य होता है। मेरा साक्षात्कार भी नहीं हुआ और नौकरी भी लग गयी। तब एक दिन उसे पता चलता है कि उसका बॉस और कोई नहीं ,उसका प्रेमी तुषार ही है ,जिसने अपनी थोड़ी ज़मीन बेचकर ,एक कम्पनी खोली थी और उसमें नंदिनी को भी रख लिया था। अब तो तुषार भी ,उन्हीं के बराबर स्तर का हो गया था। लगभग दो वर्ष पश्चात , एक दिन वो उसके घर आकर नंदिनी का हाथ मांग लेता है। नंदिनी भी अपने उस नए बॉस से विवाह के लिए ,तैयार हो जाती है।
कहते हैं ,इन बातों को बरसों बीत गए ,शैलेश और नंदिनी अपने -अपने परिवार में खुश हैं। उनके बच्चे भी हो गए। किन्तु शैलेश के पास एक पंछी....... चमगादड़ आज भी आता है और उसके साथ शैलेश कमरा बंद करके बहुत देर तक समय बीताता है और फिर वो न जाने किस ,स्थान पर किधर चला जाता है ?कोई नहीं जानता ! '' बरसात की रातों ''को तो वो हर बार आता है। शैलेश के माता -पिता समझते हैं ,वो '' रुहाना 'ही है।

