Doshi kon ?

क्या बताऊँ  ?बहनों  !कभी -कभी ऐसे हादसे हो जाते हैं ,जिन पर, चाहकर भी हमारा बस नहीं होता। हम सोचते कुछ और हैं ,और हो कुछ ,ओर जाता है। हम अपने ऊपर तो बंधन लगा सकते हैं ,किन्तु किसी की सोच अथवा व्यवहार पर बंधन नहीं लगा सकते।इस दुनिया में भाँति -भांति के लोग हैं ,इसी प्रकार उनके व्यवहार भी अलग ही हैं। सभी की आवश्यकतायें  भी ,अलग ही है। ऐसे में ,एक पुरुष जो किसी अन्य वातावरण में पलता  है ,एक स्त्री जो किसी अन्य वातावरण से और एक अलग सोच लेकर आती है। विवाह पश्चात ,पुरुष का वातावरण तो वही रहता है किन्तु स्त्री का परिवार ,और वातावरण बदल जाता है।


 

माना  कि दोनों को विवाह पूर्व ,मिलवा दिया जाता है ,आज के समय में ,दोनों को ही एक -दूसरे को समझने परखने का मौका दिया जाता है। किन्तु दोनों अलग सोच ,अलग खान -पीन  ,अलग होने पर भी दोनों एक -दूसरे से सामंजस्य बैठाने  के लिए तत्पर रहते हैं और इस तालमेल का मुख्य कारण उनका एक -दूसरे के प्रति आकर्षण है। एक -दूसरे के प्रति प्रेम महसूस करना ,उसके साथ ही, उनकी अन्य और भी आवश्यकताएं भी जागरूक होने लगती हैं। ये आकर्षण तब तक बढ़ता रहता है ,जब तक कि वो वस्तु या रिश्ता हमें मिल नहीं जाता। इसका एक कारण शारीरिक पूर्ति भी है ,जब तक हमें जिसके प्रति आकर्षण बना है ,वो हासिल न हो जाये ,तब तक मन मष्तिष्क में उसका ही शरूर रहता है। आवश्यकता पूर्ण होते ही ,आकर्षण कम हो जाता है अथवा जो चीज हमारे समीप रहती है ,उसका उतना महत्व, हमारी नजरों में नहीं रह जाता है। 

ये चीज ,अथवा इस तरह की फ़ितरत अधिकतर पुरुषों में अधिक होती है। एक सुंदर नारी देखी  नहीं कि उस पर जी जान से लट्टू हो जाते हैं। उसके लिए मर -मिटने को तैयार रहेंगे ,किन्तु उससे विवाह होने के पश्चात भी ,व्यक्ति में ,दूसरे को देखने की ललक क्यों रह जाती है ?क्या उसकी विकृत सोच ,ये सब करने के लिए मजबूर करती है ,अथवा कभी -कभी परिस्थिति ऐसी बन जाती हैं कि व्यक्ति वो सब करने के लिए मजबूर हो जाता है ,जो करना नहीं चाहता या फिर उसे अपनी इन्द्रियों पर वश नहीं है। अब आप सोच रही होंगी ,ये सब मैं आपसे क्यों कह रही हूँ ?अब आपसे नहीं कहूंगी तो किससे  कहूंगी ?

हमारी ही गली ,में एक लड़के की नई -नई शादी हुई ,बहु गर्भवती है ,सब -कुछ अच्छे से चल रहा था। अचानक सुनने में आया, कि दोनों ही बाप -बेटा जेल चले गए। जब पुलिस उन्हें ,पकड़कर ले गयी ,तब सबको पता चला। घर में ,पत्नी गर्भवती है ,माँ अकेली क्या -क्या कर लेगी ?चर्चा का विषय था -कि दोनों ही ने अपनी फैक्ट्री में काम करने वाली महिला को छेड़ा ,बल्कि उस लड़की ने बताया कि बेटे ने मेरा ''रेप ''किया और पिता ने दूसरी को छेड़ा। अब इतने सभ्य परिवार के लोगों से ,ये क्या हो  गया ?किसी को भी उनसे इस व्यवहार की  उम्मीद नहीं थी। मैं अब ये पूछना चाहती हूँ ,-उनका ये व्यवहार किसलिए और क्यों ?कुछ जो उनके समर्थक थे ,बोले -लड़की ने उन पर झूठा इल्ज़ाम लगाया है ,कुछ कह रहे थे कि बताओ -इसकी गर्भवती पत्नी ,पर इस बात का क्या असर होगा ?उस पर क्या बीतेगी ?जब उसे पता चलेगा कि उसका पति धोखेबाज़ है। 

चलो ,लड़का तो जवान है किन्तु बाप की तो उम्र हो चुकी है ,वो भी इस उम्र में ये हरकतें...... छी -छी 

मैं पूछना चाहती हूँ ,ऐसा क्यों और किन परिस्थितियों में हुआ ?आज उनकी फैक्ट्री में ,कोई कार्यक्रम था जिसमे ,रात्रि में सभी लोग आये। देर रात्रि तक कार्यक्रम होना था। मालिक क्या ,मजदूर क्या सभी संग थे ?जो लड़कियां ,वहां पूरे कपड़ों में ,कभी सूट या जींस में आतीं ,आज वो इस पार्टी के लिए ''वन पीस ''पहनकर आईं । आज सबकी निग़ाहें उन पर टिकी थीं ,आज उनका नया ही रूप देखने को मिला था। 

उस फैक्ट्री का मालिक 'मलिक ''हालाँकि अधेड़ उम्र हो गया ,ससुर भी बन गया और अब तो दादा भी बनने जा रहा है ,उम्र यही कोई पचास के लगभग होगी। किन्तु आज भी उसकी इच्छाएं मरी नहीं हैं ,सभ्यता के दायरे में रहता है। कभी -कभी पत्नी से समागम की इच्छा जाहिर करता किन्तु पत्नी झिड़क देती -'[शर्म नहीं आती ,बहु -बेटा घर में हैं। उसकी कई बार इच्छा होती किन्तु वो उसे हर बार किसी न किसी बहाने से इंकार कर देती ,उसके तन में तो ज्वाला प्रज्वलित हो रही थी  और पत्नी समझने को तैयार नहीं ,अब वो कहाँ जाये ?

उधर बेटे की पत्नी गर्भवती ,है ,वो भी जैसे -तैसे दिन काट रहा था किन्तु एक ललक ,इच्छा मन में पल रही थी। आज उस कार्यक्रम में ,शराब भी थी और शबाब भी। जब शराब गले से नीचे उतरती है ,धीरे -धीरे अपना रंग दिखाना आरम्भ करती है। उस रात्रि भी ऐसा ही हुआ ,दोनों बाप बेटों ने ,खूब पी  थी ,ताकि मन में उमड़े विचार ,नशे में डूब जाएँ किन्तु महीनों की दबी  इच्छा को शराब ने ,अपना रंग देना आरम्भ किया। सामने लड़की खड़ी थी और क्या चाहिए ,ये कैसी दूरी ?उन्हें तो लगा -ये हमारे लिए ,खुला आमंत्रण है। और फिर हम इस कम्पनी के मालिक भी ,हमारा तो अधिकार अधिक  बनता है। 


ये तो मैं नहीं जानती ,असल बात क्या है ?क्योंकि उन लोगों ने भी अपने बचाव में कहा था -कि हमने उन्हें किसी के साथ देख लिया और डाँटा भी किन्तु ये हमें फंसा रही हैं  ,झूठ बोल रही है ,ये सब आज मैं अकेली ही आप लोगों से बाँट रही हूँ क्योंकि अन्य दोस्त तो नहीं आईं , शायद इस हादसे का असर है। मेरे मन में ,प्रश्न घुमड़ रहा है ,वो हादसा  हुआ या नहीं, या होते -होते रह गया। किन्तु इन सबमें ज़िम्मेदार कौन है ?उन लड़कियों का ख़ुलापन ,इतनी रात गए आना ,या ये मुई शराब या इसकी दोषी उनकी पत्नी भी हैं। या वहां का वातावरण ,कौन दोषी है ?जरा सोचिये !

laxmi

मेरठ ज़िले में जन्मी ,मैं 'लक्ष्मी त्यागी ' [हिंदी साहित्य ]से स्नातकोत्तर 'करने के पश्चात ,'बी.एड 'की डिग्री प्राप्त करने के पश्चात 'गैर सरकारी संस्था 'में शिक्षण प्रारम्भ किया। गायन ,नृत्य ,चित्रकारी और लेखन में प्रारम्भ से ही रूचि रही। विवाह के एक वर्ष पश्चात नौकरी त्यागकर ,परिवार की ज़िम्मेदारियाँ संभाली। घर में ही नृत्य ,चित्रकारी ,क्राफ्ट इत्यादि कोर्सों के लिए'' शिक्षण संस्थान ''खोलकर शिक्षण प्रारम्भ किया। समय -समय पर लेखन कार्य भी चलता रहा।अट्ठारह वर्ष सिखाने के पश्चात ,लेखन कार्य में जुट गयी। समाज के प्रति ,रिश्तों के प्रति जब भी मन उद्वेलित हो उठता ,तब -तब कोई कहानी ,किसी लेख अथवा कविता का जन्म हुआ इन कहानियों में जीवन के ,रिश्तों के अनेक रंग देखने को मिलेंगे। आधुनिकता की दौड़ में किस तरह का बदलाव आ रहा है ?सही /गलत सोचने पर मजबूर करता है। सरल और स्पष्ट शब्दों में कुछ कहती हैं ,ये कहानियाँ।

Post a Comment (0)
Previous Post Next Post